Antariksha Saha, Author at Saavan - Page 3 of 11's Posts

फुरक़त

जब फुरक़त हुई तोह पता चला फुरसत से अगर तुझे चाहा होता »

तेरी नाराज़गी

इतनी भी क्या नाराज़गी पगली एक बार पूछ तोह लिया होता गुस्से से चल दी तू एक बार मुड़ के देख तोह लिया होता सोच के देखो जो छोड़ के जाते है वोह अक्सर रूठ जाते है »

रेत की तरह

रेत की तरह यू हाथ से छूट रहा है तू जितना जोड़ लगाओ उतना तेज़ फिसल रहा है तू याद रख तेरे रब ने कभी तेरा हाथ कभी नहीं छोड़ा हैं तेरे अपनो ने कभी तुझ पढ़ हौसला न छोड़ा हैं धुमिल लक्ष की तरफ बढ़ता जा तू लोग जुड़ते हैं तोह ठीक वरना खुद ही उसके राह चलता जा तू तेरे अपनो ने कभी तेरे ईमान को टटोला नहीं तेरी चुप्पी को कभी तेरी कमज़ोरी से जोड़ा नहीं अपने अंदर के आग को बाहर आने दे यह जिस्म को तप के लोहा बन जाने दे »

यह दुनिया

हम तो झूठ की ही दुनिया में जीते हैं क्यों कि सच हमे अकेला कर देता है मुखोटा सबका सही लगता है बस अपना आईना साथ लिए घमुते है »

रेत

रेत यू तोह हाथ से फिसलता हैं जितना जोड़ लगाओ उतना तेज़ फिसलता जाता है पढ़ उसमे पानी मिलाओ तोह हाथ मे जम जाता है रिस्ते में इज्ज़त उस पानी का काम करती है »

ज़िंदगी सतत संग्राम

ज़िन्दगी सतत संग्राम हैं यारों यहां हर चीज़ की लड़ के हासिल होती है कोई हमे रास्ता नहीं देता खुद ही रास्ता बनाने की कोसिस करनी होती है हार मान लेने से लक्ष्य को पाने में मौत को गले लगाना कही बेहतर हैं क्यों कि हारे हुए और मरे हुए कोई भेद नहीं होता ज़िन्दगी सतत संग्राम हैं यारों यहां हर चीज़ की लड़ के हासिल होती है »

माँ की साज़िश

माँ भूख लगी है घर में कोई खाना नहीं हैं तोह क्या खाली बर्तनों को चूल्हे में जलाकर ताकी खाने की आस में उसे नींद आ जाये यह भी याद है माँ भूख लगी है हर एक झूठ बोल कर कल मीठा बनाउंगी बोल तेरा दाल चावल खिलाना याद हैं माँ भूख लगी है खुद एक रोटी खा कर मुझे भूख नहीं है कह कर सो जाती तू यह भी मुझे याद है »

ज़िन्दगी

इतनी भी नाराज़गी ठीक नहीं की फासले उम्र भर का हो जाये पल भर का जीना है यारों बेगाने लोगों को छोड़ यहाँ अपनो से फुरसत नहीं। »

इंतज़ार

इन्तेक़ाम से इंतज़ार ही बेहतर हैं उम्मीद का दामन पकड़कर थोड़ा चैन से बैठो कभी ना कभी उसे तुम याद आओगे इस अहसास से ज़िन्दगी देखोगे तुम काट पाओगे इंतेज़ार की ताकत को नज़रअंदाज़ ना करो साहब तपन की आग में कोयले से भी हीरा बन जाता हैं »

मध्यम वर्ग का सपना

तिनको का घोसला था मेरा बरसात में डय गए सपनो के पर थे मेरे उड़ने से पहले बर्बाद हो गए माध्यम वर्ग का यही होता हैं सपनो को नतीजो से तोला जाता हैं सभी अवःल आने की होड़ में है पर अवःल तोह किसी एक ही का हैं यह भूल जाते हैं »

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