Antariksha Saha, Author at Saavan - Page 3 of 14's Posts

बाप

बाप जैसा भी हो गरीब हो या अमीर एक बच्चे के सपनो का आशियाना उसी से है »

नील कंठ

नीले रंग से यह कैसा खुमार नील कंठ तुझसे यह कैसा प्यार आदी योगी शिव शम्भू भांग धतूरा से सज्जित तुझपे यह जान समर्पित नंदी बैल और भूत साथ तुम्हारे दुर करती पीर हमारे जय हो शिव शम्भू जय हो शिव शम्भू हमारे »

खुदा

तुझसे सवाल बहुत लोग करते है पर किस की फ़रियाद कबूल होती है उसका पता नहीं जब टूट के बिखर रहा था तब तू कहा था »

रिस्ता

तेरा मेरा रिस्ता हैं क्या अपनो सा किस्सा है क्या क्यों इतना अपना सा लगता है तू अनजान शहर में इतना अपना सा लगता है तू »

रास्ते तेरे वास्ते

ये पहाड़ ये वादियाँ ये टेरे मेरे रास्ते किसऔर जाना है किस के वास्ते बस चलते रहना है खुद की तलाश में ज़िन्दगी किस और जा रही उसका पता नहीं राहगीर है तोह चलते रहना है बसेरे कई है पर घर नहीं लोग कई है पर तेरे जैसा कोई नहीं »

खुदा

फरियाद कबूल ना हो तोह क्या तेरे होने पे तेरे वचनों से सवाल उठाना चाहिए बचपन से ही सिखा है समझना रटने से बेहतर है लोगों का काफिर कहना भक्त से बेहतर है »

आज़ादी

तुमको यह आज़ादी मुबारक हो हमे तोह तेरे प्यार ने गुलाम बना रखा है कहने पे हम आज़ाद है पर तेरे जुदाई के डर ने पिजरे में रोक रखा है ख्वाब तोह आज भी बहुत है पड़ पता ना चला कब पर काट लिए गए दो वक़्त की रोटी सुखी सब्जी का स्वाद इतना है की ना पुछो आज़ादी कही बेसुद सी खड़ी हँस रही है »

तेरे जाने के बाद हुआ

तेरा जिक्र बेखयाली में हुआ मुझे फ़िक्र तेरे जाने के बाद हुआ मुझे मोह्बत थी तोह तुझसे पर अहसास तेरे जाने के बाद हुआ »

आखिर खुश तोह हो ना तुम

आखिर खुश तोह हो ना तुम कभी यह ही मायने रखा करती थी किताबों के बीच वोह सुखी गुलाब आज भी बहुत कुछ कहती है किस्मत ने खिंची कैसी यह डोर मै यहा और तुम कहा हो गए अपनो मे तुम्हारा शुमार होता था पर अब तुम कब पराए हो गए पता ना चला »

रात

रात को जगने वाले हर कोई आशिक नहीं होता साहब कुछ को अगले दिन रोटी की फ़िक़्र होती है »

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