मुझ में मधुमास

तू रंग कैसा लगा गया है
मुझ में तो
मधुमास सा आ गया है।
ये पीले-पीले व लाल फूलों
से मेरा तन-मन सजा गया है।
खिला के भीतर के फूल मेरे
रंगों का उपवन सजा गया है।
वो कह रहा है कि होली आई
होली से पहले रंगा गया है।

Comments

7 responses to “मुझ में मधुमास”

  1. बहुत बढ़िया रचना

  2. Geeta kumari

    खिला के भीतर के फूल मेरे
    रंगों का उपवन सजा गया है।
    वो कह रहा है कि होली आई
    होली से पहले रंगा गया है।
    ________होली के पर्व से पूर्व होली के रंगों की वर्षा करती हुई कवि सतीश जी की अति सुन्दर कविता। सुन्दर शिल्प और लाजवाब अभिव्यक्ति

  3. बहुत ही उत्तम रचना

  4. होली से पहले होली की बहुत सुंदर कविता, सर

  5. तू रंग कैसा लगा गया है
    मुझ में तो
    मधुमास सा आ गया है।
    ये पीले-पीले व लाल फूलों
    से मेरा तन-मन सजा गया है।
    खिला के भीतर के फूल मेरे
    रंगों का उपवन सजा गया है।
    वो कह रहा है कि होली आई
    होली से पहले रंगा गया है।
    बेहद शानदार प्रस्तुति

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