“नशा नहीं जिंदगी अपनाओ”

“नशा नाश का दूजा नाम तन, मन, धन तीनों बेकार।।”
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नशा नहीं जिंदगी अपनाओ
अपने परिवार को हादसों से बचाओ।
होली हो या हो दिवाली या हो कोई त्यौहार
जुआ चरस गांजा से बच के रहो मेरे यार।
बच के रहो मेरे यार प्यार से गुजिया खाओ
मदिरा पीकर तुम कभी वाहन ना चलाओ।
मदिरा पीकर वाहन चलाने से होती है दुर्घटना
नित सड़कों पर होती रहती हैं ऐसी घटना।
जीवन है अनमोल इसे ना यूं ही गंवाओ
हिल मिल के तुम रहो प्रेम से त्यौहार मनाओ।।

Comments

5 responses to ““नशा नहीं जिंदगी अपनाओ””

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  2. मद्यपान के नुकसान को बताती रचना
    ——–उच्च स्तरीय भाव और उम्दा लेखन…… होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

  3. नशा नहीं जिंदगी अपना वाह क्या बात है आपकी लिखने का तो जवाब ही नहीं कला पक्ष भाव पक्ष तथा संवेदना हर प्रकार से आपकी रचना उच्च कोटि की है

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