9 Comments

  1. “हो अगर संतोष तन पुलकित है यह
    होंठ में मुस्कान मन में चैन है।”
    बहुत ही खूबसूरत और सच्ची पंक्तियां ,कविता का शिल्प और भाव पक्ष बेहद मजबूत है । बहुत ही शानदार रचना

  2. वाह माह के सर्वश्रेष्ठ कवि पाण्डेय जी की कलम से निकली शानदार कविता, यह निरन्तरता बनी रहे। वाह

  3. बहुत ही उच्चस्तरीय कविता, यह सिद्ध करती है कि आप श्रेष्ठ कवि हैं। यूँ ही लेखन चलता रहे।

  4. बहुत उम्दा रचना है। काव्य के मानदंडों पर खरी उतरती उच्चस्तरीय रचना है यह। कम शब्दों में अधिक कहा गया है वाह।

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