मरहम

यादों की मरहम भी क्या मरहम है।
बेरहम भी मरहम पर जीने लगे है।।
काश.. यह मरहम मर्ज़ नहीं होते।
हम और आप आज कैसे जी पाते।।

Comments

5 responses to “मरहम”

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद पंडित जी। आपकी समीक्षा ही मेरे लिए अनमोल तोहफ़ा है

  1. राकेश पाठक

    Nice

  2. अति सुन्दर भाव पूर्ण रचना 

  3. Amita

    भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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