*इन्तजार में*

वो दूर तक फैला नीला आसमां,
सांझ हो रही है,अब तो आजा ना
ये लम्हे बिताऊं तुम्हारे साथ,
आजा ना, करते हैं कुछ देर बात
देखती हूं राह, तेरी इंतजार में

*****✍️गीता

Comments

9 responses to “*इन्तजार में*”

  1. वाह वाह बहुत सुंदर भाव

    1. हार्दिक धन्यवाद प्रज्ञा जी

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    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  3. बहुत खूब, कवि गीता जी की सुन्दर भावाभिव्यंजना। उत्तम लेखन

    1. Geeta kumari

      समीक्षा गत टिप्पणी हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी 🙏

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