मेरी कलम

मैनें लिखना छोड़ दिया है,
कलम को मैनें तोड़ दिया है
कलम रो-रो के पूछ रही है….
क्यूं ये ऐसा मोड़ लिया है,
क्या कहूं कलम से अब मैं..
तूने तो कुछ भी नहीं किया है
अंधी रेस में ,तू ना दौड़
करना ना बेमतलब होड़
सौन्दर्य को पीछे ना छोड़ना
काव्य-कला को कभी ना तोड़ना…

*****गीता*****

Comments

14 responses to “मेरी कलम”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया आपका भाई जी 🙏

  2. बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति। इतनी जबरदस्त लेखनी। इस प्रतिभा को सेल्यूट है।

    1. Geeta kumari

      भाव को समझने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर…
      कविता की समीक्षा एवम् सराहना के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद 🙏

  3. Great poem, आपकी कलम बहुत जबरदस्त है वह टूट नहीं सकती बल्कि नए कलेवर कविताएं बिखेरेगी।

    1. Geeta kumari

      सराहना के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद ईशा जी आपने मेरी कलम के लिए इतना सुंदर लिखा है कि मैं तो भाव विभोर सी हो गई हूं।
      आपकी आशाओं पर अवश्य ही खरी उतारने का प्रयास करूंगी । आपने मुझे बहुत सुकून दिया है आपका हृदय तल से आभार ।

  4. आपकी कलम में जबरदस्त ताकत है वह न रुक सकती है न टूट सकती है।

    1. Geeta kumari

      आपका सादर आभार एवं बहुत बहुत धन्यवाद सर🙏
      मेरी कलम के सम्मान के लिए “धन्यवाद “शब्द बहुत ही छोटा पड़ रहा है सर । बहुत बहुत आभार ।

  5. अपनी कलम की धार बरकरार रखनी है। वाह

    1. Geeta kumari

      Ok chandra ji. Many many thanks for your appreciation.
      I will try my best.

    2. Geeta kumari

      🙏🙏

  6. कुछ लोग आगे रहने और पवाइंट्स हासिल करने के लिए एक मिनट में 4 कविताओं पर कमेंट कर रहे हैं। जो कि अनैतिक है। ऐसे लोगों को देख किसी ने अपना दिल छोटा नहीं करना चाहिए

    1. Geeta kumari

      मेरा इतना अधिक साथ देने के लिए आपका दिल की गहराइयों से बहुत बहुत धन्यवाद इंद्रा जी। वैसे आज के साथ के लिए ये “धन्यवाद्” शब्द बहुत ही छोटा प्रतीत हो रहा है। आप जैसे दोस्त हों तो मुझे सच में दिल छोटा करने की आवश्यकता नहीं है। आपने मेरा बहुत सम्मान बढ़ाया है इंद्रा जी । आभार कह कर दोस्ती को कम नहीं करना चाहूंगी🙂

  7. Geeta kumari

    Thank you ma’am for your support

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