10 Comments

  1. अंधा ना कहो आँखों वालों,
    मुझे नेत्रहीन ही रहने दो।
    आँख नहीं ग़म का सागर है,
    कुछ खारा पानी बहने दो।
    —- वाह, जीवन से जुड़ी बेहतरीन कविता की सृष्टि की है आपने। बहुत खूब, एक श्रेष्ठ रचना।

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