4 Comments

  1. बस अपनों के दिये दर्द ही
    बयां करती हूँ..
    वाह बहुत खूब।
    दर्द ही तो कविता की जननी है। सुमित्रानन्दन पंत जी ने कहा था कि – वियोगी होगा पहला कवि, आह से निकला होगा गान।

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