होली का रंग बस लाल है

आज की होली का रंग बस लाल है
यह खून है या गुलाल है

दिल वालों का शहर आज वीरान है
लोगों के पागलपन देखों रोटी कीमती और सस्ती अभी जान है

मौत पर आज तुम्हारे धर्म पर राजनीती होती है
हिंदु मरता है या मुसलमान कोई नहीं देखता मरता है तोह सिर्फ इंसानियत

जिसने खोया वही जाने अपनो को खोना क्या होता है
शासनतंत्र के लोग जो भड़काते है उन्हें पता है निष्पक्ष जांच इस देश में मज़ाक बन चुकी है

ना रोज़गार है ना मुलभुत अव्यसकताएँ बस आपस में लड़ों और मरो
हिन्दू राष्ट्र तोह बन जायेगा पढ़ उसमे हिन्दू कम
ब्राह्मण कायस्थ सूद्र लड़े पढ़े होंगे

Comments

7 responses to “होली का रंग बस लाल है”

  1. Sacchai aur shabdon सच्चाई और शब्दों में सुंदरता👏👏

Leave a Reply

New Report

Close