कविता -राम
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राम तुम्हें फिर आना होगा
आओ बाण उठाना होगा
आतंकवाद से मुक्त बना
भारत को आर्यावर्त बनाना होगा
चाहे पाक के पाले आतंकी हों
चाहे जम्मू के पत्थरबाज ही हों
रोती है घर-घर सीता
आओ खत्म करो चाहे दाऊद इब्राहिम हों
राम तुम्हें आना होगा
देश की हर सीता को सुरक्षित रखना होगा
युद्ध करो भारत के घर घर रावण से
देश का शासन संभालना होगा
शबरी निषाद को गले लगाना होगा
भारत में रेपिस्ट की बाढ़ चली है
भारत में तानाशाहों की सरकार बनी है
संसद के कुर्सी पर बैठे हैं अपराधी
आओ राम –
संसद को अपराधीयों से मुक्त बनाना होगा
कोई गुंडा – कोई चोर, कोई बलात्कारी है
करके घोटाला उद्योगपति बना है
इस समस्या का हल कैसे होगा
राम तुम्हें आकर बताना होगा
मनीषा बाल्मिक का रेप हुआ था
उसके संग बड़ा अत्याचार हुआ था
शासन इतनी गंदी निकम्मी था
आधी रात को तेल से अंतिम संस्कार हुआ था
परिजन मुँह को देख न पाए बेटी का,
नेता ने राम तुम्हारे नाम पर वोट लिया
जनता को जाति धर्म में छोड़ दिया
ऐसी स्थिति में राम तुम्हें आना होगा
कोई घटना अब ना घटे
इसलिए आकर रामराज्य स्थापित करना होगा
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✍✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-
राम
Comments
4 responses to “राम”
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बहुत खूब लिखा है ऋषि
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राम तुम्हें फिर आना होगा
आओ बाण उठाना होगा
_____ अति सुंदर रचना, बहुत सुंदर अभिव्यक्ति -
अतिसुंदर रचना
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बहुत ही लाजवाब अभिव्यक्ति
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