जब तक़दीर से दोस्ती की, तब तदबीर ने मुझ से कहा।
मुझे मत छोड़ ए नादान गर मैं नहीं तो तकदीर कहाँ।।
तक़दीर और तदबीर
Comments
6 responses to “तक़दीर और तदबीर”
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वाह क्या बात है
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👌✍✍❤
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ये बात तो सही है सर…बिना कर्म के नसीब भी कब तक साथ निभाएगा
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सुन्दर
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बहुत खूब
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,सुंदर
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