सुंदर सपनों के आंगन में
बैठा है चितचोर
मन का मयूर नाचता
प्रेम की चुनर ओढ़
प्रेम की चुनर उड़ के
छम छम नाचे मयूरा
अंग-अंग भीगे ऐसे
सावन में मोरा।
छम छम नाचे मयूरा

Comments
7 responses to “छम छम नाचे मयूरा”
-

अति सुंदर भाव
-

बहुत-बहुत धन्यवाद
-
-

बहुत सुंदर शैली में व्यक्त आपकी रचना मन को भा गयी। सावन की यादें ताजा हो गई।
-

इतनी सुंदर समीक्षा हद बहुत-बहुत धन्यवाद
-
-
अतिसुंदर भाव
-

धन्यवाद
-
-

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.