शायरी (गढवाली हास्य)

हमें तो गंज्यालों से कूटा गया
सुल्याठों में कहां दम था।।

मेरा खुट्टा तो रड़ा वहाॅ
जहाॅ कच्यार कम था।।
😃😃😃😃😃😃😃😃

Comments

7 responses to “शायरी (गढवाली हास्य)”

  1. हा हा हा, गजब शायरी

    1. Harish Joshi U.K

      🙏🙏🙏🙏🙏

  2. हाहाहा…
    क्या खूब कहा

  3. हा हा हा
    मेरा खुट्टा तो रड़ा वहाॅ
    जहाॅ कच्यार कम था।।
    कमाल है।

    1. Harish Joshi U.K

      🙏🙏🙏

  4. हंसी तो आ रही है हरीश भाई,पर भाषा समझ नहीं आई।

  5. Praduman Amit

    बहुत ही सुन्दर।

Leave a Reply

New Report

Close