याचना अपनी बीमार मां के लिए

ढूंढता है उन लम्हों को
जहां सिर्फ अपनापन था
अधिकार मां पर सिर्फ अपना
नहीं दबाव किसी का था।।
जहां हक था
भाई से बातें करने की
पिता से लाङ जताने की
मां के आंचल में छिप जाने की
न डर था किसी के तोहमत का।।
मां के गोद में सर अपना रखूं
या उनके हाथों का सहारा बनूं
उनके दर्द सब हरके,हर पीर सहूं
क्या मर्ज करूं, उनकी परेशानी का।
जन्म दिया, पालन पोषण क्या सोच किया
पठन पाठन करवा के, गैरों को सौंप दिया
घर‌ बसे मेरा, पतवार सा रूप लिया
हक नहीं क्यूं आज़ तेरे संग रहने का।
बीमार है तूं, पर किसके खातिर
अबतक जीते आई तूं औरों की खातिर
कुछ दिवस ऐसे हों, तेरा जीना हो तेरे खातिर
अधिकार है तुझे भी‌ हर सुख सुविधा पाने का।
अब कुछ दिन जियो मेरे लिए
पास रहूं, मैं पहनूं फिर कपङे तेरे सिले
सुबह उठते ही तेरे चरणों की झलक मिले
काम से लौटूं तो तेरी चाय की ललक रहे
हमें भी हक तेरे साथ खुश रहने का।।
“सुना है दुआओं में बहुत असर होता है।आप सब से प्रार्थना है एक बार सच्चे मन से मेरी मां के लिए दुआ कीजिए।”
“मेरी मां जल्दी से स्वस्थ हो जाए!”

Comments

10 responses to “याचना अपनी बीमार मां के लिए”

  1. Satish Chandra Pandey

    सुमन जी, एक कवि मन माँ के स्वास्थ्य के लिए जो दुआ मांग सकता है उसे आपने बहुत कोमल शब्दों में अभिव्यक्ति दी है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि ईश्वर माता जी जल्द स्वस्थ करें। वे बहुत जल्द ठीक हो जाएं यही हमारी दुआ है।

    1. Suman Kumari

      सादर आभार सर। इलाज़ चल रही,अब दुआओं का सहारा है

      1. Satish Chandra Pandey

        हिम्मत बनाए रखिये, ईश्वर कृपा करेंगे

  2. माताजी का स्वास्थ्य जल्दी ठीक हो जाये यह दुआ करते हैं

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद सर

  3. भगवान आपकी माता जी को अतिशीघ्र आरोग्यता प्रदान करें। 

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद सर

  4. Praduman Amit

    सुमन जी हौसला को यों न तोड़े। किस्मत में जो लिखा है वही होगा, मेरे साथ, आपके साथ, इस संसार के साथ।

    1. Suman Kumari

      सादर धन्यवाद सर

      1. बहुत खूब

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