8 Comments

  1. सुबह, दोपहर सांझ सब
    एक सी हो गई
    ज़िन्दगी भी यूं ही
    कश्मकश में कहीं खो गई।
    बहुत खूब, अति उत्तम पंक्तियाँ, अति उत्तम रचना।

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