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  1. संघर्ष का आगाज कर रहा हूँ,
    आज कीचड़ में सना हूँ
    कल कमल बन खिलूँगा
    एक दिन आपसे
    इंसान बन मिलूँगा।
    ________ अभावों भरे जीवन में भी संघर्ष करके जीने की बहुत सुंदर भावना दर्शाती हुई कवि सतीश जी की उच्च स्तरीय रचना, भाव और शिल्प अति उत्तम, लाजवाब अभिव्यक्ति।

    1. आज कीचड़ में सना हूं कल कमल बन खिलूंगा
      एक दिन आप से इंसान बन मिलूंगा।

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