रंग बरस रहे हैं इस बार

होली का त्यौहार है,
रंगों की बौछार है,
कहिए आपका क्या हाल है
हर ओर गुलाल ही गुलाल हैl
रंग बरस रहे हैं इस बार,
बीते बरस ना आई यह बहार l
कोरोना के कारण ना निकले थे बाहर,
वैक्सीन आई है, खुशियाॅं लाई है
लगाकर रॅंग साथियों सॅंग,
बोलकर मीठी सी बोली,
अब के बरस खेल लो होली॥
_______✍ गीता ,

Comments

11 responses to “रंग बरस रहे हैं इस बार”

  1. बहुत सुंदर रचना

    1. आपकी सराहना के लिए बहुत सारा धन्यवाद चंद्रा मैन

  2. होली का त्यौहार है,
    रंगों की बौछार है,
    कहिए आपका क्या हाल है
    हर ओर गुलाल ही गुलाल हैl
    ——होली पर कवि गीता जी की बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति। सुन्दर शिल्प सुन्दर भाव।

    1. Geeta kumari

      आपकी इस अति सुंदर और उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी हार्दिक आभार

  3. This comment is currently unavailable

    1. Geeta kumari

      मास्टर साहब जी आप तो यहां कभी-कभी आते हैं और अपने पसंदीदा कवियों को ही समीक्षा देते हैं हमने तो कभी किसी को कुछ नहीं कहा कि हमें भी समीक्षा दीजिए आप यहां लिखते भी नहीं है तो कृपया आप इन सब में ना पड़ें बाकी आपकी रुचि है आप जिसको समीक्षा देना चाहें दे सकते हैं धन्यवाद

  4. vikash kumar

    बीते बरस ना आई यह बहार l
    कोरोना के कारण ना निकले थे बाहर,
    वैक्सीन आई है, खुशियाॅं लाई है
    लगाकर रॅंग साथियों सॅंग,
    बोलकर मीठी सी बोली,
    अब के बरस खेल लो होली॥
    _______✍ गीता ,

    1. Geeta kumari

      Thanks

  5. बहुत सुन्दर कविता

    1. Geeta kumari

      Thank you very much Piyush ji

  6. होली का त्यौहार है,
    रंगों की बौछार है,
    कहिए आपका क्या हाल है
    हर ओर गुलाल ही गुलाल हैl
    रंग बरस रहे हैं इस बार,
    बीते बरस ना आई यह बहार l
    कोरोना के कारण ना निकले थे बाहर,

    कोरोना काल में होली के माहौल पर लिखी और त्योहार मे डूबी कवि गीता जी की रचना

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