भाव लिखने हैं

फूल बोने हैं
भले कांटे उगें बागों में,
जोड़ दें रिश्ते सभी
नेह के धागों में।
भाव लिखने हैं
भले बेसुरे ही क्यों न हों,
जिसको भायेंगे वही
बांध लेगा रागों में।
खोजने हैं जो
कहीं खो गए हैं बागों में
खोजने जायेंगे तो
खोज लेंगे लाखों में।

Comments

6 responses to “भाव लिखने हैं”

  1. बहुत सुंदर। 

    1. बहुत धन्यवाद

    1. सादर धन्यवाद

  2. Geeta kumari

    भाव लिखने हैं
    भले बेसुरे ही क्यों न हों,
    जिसको भायेंगे वही
    बांध लेगा रागों में।
    …… भावों में ही तो सब कुछ है.. कवि सतीश जी की एकदम सच्ची प्रस्तुति

    1. इस सुन्दर समीक्षात्मक टिप्पणी हेतु हार्दिक धन्यवाद

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