भूले- बिसरे गीत

घर आया है रात का पंछी
करने लाख सवाल
होठों पर अनुपम हिंदी
हाथों में है गुलाल।
रंग डालेगा शायद मुझको
मनसा उसकी लगती है
गीली-गीली उसकी आंखें
थोड़ा मुझको लगती है।
बैठ गया है चादर पर वह
दोनों पैर पसारे
गाने लगा है मीठी धुन में
भूले-बिसरे गीत हमारे।
” मैंने तो था चाहा जिनको वो ना हुए हमारे
हाय तौबा! वो ना हो हमारे”………..।।

Comments

8 responses to “भूले- बिसरे गीत”

  1. होठों पर है अनुपम हिंदी
    sorry spelling mistake

    1. पूरी पढ़े

  2. बहुत सुंदर

  3. Geeta kumari

    घर आया है रात का पंछी
    करने लाख सवाल
    होठों पर हैअनुपम हिंदी
    हाथों में है गुलाल।
    ____वाह बहुत खूब, होली की धूम मची है कवि के हृदय में। लाजवाब अभिव्यक्ति

Leave a Reply

New Report

Close