पुलकित हुआ तन

मनोहर शाम है
छितरे हुए हैं व्योम में घन
टपकती बूँद के अहसास से
पुलकित हुआ तन।
लग रहे हैं बहुत खुश पेड़-पौधे
उग रहे हैं अनेकों बीज
दे रहा भानु उनको ताप
गगन भी दे रहा है सींच।

Comments

7 responses to “पुलकित हुआ तन”

  1. Chandra Pandey

    बहुत शानदार प्रकृति चित्रण

    1. सादर धन्यवाद

  2. बहुत सुंदर रचना

    1. बहुत धन्यवाद

    1. Satish Chandra Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  3. मौसम का अति सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया है कवि सतीश जी ने अपनी इस रचना में… बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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