छंद कुंडालियाँ देश एकता

देश एकता अखंडता, जोड़े सूत्र समाज
जो तोडे़गा वह नहीं, हो सकता युवराज
हो सकता युवराज , पांच वर्षों तक छाए
लेना है मतदान, देश दंगा करवाए
कहते हैं कविराय, चलेगा अब ना ऎसा
जोड़े सूत्र समाज, परिश्रम से ले पैसा

Comments

5 responses to “छंद कुंडालियाँ देश एकता”

  1. आपने बहुत अच्छा लिखा है, लेकिन हिंदी व्याकरण की दृष्टि से यह कुंडलिया छन्द नहीं बन पाया है। प्रयास अच्छा किया है।

  2. Ekta Gupta

    देश एकता अखंडता ,जोड़े सूत्र समाज
    बहुत सुंदर

  3. 30 में अनेकता में एकता का संदेश देती बहुत ही प्यारी रचना

    1. देश में 

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