शुभ संकष्ट चतुर्थी आई है,
गणपति का आशीष लाई है।
भोग लगाएं तिलकुट का,
हर बाधा दूर भगाई है।
इस दिन गणपति की उपासना से,
हर संकट का नाश हो,
तन निरोगी और दीर्घायु बने,
घर में सुख समृद्धि का वास हो।
रिद्धि-सिद्धि का आशीष मिले,
पूजन धूप दीप नैवेद्य से हो।
पूजा में तिल लड्डू, शकरकंद चढ़ें,
सपरिवार सुखी समृद्ध हो।
प्रथम पूज्य श्री गणेश का,
आह्वाहन हो विधि विधान से।
बल, बुद्धि और विवेक प्राप्त हो,
गणपति के आशीष से।
____✍️गीता
संकष्ट चतुर्थी
Comments
10 responses to “संकष्ट चतुर्थी”
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शुभ संकष्ट चतुर्थी आई है,
गणपति का आशीष लाई है।
भोग लगाएं तिलकुट का,
हर बाधा दूर भगाई है।
—— कवि गीता जी की अति सुन्दर रचना। बहुत खूब-
आपकी इस सुंदर और उत्साह वर्धक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी।
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बहुत खूब वाह
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बहुत-बहुत धन्यवाद सर 🙏
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बहुत खूब रचना
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हार्दिक धन्यवाद आपका कमला जी
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बहुत खूब
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धन्यवाद प्रज्ञा जी
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अतिसुंदर रचना
जय गणपति महाराज
सबके सवारो बिगरे काज-
सादर धन्यवाद भाई जी, जय गणपति बप्पा 🙏
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