जरूरी नहीं हम अपने
गमों की नुमाइश करें
जो दिल में है
वो जग जाहिर करें
जिसे समझना है मेरी तकलीफों को
वो यूँ ही समझ सकता है
मापने के लिए मेरा दर्द
मेरी कविताएं पढ़ सकता है|
गमों की नुमाइश
Comments
8 responses to “गमों की नुमाइश”
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बहुत सुंदर कविता है प्रज्ञा, Very True lines.
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Thanx
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कवि प्रज्ञा जी द्वारा बहुत ही खूबसूरती से कविता की महत्ता पर प्रकाश डाला गया है। यदि सहृदय के दर्द की अनुभूति उसकी कविता से ही हो जाती है। सुन्दर अभिव्यक्ति
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Thanks bro
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Very nice👍👍
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Thanks
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अतिसुंदर
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Thank
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