तुम ही दुर्गा
नव दुर्गा तुम
नारी तुम ही नवदुर्गा हो।
जननी हो तुम जन्म की दाता।
सब कुछ तुम ही हो माता।
तुम से ही संसार बना है,
दया, प्रेम, चाहत, स्नेह,
करुणा और दुलार बना है।
तुम से ही संसार बना है।
ममता की उत्पत्ति तुम ही से
प्राण रस उत्पन्न तुम ही से,
बचपन, प्रौढ़, युवावस्था में
जीवन आधार टिका तुम ही से।
आज पवित्र नवरात्र पर्व में
पूजा पाने की अधिकारी हो
माँ नव दुर्गा के रूप स्वरूप में
नारी तुम स्थापित हो।
नारी तुम ही नवदुर्गा हो
Comments
4 responses to “नारी तुम ही नवदुर्गा हो”
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ममता की उत्पत्ति तुम ही से
प्राण रस उत्पन्न तुम ही से,
बचपन, प्रौढ़, युवावस्था में
जीवन आधार टिका तुम ही से।
_________ नवरात्रि के अवसर पर माॅं और ममता पर आधारित बहुत श्रेष्ठ रचना अति उत्तम लेखन-
कविता पर की गई इस सुन्दर समीक्षात्मक टिप्पणी हेतु हार्दिक आभार। सादर धन्यवाद
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद शास्त्री जी
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