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  1. आधुनिक कविता की विधा लेकर आपने जिस प्रकार मनुष्य के अविश्वास की बराबरी अंधकारमय
    आकाश से की है
    वह अपने आप में नवीन उपमा है यह सत्य ही है मनुष्य को अपने ऊपर अडिग विश्वास होना चाहिए और तभी किसी पथ पर कदम बढ़ाना चाहिए जब उसे उस पथ का ज्ञान हो किसी ने कहा है

    पाना है मंजिल तो अपना रहनुमा खुद बन
    वो अक्सर भटक गये जिन्हें सहारा मिल गया।
    👍👍👍

    1. समीक्षा स्वरूप इतने सुन्दर शब्द पाकर मन में अतीव प्रसन्नता हुई। वाह बहुत सुंदर व्याख्या। गहरी जीवनानुभूतियों से जुड़ी उलझे मनोभावों की उलझी हुई इस कविता का इतना सटीक विश्लेषण करने हेतु आपको बहुत बहुत धन्यवाद।

  2. आत्म विश्वास के उपर बहुत ही सुन्दर रचना । आत्म विश्वास ही ना होगा तो मनुष्य कुछ नहीं कर पाएगा ।

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