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  1. होली का त्यौहार है,
    रंगों की बौछार है,
    कहिए आपका क्या हाल है
    हर ओर गुलाल ही गुलाल हैl
    ——होली पर कवि गीता जी की बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति। सुन्दर शिल्प सुन्दर भाव।

    1. आपकी इस अति सुंदर और उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी हार्दिक आभार

    1. मास्टर साहब जी आप तो यहां कभी-कभी आते हैं और अपने पसंदीदा कवियों को ही समीक्षा देते हैं हमने तो कभी किसी को कुछ नहीं कहा कि हमें भी समीक्षा दीजिए आप यहां लिखते भी नहीं है तो कृपया आप इन सब में ना पड़ें बाकी आपकी रुचि है आप जिसको समीक्षा देना चाहें दे सकते हैं धन्यवाद

  2. बीते बरस ना आई यह बहार l
    कोरोना के कारण ना निकले थे बाहर,
    वैक्सीन आई है, खुशियाॅं लाई है
    लगाकर रॅंग साथियों सॅंग,
    बोलकर मीठी सी बोली,
    अब के बरस खेल लो होली॥
    _______✍ गीता ,

  3. होली का त्यौहार है,
    रंगों की बौछार है,
    कहिए आपका क्या हाल है
    हर ओर गुलाल ही गुलाल हैl
    रंग बरस रहे हैं इस बार,
    बीते बरस ना आई यह बहार l
    कोरोना के कारण ना निकले थे बाहर,

    कोरोना काल में होली के माहौल पर लिखी और त्योहार मे डूबी कवि गीता जी की रचना

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