बस कुछ दिन की बात है
सब भूल जाएंगे
काम – धन्धों में मशगूल हो जाएंगे
नईं कहानी का शोर मचाएंगे
फिर कोई और निर्भया होगी
जीवन की जंग हार जाएगी
कोई कुछ ना करेगा
बस इक नाम और जुड़ेगा।
एक और निर्भया
Comments
22 responses to “एक और निर्भया”
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वाह वाह, सुंदर कविता
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शुक्रिया
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बहुत अच्छी कविता
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धन्यवाद
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फिर कोई और निर्भया होगी
जीवन की जंग हार जाएगी
बहुत ही यथार्थ लिखा है आपने। कुछ समय तक काफी बातें होती हैं, फिर सब चुप हो जाते हैं। यथार्थ उजागर करने वाली लेखनी को सैल्यूट-

शुक्रिया
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“कोई कुछ ना करेगा इक नाम और जुड़ेगा”
यथार्थ चित्रण किया है अनु जी । वास्तविक अभिव्यक्ति-

धन्यवाद
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वाह आदरणीय अनु जी कम लिखती हैं लेक़िन ठोस लिखती हैं। बहुत खूब
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धन्यवाद
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बहुत ही सच्ची बात कही आपने लोग थोड़े दिन ही किसी विषय को महत्व देते हैं बाद में सब अपने अपने रास्ते हो जाते हैं
जब तक कानून व्यवस्था और और लोगों की सोच ,मैं बदलाव नहीं आता तब तक ऐसे ही चलता रहेगा-

शुक्रिया
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अनु जी की कविता लाजवाब है।
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शुक्रिया
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बहुत खूब
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धन्यवाद
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सुन्दर
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धन्यवाद
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बहुत ही यथार्थ परक सुंदर रचना
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शुक्रिया
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👌👌
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शुक्रिया
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