एक और निर्भया

नहीं हूं मैं हिन्दू पहले,
न ही दलित की बेटी हुं।
मैं निर्भया आज की ,
इंसाफ़ मांगती,
मैं पहले देश की बेटी हुं।
क्यों नहीं पसीजा तुम्हारा हृदय,
जब हैवानों ने मुझे शर्मसार किया,
क्यो चुप थी मीडिया सारी,
जब जिस्म मेरा तार-तार किया,
कब मैं इंसाफ पाऊंगी?
या राजनीति में उलझ ,
फिर से दम तोड़ जाऊंगी।
रहेगा फासला वर्षों का,
या पल में इंसाफ पा जाऊंगी,
….मैं निर्भया आज की…

Comments

22 responses to “एक और निर्भया”

  1. Ritika bansal Avatar
    Ritika bansal

    She deserve a quick justice. Justice delayed is equal to justice denied.

    1. बिल्कुल सही कहा आपने रीतिका जी,
      समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद

  2. इंसाफ मांगती है एक और निर्भया

    1. जी सर, समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद

  3. Neetu Mishra

    Superior

  4. Aditya Kumar

    आपकी भावना का सम्मान।

    1. बहुत बहुत आभार

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar

    हाथरस घटना से जुड़े बहुत ही मार्मिक व यथार्थपरक भाव

    1. जी सर, धन्यवाद

  6. akash choudhary

    Beautiful

  7. Anuradha Sharma

    💯👌👌

  8. प्रतिमा

    धन्यवाद

  9. Anonymous

    दिल को छू लेनी वाली और सोचने के लिए मजबूर केने वाली कविता. 👍😢

Leave a Reply

New Report

Close