सन् 2020

सन् 2020 को विदा करते हैं,
दुःखो को खुद से जुदा करते हैं।
खुशियाँ का खुल के आगमन,
हर इक से चलो वफ़ा करते हैं।

सन् 2020……

वक्त कट गया मुश्किल था जो,
इसे भूल जाने की ख़ता करते हैं।
चलो बोते हैं ज़मी में नए पौधे,
फिर कोशिश कर बड़ा करते हैं।

सन् 2020……

साथ इक दो नहीं हजारों ले गया,
प्रार्थना सब मिल दोबारा करते हैं।
जाने अनजाने में हुई जो गलती,
भुला सब हम गले लगा करते हैं।।

*राही अंजाना*
नव वर्ष मङ्गलमय हो।💐🙏💐

Comments

14 responses to “सन् 2020”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
    दीर्घ काल बाद शब्द सुधा का पान कराया।
    राही जी की कविता ने दिल से वाह वाही कराया।।

    1. राही अंजाना Avatar

      आदरणीय बहुत धन्यवाद।

  2. वाह सर,
    देर आए दुरुस्त आए

  3. Anu Singla

    बहुत सुन्दर

  4. Geeta kumari

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, सुन्दर रचना

  5. बहुत ही सुन्दर

  6. Ashish Kumar Yadav

    बहुत ही शानदार भाई 🤞🤟👌👌👌

  7. Udit Prakash

    Waaaaaah

  8. Naimmohammad m

    बेहतरीन | 👌👌👌

  9. Satish Pandey

    उत्तम प्रस्तुति, very nice

  10. Nikhil Agrawal

    Wow

Leave a Reply

New Report

Close