6 Comments

  1. भाव लिखने हैं
    भले बेसुरे ही क्यों न हों,
    जिसको भायेंगे वही
    बांध लेगा रागों में।
    …… भावों में ही तो सब कुछ है.. कवि सतीश जी की एकदम सच्ची प्रस्तुति

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