हर शायर के पीछे के दर्द को समझो ज़माने ने उसे नहीं समझा और तुम अल्फ़ाज़ों मे बहक जाते हो
हर शायर के पीछे के दर्द को समझो ज़माने ने उसे नहीं समझा और तुम अल्फ़ाज़ों मे बहक जाते हो
कभी इस तरफ देख लिया करो हम कभी तुम्हारे सरमाए थे हर ग्येर से बात करते हो हम तोह तुम्हारे अपने थे
थोड़ी मोहलत मांगता हु रब बस एक बार उनका दीदार हो जाए फासले जो फैसलों की वजह से थे बस उस पर सुलह हो जाए यूँ रूठना भी कुछ होता है क्या एक बार मुरना […]
हम भी टूटे थे जब तुम्हारे वादे झूठे थे हम रोते थे जब तुम किसी और के साथ हस्ते थे आज हम खुद को मनाना सिख लिए बस तूम्हारी परवाह छोड़ दिये
हम भी बेसुध से तेरे बेवफाई से जीना छोड़ दिये थे बताना भूल नहीं की कोई साथ नहीं थे तब सिर्फ गिने चुने छोड़ तुम जानते तोह क्या बोलते सिर्फ इतनी सी बात पे तुमने […]
मजदूर हू मजबूर नहीं तेरे जैसे वीडियो के सामने मदद लेने से इनकार करता हू लाखों दूर घर की और सफर करता हूँ बिना किसी मदद के पैदल किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया कभी […]
कलम और पेन से अभी नाता कब का छूट चुका है अभी ज़माना ईमेल और मोबाइल का है छोटे उन पन्नो में अपनी भावनाएं सारी लिखने की नौबत अभी नहीं आती अभी तेरे ख़तों में […]
तू दूर जा रही है या यादों में पास मै टूट रहा हू या तपित लोहा बन रहा हू तेरे जाने का गम है या तुझे पाने की आस अजीब सा द्वंद है
चोट जो तुमने दिया उसका कोष बना देते है हम शायर है जनाब हम बातों से नहीं सिर्फ दिल में समझ जाते है मकबरे हमारे नहीं हम लोगों के बना जाते है हम शायर है […]
ना दर्द है ना धूप है यह कैसी दुनिया लगे बेदर्द है हा खुश हूं मैं हा बेसुध हु मै अपने दुनिया मे बेशक सफल हु मै पर खलती तेरी कमी बेजान सी यह ज़िन्दगी […]
मेरी तब भी नहीं चली थी मेरी अब भी नहीं चली है चारो तरफ बेबसी और लाचारी है ए खुदा तूने भी क्या बाकियों की तरह मुझसे वफाई निभाई है
कोई सोचता है की आज पनीर कल गोभी की सब्जी खाऊंगा कोई सोचता है की कल परिवार का पालन कैसे करूँ कोई कहता है हैंड सैनिटाइजर इस्तेमाल करना है और किसी को साफ पानी और […]
कुछ रिश्ते साथ होने के अहसास से बनते है चाहे वोह इंसान कितना दूर ही हो
जो लोग आप की ताकत है जीवन के भाग्दौर के चलते समय नहीं दे पाते है अब घर बंद के चलतेी उनके साथ जीने का मौका दे रही है इस डर के माहौल में बस […]
इज़हार ना हो वोह इश्क़ का जो हम तुझसे करते है कुछ रिश्ते बेज़ुबान ही अच्छे है
आज की होली का रंग बस लाल है यह खून है या गुलाल है दिल वालों का शहर आज वीरान है लोगों के पागलपन देखों रोटी कीमती और सस्ती अभी जान है मौत पर आज […]
ऐसे रूठा ना कर की मनाने में उम्रे निकल जाए ज़िन्दगी भर के फासले तो हम तोह तय कर लेंगे खौफ बस इस बात का है मौत के बाद का रास्ता पता नहीं
देश स्वाधीन है तब किस बात की आज़ादी यह चांदी के चमच्च ले के जन्म लेने वाले क्या समझेंगे होते अगर दलित या आदिवासी के बेटे तोह समझ आती तुम्हारे मंदिरों में हमें घुसने न […]
आज भी शाम है हाथ में जाम है दिन बदलने का आज भी तुझ पर एतराम है
सब को बाट रहा है खुशियां खुदा एक मेरा ही घर सुना रह गया ऐसी बेरुखी क्यों जवाब सबको नहीं मिलता इस लिए तोह सिर्फ़ फरियाद का दामन छोड़ तोह नहीं सकते
मुझमे थोड़ी सी अच्छाई, शायद बाकी है इस लिए ठोकरे राहों में बेसुमार है मुझमे तेरी पड़छआई शायद बाकी है की आज भी टिका हुआ हूं जीवन के इस चक्रव्यू फसते जा रहा हूँ कौन […]
हमने उम्रे गुज़ार दी तेरे इंतेज़ार पर तुझे आती है क्या याद कभी मेरे प्यार पर हमने फासले मिटा तेरे ऐतबार पर पर तुझसे एक कदम साथ चला ना गया
हम चुप और अकेले रहते है इसका मतलब यह नहीं हम दुखी है हमने अक्सर लोगों से घिरे हुए को अंदर हीअंदर घुटते देखा है
दोस्त नहीं अब हम दूर है कही तू किसी और की बाहों में मेरा भी नसीब चल पड़ा है किसी और के साथ लोग कहते है पहला प्यार भुलाया नहीं जाता हम कहते है भूलना […]
हम बदजबान थे बदनाम नहीं ईमान थी तू बस यह गलती कर बैठे
Amar randhe misse gechey nil Tomar smriti ajo amaleen
मेरी आयत है तू जितना पढ़ू उतना खो जाता हूँ काश इतनी सिद्दत से पढ़ा होता तोह अव्वल आ जाते
किसी से इतनी भी मोहब्त ना कर की सिर्फ तू ही सौगात भरता जाए मै से हम की दुरी दोंनो को तय करना है
गया था उस गली जहा से निकाला गया था मोहब्बत थी इस लिए चुप था तेरे हर सितम का जवाब मौजूद था यह तोह तहज़ीब आरे आ गया
जनता के बारूद को आग से मत ललकार शमा को बुझने ना देंगे ज़ुल्मी रात जितनी भी कोहराम मचाए माना विपक्ष धनवान बलवान है पर इतिहास साक्षी है जब भी सब जन विप्लब का रास्ता […]
खुदा से शिकायत हो तोह कभी गरीबों की बस्ती जाओ जनाब कितने खुशनसीब हो पता चल जाएगा
जनवरी सपना दिखाती है दिसंबर गलतियां अपने गलतियों से सीख और आगे बर अपने सपनो पर नव वर्ष की हार्दिक अभिनंदन
मुदातों बाद तेरा दीदार हुआ बात पलछिन की थी जो कब से कहना था पर कब वोह बात अपना महत्व खो चुकी थी पता ना चला शायद वक़्त सबसे अच्छी दवा होती है
मुदातों बाद तेरा दीदार हुआ बात पलछिन में थी जो कब से कहना था पर कब वोह बात अपना महत्व खो चुकी थी पता ना चला शायद वक़्त सबसे अच्छी दवा होती है
Tomar gharey mangsho bhat Amar paat e panta bhat Tomader sabar susama ahar Amar bari drabay muleyer haha kar Tomar bari bilash bahul Amar kure ey sambal Tor theke kichu chaini sudhu cheye chilam sadhin […]
गम है तोह ज़िन्दा है हम उम्मीदें कम है तोह किसी तरह खुश है हम कोई बरी खुशी नहीं चाहिए भगवान अब तोह इस की आदत सी हो गई लोग कहते है की वक़्त बदलता […]
मल्टीनेशनल कंपनियों के लालच से बचों भाइयों यह बे ज़रुरत की चीज़ों से आपका घर भड़ देंगे लोन और क्रेडिट कार्ड की लालच से बचों भाइयों इनसे घर उजड़ते देखा है मैंने खुदा ने जैसा […]
कहना था क्या, क्या कह गए दिल मैं जो था लब पे आते आते रुक गए इस वाकये को हुए ज़माना हो गया पर लगता है कि कल ही हुआ सोचता था की तू न […]
जो हल जोते फसल उगाये उसे उसकी किमत नहीं मिलती जो मजदुर उत्पाद बनाय उसे उसकी कीमत नहीं मिलती भूख और लाचारी का ऐसा आलम है अब जान सस्ती है रोटी नहीं जात और धर्म […]
मैंने ज्यादा किताब पढ़ा नही पर मुश्किल ए ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया
पहले तुझसे बात करने से पैर कॉप ते थे लैब थर थरा उठते थे पर कभी तुझे बोल ना सका दिन तेरे दिदार की चाहत में होती थी हर किसी से मुस्कुराहट से बात होती […]
महफ़िल में मेरे बहुत है पर तेरे जैसा कोई नही मुफलिस सी ज़िन्दगी में एक तेरा ही सहारा था खुदा ने उसे ही छीन लिया ज़िन्दगी के कुछ पल जो खुशी के थे उसी में […]
नज़्म थी तेरी बरसात वाली अब तोह इंतेज़ार में उसी नज़्म का सहारा है फासले बन गए उन नज़दीकियों में अब तोह याद में उसी का ही सहारा है साद में तेरे मै बरबाद हो […]
तूने चुना है वो रास्ता जो तेरे लिए बना है पर कभी किसी मोड़ मे मुलाकात हो तोह मुस्कुराना तोह बनता है आखिर कभी वादे किए थे की साथ चलना है
बाप जैसा भी हो गरीब हो या अमीर एक बच्चे के सपनो का आशियाना उसी से है
नीले रंग से यह कैसा खुमार नील कंठ तुझसे यह कैसा प्यार आदी योगी शिव शम्भू भांग धतूरा से सज्जित तुझपे यह जान समर्पित नंदी बैल और भूत साथ तुम्हारे दुर करती पीर हमारे जय […]
तुझसे सवाल बहुत लोग करते है पर किस की फ़रियाद कबूल होती है उसका पता नहीं जब टूट के बिखर रहा था तब तू कहा था
तेरा मेरा रिस्ता हैं क्या अपनो सा किस्सा है क्या क्यों इतना अपना सा लगता है तू अनजान शहर में इतना अपना सा लगता है तू
ये पहाड़ ये वादियाँ ये टेरे मेरे रास्ते किसऔर जाना है किस के वास्ते बस चलते रहना है खुद की तलाश में ज़िन्दगी किस और जा रही उसका पता नहीं राहगीर है तोह चलते रहना […]
फरियाद कबूल ना हो तोह क्या तेरे होने पे तेरे वचनों से सवाल उठाना चाहिए बचपन से ही सिखा है समझना रटने से बेहतर है लोगों का काफिर कहना भक्त से बेहतर है
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