8 Comments

  1. आज फ़िर चाँद परेशान है,
    प्रदूषण में धुंधली हुई चाँदनी
    तारे भी दिखते नहीं ठीक से,
    आज आसमान क्यों वीरान है।
    कवि गीता जी की बहुत बेहतरीन पंक्तियां, और अति उत्तम रचना।

  2. चाँदनी और चाँद का सुन्दर मानवीयकरण करती हुई आपकी कविता प्रदूषण की समस्या को उजागर करती है
    सुंदर प्रयास

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