7 Comments

  1. इंतजार कैसा भी हो सिर्फ
    सब्र और आस का दामन थामे ही कट पाता है ,
    क्या ख़ुशी क्या गम , दोनों ही सूरतों में
    पल पल गिनना मुश्किल हो जाता है ,
    वाह, बेहतरीन पंक्तियाँ, सुन्दर कविता

  2. “लहरें होकर अपने सागर से आज़ाद
    तेज़ दौड़ती हुई समुद्र तट को आती हैं ,
    नहीं देखती जब सागर को पीछे आता
    तो घबरा कर सागर को लौट जाती हैं ,”
    बहुत ही सुंदर पंक्तियां
    बहुत ही उम्दा रचना

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