प्रेम की नदिया बहा दो

प्रेम की नदिया बहा दो
द्वेष नफरत छोड़ दो
देश के जन जन में एका
की जगा दो भावना।
दूर फेंको भेदभावों को
सभी को प्यार दो,
नफ़रतों के पोषकों को
त्याग दो, दुत्कार दो।
देश की उन्नति में बाधाएँ
रहेंगी तब तलक,
जाति-धर्मों में बंटी
जनता रहेगी जब तलक।
एक दिन जब एक स्वर में
सब कहेंगे हिन्द की जय
तब नहीं कोई भी ताकत
रोक सकती है विजय।
देश सीमा में दुश्मन
बेवजह ललकारते हैं
एकता आज सब
उनको दिखा दो आईना।

Comments

18 responses to “प्रेम की नदिया बहा दो”

  1. क्या बात है उत्तम विचार

    1. Satish Pandey

      सादर आभार

  2. Praduman Amit

    प्रेम की प्रति उतम संदेश है।

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  3. Geeta kumari

    देश भक्ति की भावना से सजी बहुत सुंदर कविता है
    सच है कि जातिवाद की नफरत देश की उन्नति में बाधक है ।
    ” एक दिन जब एक स्वर में सब कहेंगे हिन्द की जय”।
    अति सुंदर प्रस्तुति….

    1. Satish Pandey

      बहुत ही, सुन्दर समीक्षा। उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      आभार

    1. Satish Pandey

      Thank you

    1. Satish Pandey

      Thank you

  4. जय हिंद सर

    1. Satish Pandey

      जय हिन्द

  5. suman kumari Avatar

    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति है

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  6. बहुत सुंदर पंक्तियां

    1. Satish Pandey

      Thank you

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