13 Comments

    1. थैंक्यू भाई…
      यह घटना मेरी फ्रेंड के साथ हुई जो आज दुनिया में नहीं है
      मैं हर माँ-बाप की आँखें खोलना चाहती हूँ जो आँख मूदकर सब पर भरोसा कर लेते हैं…

  1. यथार्थ चित्रण मैम।
    बहुत सारे माँ बाप जानकर भी अनजान बन इस कुकृत्य को
    अनजाने में बढ़ावा देते हैं ।
    आपने जिस तरह से इसे व्यक्त किया, उसके लिए मेरे पास अलफाज नहीं है ।

    1. बात यह है कि यह घटना मेरी फ्रेंड के साथ हुई जो दुनिया में नहीं है..
      इस कविता का एक एक शब्द कल्पना नहीं सत्य है

  2. बहुत ही मार्मिक घटना की बहुत सलीके से अभिव्यक्ति की है प्रज्ञा ।
    पिता तुल्य चाचा पर विश्वास किया, और उस विश्वास की कैसे धज्जियां उड़ी ।ये सच में एक चौकन्ना करने वाली रचना है। समाज को एक सीख देती हुई काबिले तारीफ़ प्रस्तुति ।

    1. बात यह है कि यह घटना मेरी फ्रेंड के साथ हुई जो दुनिया में नहीं है..
      इस कविता का एक एक शब्द कल्पना नहीं सत्य है
      धन्यवाद दीदी…

  3. यथार्थपरक एवं मार्मिक रचना
    समाज में लगभग 80% महिला उत्पीडन एवं बलात्कार की घटनाएं परिवार के सदस्यों ,संगे सम्बन्धित लोगों द्वारा होती है।
    सच्चाई को प्रस्तुत करती बहुत ही बेहतरीन अभिव्यक्ति

    1. सही कह रही हो..तथाकथित चाचा रोज पुलिस के साथ ढूढने जाते थे लड़की को जबकि खुद नदी में फेंक आये थे जब पता चला कि शक मुझ पर है तब भाग गये…

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