13 Comments

  1. यह जग चला चली का मेला है
    यहाँ किसी का नही ठिकाना है
    फिर किस बात का घबराना है
    बस इतना सा हमारा अफ़साना है
    आख़िर इक दिन सबको जाना है।
    ——– जीवन दर्शन से जुड़ी बहुत सुन्दर रचना। बेहतरीन प्रस्तुति

      1. जीवन में बहुत उतार चढ़ाव दिख रहे हैं,
        उन्हीं में व्यस्त थी पर अब आ गई हूँ…
        आपने नोटिस किया यह बहुत अच्छा लगा…

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