18 Comments

  1. वाह प्रज्ञा आपने बहुत खूब लिखा है। आपने समाज में व्याप्त इस बुराई पर गंभीर चोट की है। लेखनी को सैल्यूट। इस पर मैं भी दो पंक्तियाँ प्रस्तुत करना चाह रहा हूँ—
    भ्रूण हत्या पाप है
    तू पाप का भागी न बन
    बाप है बेटी बचा ले
    बधिक अपराधी न बन।

  2. इस कविता के लिए मैं आपको पद्मविभूषण देता हूँ प्रज्ञा मैम…
    बहुत ही अच्छा संदेश
    दिया है आपने तथा भ्रूणहत्या के पाप पर उत्तम तथा अलग प्रकार की रचना है…
    मैंने बहुत कवियों की कवितायें पढीं हैं परन्तु
    आपकी लेखनी के समान नवीन प्रयोग, भाव, अभिव्यक्ति कहीं भी प्राप्त नहीं होती है और मैं बार बार सावन पर लौटकर आ जाता हूँ
    प्रेम की तथा लड़की की मर्यादा का खयाल आपने बखूबी रखा है आप जैसी लड़कियां यदि समाज में हों तो हर माँ बाप गौरवान्वित
    ंहसूस करेगा..
    जय हो आपकी

  3. बहुत ही अच्छी कविता है
    जितनी भी तारीफ की जाए कम है ।
    बिलकुल सही तथ्यों को उजागर किया है मैम।

  4. अपनों के लिए, प्रेम का त्याग करना ही पड़ता है और एक लड़की के गलत फैसले से पूरे समाज की लड़कियों को उसका अन्जाम भुगतना पड़ता है,बहुत सुंदर भाव

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