10 Comments

  1. शुभ संकष्ट चतुर्थी आई है,
    गणपति का आशीष लाई है।
    भोग लगाएं तिलकुट का,
    हर बाधा दूर भगाई है।
    —— कवि गीता जी की अति सुन्दर रचना। बहुत खूब

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