देवेश साखरे ‘देव’'s Posts

मेरे बस की बात नहीं

तुम्हें भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं, तुम्हें जिंदगी में ला पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम्हें बस देख कर ही जी लेंगे, तुम्हें बगैर देखे रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम ही पहली और आखरी मोहब्बत, पहली मोहब्बत भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं। अगर तुम ना हुई कभी मेरी तो, किसी और को अपना पाना, मेरे बस की बात नहीं। दुनिया से दिल भर चुका मेरा, अब और जिंदा रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। देवेश साखरे ̵... »

तेरे प्यार का नशा

इस कदर छाया है तेरे प्यार का नशा। बस तेरी यादें ही दिलो-दिमाग पर बसा। तुमसे दूर अब रहा भी न जाए। ये जुदाई अब सहा भी न जाए। कब उखड़ जाए ये चंद सांसें, ना पुछो कुछ कहा भी न जाए। ना मिलूं तो चैन नहीं, मिलकर बिछड़ना गवारा नहीं, तुमसे मिलूं, न मिलूं, कशमकश में दिल फंसा। इस कदर छाया है तेरे प्यार का नशा। बस तेरी यादें ही दिलो-दिमाग पर बसा। तेरी मदहोश खुशबू। बेचैन करती मुझे हर-शू। जाने क्या हो गया मुझे, ... »

इस प्यार में

बगैर प्यार के कुछ भी नहीं संसार में। वो कहते हैं क्या रखा है, इस प्यार में। हंसीन लगती यह दुनिया, प्यार होते ही, जहां की खुशियां सिमटी, इस प्यार में। कैसे दिलाएं तुम्हें एतबार, इस प्यार का, जां तक कुर्बान कर सकते, इस प्यार में। ना करेंगे, ना होने देंगे, रुसवा ‘देव’ तुम्हें, मोहब्बत को परस्तिश माना, इस प्यार में। देवेश साखरे ‘देव’ »

तुम्हारे बगैर

तुम्हारे बगैर जी तो नहीं सकता, हाँ, मर जरूर सकता हूँ । पर मर कर भी यदि चैन न मिला तो, मेरी रूह भटकेगी। तुम्हें पाने को तड़पेगी। तुम्हें परेशान करने का इरादा नहीं है । मेरी ख्वाहिशें भी कोई ज्यादा नहीं है । सिर्फ़ तुम्हारा साथ चाहता हूँ । हाथों में तुम्हारा हाथ चाहता हूँ । खुशियों की सौगात चाहता हूँ । बताना दिल के जज्बात चाहता हूँ । तुम, हाँ तुम ही मेरी, पहली और आखिरी मोहब्बत हो। हाँ तुम ही वो लड़की... »

तुम्हारी तस्वीर

तुम्हारी तस्वीर से बातें करता हूं। कभी कुछ सोच कर हंसता हूं। कभी कुछ सोच कर रो देता हूं। कभी बस एकटक निहारता हूं। तो कभी चूम लेता हूं। तुम्हारी तस्वीर से बातें करता हूं। कभी सोचता हूं, कि तुम होती सामने, तो ये कहता, वो सुनता, कभी सोचता हूं, तुम्हें बाहों में भर लेता। लेकिन तुम मेरे करीब नहीं। गम-ए-जुदाई में शरीक नहीं। मेरा तो अब ये हाल है। नहीं जीता हूं, ना ही मरता हूं। बस तुम्हारी यादों में ही खो... »

मेरी रूह

तू मेरी रूह में, कुछ इस तरह समाई है। के रहमत मुझपर, रब की तू ख़ुदाई है। तू नहीं तो मैं नहीं, कुछ भी नहीं, शायद तुझे पता नहीं, मेरा वजूद तुने बनाई है। तू यहीं है, यहीं कहीं है, मेरे आसपास, हवा जो तुझे छू कर, मुझ तक आई है। तेरी खुशबू से महकता है, चमन मेरा, तेरा पता, मुझे तेरी खुशबू ने बताई है। मैं भी इत्र सा महक उठा तेरे आगोश में, टूटकर जब तू, गले मुझको लगाई है। देवेश साखरे ‘देव’ »

ख़ुदा पर यकीं

ख़ुदा पर जो भी बंदा यकीं दिखाता है। तलातुम में फँसी वो सफीना बचाता है। कठपुतलीयों की डोर है उसके हाथों में, जाने कब, कहाँ, कैसे, किसे नचाता है। जो किरदार उम्दा निभा गया रंगमंच में, खुशियों का इनाम वो यक़ीनन पाता है। नसीब का लिखा, ना टाल सका कोई, किये का हिसाब वो ज़रूर चुकाता है। दौलत ना सही, पर दुआएं कमाई मैंने, बुरे वक़्त में ‘देव’ दुआएं काम आता है। देवेश साखरे ‘देव’ तलातु... »

सजा ना सकूंगा

अपनी ज़िंदगी फिर सजा ना सकूंगा। प्यार का साज फिर बजा ना सकूंगा। क्या मैं इतना मजबूर हो गया हूं, कि तुम्हें फिर बुला ना सकूंगा। क्या तुम इतनी दूर हो गई हो मुझसे, कि तुम्हें गले फिर लगा ना सकूंगा। अब आ भी जाओ और ना तड़पाओ, गमे-ज़ुदाई सीने में फिर दबा न सकूंगा। देवेश साखरे ‘देव’ »

तेरे इंतज़ार में

हां कहती, नहीं ना कहती हो, छोड़ रखा बीच मझधार में। सारी जिंदगी बीता दूंगा मैं, सनम बस तेरे इंतज़ार में। नादान बन कहती, तुमसे प्यार कहां है। होंठों पर ना है, और दिल में हां है। कुछ तो सिला दो, मेरी मोहब्बत का, कह दो मुझे भी तुमसे प्यार हां है। दिलाते हैं इतना यकीन तुम्हें, दे सकते जां तुम्हारे प्यार में। सारी जिंदगी बीता दूंगा मैं, सनम बस तेरे इंतज़ार में। फीके लगते हैं सभी हंसीन नज़ारे। सच है नहीं... »

प्यार

पहली ही नजर में पूरी हो आस, ख़त्म हो जैसे बरसों की तलाश। जिसके वास्ते था मैं बेकरार, शायद इसे ही कहते हैं प्यार। प्यार में नज़रों की, ज़ुबाँ होती है, ख़ामोश हाले-दिल बयां होती है। बस इंतज़ार हो दीदार-ए-यार, शायद इसे ही कहते हैं प्यार। दिल कहे, हां यही है जिंदगानी, संग जिसके जीवन है बितानी। जिसके बिना अधूरा हो संसार, शायद इसे ही कहते हैं प्यार। प्यार करो तो ताउम्र निभाओ, प्यार की एक मिसाल बनाओ। आंख... »

सर्द रातें

ठिठुरती रातों में वो हवाएँ जो सर्द सहता है। किसे बताएँ मुफ़्लिसी का जो दर्द सहता है। ज़मीं बिछा आसमां ओढ़ता, पर सर्द रातों में, तलाशता फटी चादर, जिसपे कर्द रहता है। पाँव सिकोड़, बचने की कोशिशें लाख की, पर बच ना सका, हवाएँ जो बेदर्द बहता है। किसको इनकी परवाह, कौन इनकी सुनता, देख गुज़र जाते, कौन इन्हें हमदर्द कहता है। रोने वाला भी कोई नहीं, इनकी मय्यत पर, खौफनाक शबे-मंज़र, बदन ज़र्द कहता है। देवेश स... »

सूखे गुलाब

किताबों में दबे गुलाबों की, अपनी अलग दास्तां होती है। बगैर कुछ कहे ख़ामोशी से, उनकी कहानी बयां होती है। भले ही वह सूख जाए, पर सदा जवान होती है। सम्भाल कर रखने वाले की, सबसे बढ़ कर जान होती है। किसी का प्यार से दिया तोहफा, क़िस्मत पर मेहरबान होती है। इन्हीं हंसीन यादों के सहारे ही, सारी जिंदगी आसान होती है। देवेश साखरे ‘देव’ »

प्यार चाहिए

मुझे एहसान नहीं प्यार चाहिए। मुझे रहम नहीं एतबार चाहिए। तुम ही मेरे दिल की सुकून हो, मुझे तड़प नहीं करार चाहिए। बगैर तुम्हारे अब जीना है मुहाल, मुझे तसव्वुर नहीं दीदार चाहिए। बरसों से जिंदगी का चमन है सूना, मुझे खिजां नहीं बहार चाहिए। देवेश साखरे ‘देव’ »

शहर की चकाचौंध

गाँव की जमीं बेच दी, पुश्तैनी मकां बेच दिया। शहर की चकाचौंध खरीदी, खुशियों का जहां बेच दिया। मिट्टी की सौंधी महक, चिड़ियों की मधुर चहक। नीम की ठंडी छाँव, मिट्टी में सने पाँव। खेतों को जाती पगडंडीयाँ, बैलों के गले बंधी घंटीयाँ। तालाब में गोते लगाना, चूल्हे में पका खाना। जमीन पर बिछा आसन, परिवार के संग भोजन। मटके का ठंडा पानी, दादा-दादी की कहानी। यह मधुर स्मृतियाँ हमने, ना जाने कहाँ बेच दिया। शहर की... »

दिल के करीब

समझते थे जिन्हें हम अपने दिल के करीब। मेरे खिलाफ शाजिसो में वो निकले शरीक। हमें कोई शिकवा न होता, गर वो गैर होता, पर वो तो थे, हमारे सबसे अज़ीज़ रफ़ीक। देवेश साखरे ‘देव’ रफ़ीक-साथी »

तेरा ही ज़िक्र

तेरा ही ज़िक्र है, मेरी हर एक नज़्म में। इरादा नहीं तू रूसवा हो, भरी बज़्म में। पढ़ता हूँ कुछ, चला जाता तेरी ही रूख़, हार जाता हूँ मैं, दिलो-ज़ेहन के रज़्म में। पहलू में गर तू हो, ज़रूरत नहीं ज़िक्र की, पर लगता कुछ तो कमी है, मेरी हज़्म में। यहाँ चेहरे तो बहुत से हैं, पर हर चेहरे में, तेरा ही चेहरा नज़र आता, मेरी चश्म में। सात फेरे हो, या फिर हो जश्ने-ज़िन्दगी, तू साथ हो मेरे, ज़िन्दगी की हर रस्म ... »

शोलों सा जला

शोलों सा जला मैं, बरसा बादलों सा कभी। हालाते-दीवानगी पर, कहकशे लगाते सभी। मजनूँ ना सही, इश्क मेरा भी कुछ कम नहीं, तुम कहो तो तुम्हारे वास्ते, मैं जाँ दे दूँ अभी। देवेश साखरे ‘देव’ »

शजर

शजर

तेरे हाथ सौगात, मेरे हाथ भी सौगात। मेरे मन में पाप और तेरे नेक जज़्बात। तुमने दिया हमें, जीने की नेमतें सारी, मैं खुदगर्ज तुझपे करता रहा आघात। मिटा कर वज़ूद तेरा, किसे छला मैंने, तेरे बगैर मेरी, कुछ भी नहीं औकात। शजर की कीमत ना समझी अब अगर, बद से बदतर होते जाएंगे फिर हालात। देवेश साखरे ‘देव’ शजर- पेड़ »

फ़ैशन

फ़ैशन की चरम तो देखो। लोगों की भरम तो देखो। कांच की अलमारी में बंद, ऊँची कीमत बढ़ा रही शान। तार-तार सा हुआ चिथड़ा, टंगा बनकर एक परिधान। उस चिथड़े के करम तो देखो। फ़ैशन की चरम तो देखो। लोगों की भरम तो देखो। जिसे फेंक दिया जाता, पोंछा भी ना बन पाता। फ़ैशन की हद तो देखो, युवा पहन कर इतराता। फ़ैशन का ज्ञान परम तो देखो। फ़ैशन की चरम तो देखो। लोगों की भरम तो देखो। पश्चिमी हमारी पारंपरिक, वेषभूषा अपना रह... »

मेरी चाहत

तुम हो मेरी चाहत, यह तुमने भी तो है माना। अगर तुम न हुई मेरी तो, कुछ भी कर सकता है दीवाना। दिल के करीब फिर भी कितनी दूर हो। दुनिया से या फिर खुद से मजबूर हो। आ जाओ मुझमें समा जाओ, मुश्किल है बगैर तेरे जीवन बिताना। अगर तुम न हुई मेरी तो, कुछ भी कर सकता है दीवाना। जाने कब बनोगी मेरी दुल्हन। जाने कब सजेगा मेरा अंजुमन। मेरे विरान इस जहान को, अपने हाथों से तुम सजाना। अगर तुम न हुई मेरी तो, कुछ भी कर सक... »

गुज़र जाता है

जो चाहता नहीं, वही गुज़र जाता है। रहा – सहा जज़्बात भी मर जाता है। जिन से थोड़ी बहुत उम्मीद होती है, वही हम से आंखें फेर जाता है। जिन्हें सर आंखों पर बिठाना चाहिए, बेअदबी, उनका ही कुसूर कराता है। फितरत नहीं, किसी की तौहीन करना, पर वो काम ही कुछ ऐसे कर जाता है। या खुदा हो सके तो मुझे माफ करना, सच्चाई की तरफ मेरा ज़मीर जाता है। देवेश साखरे ‘देव’ »

कुर्बान तुझपे जान

तुझसे इतनी मोहब्बत करते हैं सनम। कुर्बान तुझपे जान कर सकते हैं हम। नहीं कहता चांद तारे तोड़ कर ला दूंगा। नहीं कहता कि ज़मीं-आसमां मिला दूंगा। जिंदगी तेरे नाम करने की खाते हैं कसम, कुर्बान तुझपे जान कर सकते हैं हम। तुझसे इतनी मोहब्बत करते हैं सनम। तुम ही मेरी सुबह, तुम ही शाम हो। मेरी सारी खुशियां तुम ही तमाम हो। तुम्हीं से शुरू, तुम पे ही करते हैं ख़तम, कुर्बान तुझपे जान कर सकते हैं हम। तुझसे इतनी... »

बस कीजिए

शराफत को बस यहीं बस कीजिए । मीठा धुआँ है और एक कश लीजिए । ये तो उस बेवफा से बेहतर होती है । दिल तो जलाती, मगर होंठों पर होती है । बेवफा से तो वफा का साथ न मिला, मगर यह साथ अक्सर होती है ।। बेवफाई का आलम जिसने देखा है, कहता फिरेगा हर शख्स लीजिए । मीठा धुआँ है और एक कश लीजिए । शराफत को बस यहीं बस कीजिए ।। कहते हैं ले जाता है मौत की ओर। कम्बख्त जीना चाहता है कौन और । अब तो ये जहाँन लगती है विरान, संभ... »

नाज़ हमें

धराशाई हो जब गिरा, वो धरा पर। जां न्यौछावर कर गया वसुंधरा पर। तेरी शहादत से महफूज़ मूल्क मेरा, नाज़ हमें तेरे लहू के हर कतरा पर। बात जब भी हिफाज़ते-वतन की हो, टूट पड़ता है जवान, हर खतरा पर। अकेला घिरा, वो दुश्मनों पर भारी है, ना खौफ, ना शिकन उसके जरा पर। पीछे हटना तो हमारे खून में ही नहीं, लहू की आखरी बूंद तक वो लड़ा पर। गाड़ ध्वज तिरंगा, शत्रुओं के वक्ष पर, सर ऊँचा किया, वो खुद गिरा धरा पर। देवेश ... »

तेरी अंगड़ाई

चाँद की सूरत, तेरी सूरत रानाई। होश उड़ा ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। तारीफ करूँ क्या तेरे अहदे-शबाब की, जुबां बंद कर गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। सारी रात बीती करवटें बदलते – बदलते, सहरे-नींदें चुरा ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। पायल की छन-छन, चूड़ियों की खन-खन, सब्रो-सुकूं छीन ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। वस्ले-सनम से पहले ही कहीं ‘देव’, जां न ले ले मेरी, तेरी अंगड़ाई।। देवेश साखरे ‘देव... »

आशियाँ

रेत का महल, पल दो पल में ढह गया। आशियाँ अरमानों का पानी में बह गया। तिनके जोड़कर बनाया था जो घोंसला, बस वही, तूफानों से लड़ कर रह गया। वह दरिया है, जो बुझा गई तिश्नगी मेरी, सागर किनारे भी प्यासा खड़ा रह गया। आरज़ू नहीं, आसमां से भी ऊँचे कद की, ज़मीं का ‘देव’, ज़मीं से जुड़ कर रह गया। देवेश साखरे ‘देव’ »

दूध का जला

जो जैसा दिखता है, वो वैसा होता नहीं है। दूध का जला बगैर फुंके, छाछ भी पीता नहीं है।। लोग चेहरे पर चेहरा लगाए होते हैं, सूरत से सीरत का पता चलता नहीं है। मुंह में राम बगल में छुरा छिपाए होते हैं, अब तो अपनों पर भी यकीं होता नहीं है।। देवेश साखरे ‘देव’ »

मेरे महबूब

मेरे महबूब को देख, चाँद भी शरमाया है। मेरा माहताब जो ज़मीं पर उतर आया है। चाँद भी कहीं, देखो बादलों में छुप गया, अक्स देख तेरा, रश्क से मुँह छिपाया है। ऐ चाँद, तेरी चाँदनी की जरूरत नहीं मुझे, मेरे महबूब के नूर से सारा समाँ नहाया है। कोशिशें लाख कर ली, नज़रें हटती नहीं, तुमने हुस्नो-नज़ाकत कुछ ऐसा पाया है। बेशक हमने, कमाई नहीं दौलत बेशुमार, तेरी मोहब्बत का साया, मेरा सरमाया है। देवेश साखरे ‘द... »

परेशाँ क्यूँ है

दिले-नादाँ, तू इतना परेशाँ क्यूँ है। खता क्या हुई, इतना पशेमाँ क्यूँ है। इज़हारे-इश्क, कोई गुनाह तो नहीं, तेरे चेहरे की रंगत, फिर हवा क्यूँ है। इंतज़ार तो कर, इकरारे-ज़वाब का, यकीं तो रख, ख़ुद पर शुबहा क्यूँ है। ज़रूरी नहीं, पूरा हो इश्क सभी का, गम के प्याले में तू फिर डूबा क्यूँ है। वो भी तुम्हें चाहे, ये ज़रूरी तो नहीं, एक तरफ़ा प्यार से तू ख़फा क्यूँ है। शायद मंजिल तेरी कुछ और तय हो, बजा सोचा ज... »

मय ही मय

हमें तो पता ही न था, ये नशा क्या शय है। हिज्र-ए-महबूब के बाद, बस मय ही मय है। दुनिया हमारी शराफ़त की मिसाल देती थी, शरीफ़ों मे ही नहीं, रिंदों के बीच भी गये हैं। देवेश साखरे ‘देव’ रिंद- शराबी »

मसरूफ़

यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं। इतना भी मसरूफ़ कमबख़्त नहीं। मिला करो कभी कभार, जो हमसे करते हैं प्यार। इतना भी दिल को करो सख्त नहीं। यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं। मिलो कभी बगैर तलब, कभी यूँ ही बिना मतलब। मतलब से मिलने की जरूरत नहीं। यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं। क्या पता कल हों ना हों, दिल में कोई मलाल ना हो। प्रेम ज़रूरी, संबंध ज़रूरी रक्त नहीं। यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं। मिलने ... »

तेरी खुबसूरती

तेरी कातिल निगाहें देखकर, मैं गज़ल पढ़ दूँ। तेरी खुबसूरती पर क़सीदे, मैं हर पल गढ़ दूँ। तेरी खुबसूरती अल्फ़ाज़ों की मोहताज़ नहीं, गर तू कहे तो, तारीफों के चार चाँद जड़ दूँ। देवेश साखरे ‘देव’ »

ख्वाब

खुली आँखों का ख्वाब जरूर मुकम्मल होता है। नींद में दिखा ख्वाब तो, याद भी ना कल होता है। ज़िद है, ख्वाब पूरे होंगे अपने एक दिन यकीनन, खुद पर यकीन रख, फिर मन क्यों बेकल होता है। भाव का कद्र तो उसे पता, जिसने अभाव देखा हो, उसके प्रभाव से ही दुनिया, उसका क़ायल होता है। घमासान जंग छिड़ी है, जिंदगी और मेरे दरम्यान, देखें कौन सूरमा होता है और कौन घायल होता है। आओ आज को जी भर जी लें, कल किसने देखा, आज को ... »

वक्त

वक्त से मैं बेवक्त उलझता रहा। वक्त से बड़ा कद समझता रहा। वक्त ने इस कदर उलझाया मुझे, वक्त ना वक्त पर सुलझता रहा। देवेश साखरे ‘देव’ »

शायर

इश्क का दरिया जब ज़ेहन के समंदर से मिलता है। दिल के साहिल से टकरा, गज़ल बह निकलता है। हिज़्रे-महबूब का गम हो, या वस्ले-सनम की खुशी, ज़ेहन में अल्फ़ाज़ों का सैलाब उफनता, उतरता है। जिसने भी कभी इश्क किया, वो शायर ज़रूर हुआ, इश्क रब से करता है, या फिर महबूब से करता है। दिल से निकले जज़्बात, उनके दिल में उतर जाए, हो गई गज़ल, फिर ज़रूरी नहीं क़ाफ़िया मिलता है। देवेश साखरे ‘देव’ »

प्रेम

मेरी लेखनी में अभी जंग लगा नहीं। प्रेम के सिवा दूजा कोई रंग चढ़ा नहीं। प्रेम में लिखता हूँ, प्रेम हेतु लिखता हूँ। प्रेम पर लिखता हूँ, प्रेम ही लिखता हूँ। प्रेम के सिवा मुझे कोई ढंग पता नहीं। प्रेम के सिवा दूजा कोई रंग चढ़ा नहीं। प्रेम श्रृगांर लिखता हूँ, प्रेम मनुहार लिखता हूँ। प्रेम अपार लिखता हूँ, प्रेम उद्धार लिखता हूँ। प्रेम से भला कभी कोई तंग हुआ नहीं। प्रेम के सिवा दूजा कोई रंग चढ़ा नहीं। प्... »

जां तक निसार हुआ

तुम्हीं ने कहा था, हां मुझे भी तुमसे प्यार हुआ। हुई क्या खता, तुम्हारी नजरों में गुनहगार हुआ। हमने तो डाल दी, सारी खुशियां तुम्हारे दामन में, क्या रह गई कमी, प्यार में जां तक निसार हुआ। करते रहे हम, सारी उम्र बेपनाह मोहब्बत तुमसे, मेरी मोहब्बत का फिर भी ना, तुझे ऐतबार हुआ। कल तक जो थकते ना थे, लेते नाम हमारा, आज क्यों तुम्हारे वास्ते, ‘देव’ खतावार हुआ। देवेश साखरे ‘देव’ »

तिरंगा

तिरंगे का रंग जब सर चढ़ता है। बेजान शख्स भी उठ पड़ता है। झुकाने की औकात नहीं किसी की, दुश्मन लाख अपनी एड़ी रगड़ता है। केसरिया रंग बांध अपने सर पर, जवान जब सरहद पर लड़ता है। श्वेत रंग दिलों में जो धारण किया, शांति का पाठ दुनिया में पढ़ता है। हरे रंग की चादर से लिपटी धरती, हरित क्रांति किसान पसीने से गढ़ता है। अशोक चक्र बांध अपने रथ पे ‘देव’, मेरा भारत प्रति पल आगे बढ़ता है। देवेश साखरे ... »

संगदिल हमराज

ताज है मोहताज, सरताज कहाँ से लाऊँ। बना रखा है ताज, मुमताज कहाँ से लाऊँ। साथ निभाने का वादा करते थे कल तक, बीता हुआ वो कल, आज कहाँ से लाऊँ। संगदिल कहूँ या फिर दिले-कातिल कहूँ, किस नाम पुकारूं, अल्फ़ाज़ कहाँ से लाऊँ। जो कल तक थे, मुझ बेजुबां की आवाज, फिर बुला सकूँ, वो आवाज़ कहाँ से लाऊँ। दिल जोड़ना, फिर तोड़ना, क्या फन तुम्हारा, करार दे दिल को, वो साज कहाँ से लाऊँ। छोड़ा बीच राह, यहीं तक था साथ हमार... »

क्या हो तुम

मेरी हर गीत, हर साज़ हो तुम । कल को भूला दूँ, वो आज हो तुम । कैसे बयान करूँ, क्या हो तुम, मुझ बेज़बां की, आवाज़ हो तुम ।। मेरी हर नज़्म, हर ग़ज़ल हो तुम। तुम ही ज़िंदगी और अजल हो तुम। कैसे बयान करूँ, क्या हो तुम, ख़ुदा की हँसीन, फ़ज़ल हो तुम।। मेरी ज़िंदगी, हर साँस हो तुम । ज़िन्दा रहने की आस हो तुम । कैसे बयान करूँ, क्या हो तुम, मेरी आख़िरी तलाश हो तुम ।। मेरी हर राह, हर मंज़िल हो तुम । बहता दरिय... »

कमी है कुछ तुम में

तुम्हें देख यूँ लगा कुछ भी नहीं माहताब। सोचता हूँ तुम हकीकत हो या फिर ख्वाब । किया इजहारे-मोहब्बत, कल पे टाल दिया, सारी रात आँखों में कटी, पाने को जवाब । कहते हैं तुमसे दोस्ती है, मोहब्बत तो नहीं, मुझे पाने के कैसे सजा डाले तुमने ख्वाब । कर दिया इनकार ‘देव’ कमी है कुछ तुम में, सोचा भी कैसे इकरारे-मोहब्बत तुमने जनाब । देवेश साखरे ‘देव’ »

सहारा तू ही साकी

आबाद जहां करने को, उम्मीद एक ही बाकी है, अब न कोई ज़िंदगी में, सहारा तू ही साकी है । हिज्र-ए-महबूब ने मुझे, क्या से क्या बनाया, खुद को डूबोया प्याले में, शराब तू ही साथी है । आज दस्तकश वो कहते, अजनबी तुम हो कौन, कल जिन्हें ऐतराफ़ था, मैं चिराग़ तू ही बाती है । कुछ भी ना रही आरज़ू जिंदगी में, तेरे सिवाय, ना किसी शय का तलबगार, शराब तू ही भाती है । कोई रहगुज़र नहीं याद, मयकदा ही मेरी मंज़िल, गुज़रे ज... »

प्यार करके तो देखो

कभी दिल के करीब आकर तो देखो। प्यार का जज़्बात जगा कर तो देखो। लगने लगेगी सारी जिंदगानी हंसीन, किसी को ज़िंदगी में लाकर तो देखो। ना बहकने देंगे हम, तुम्हारे कदम, कभी गाम-दर-गाम मिलाकर तो देखो। तुम हो हकीकत, तुम ही ख्वाब हो, ख्वाब हंसीन प्यार के, सजाकर तो देखो। थाम लेंगे ‘देव’ ता उम्र तुम्हारा हाथ, कभी प्यार का हाथ, बढ़ा कर तो देखो। देवेश साखरे ‘देव’ गाम-दर-गाम – कदम से... »

हाथों में तेरा हाथ

शायद ख्वाब है, जो हाथों में तेरा हाथ है । एक चाँद आसमां में है, एक मेरे साथ है । तेरी सूरत चाँद की सूरत, है मरमरी मूरत, तुझसा ना हँसीन कोई, तेरी क्या बात है । गर तू शम्मअ है, तो मैं भी हूँ परवाना, बेशक बरसों पुराना, तेरा मेरा साथ है । कहते प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है, भीगे ‘देव’ के संग तू, प्यार की बरसात है । देवेश साखरे ‘देव’ »

मैं बदला नहीं

माफ़ करना मेरी आदत है, इसमें दो मत नहीं। मैं बदला नहीं, बदला लेना मेरी फ़ितरत नहीं। मैं जहाँ था वहीं हूँ, मैं वही हूँ और वही रहूँगा, लिबास की तरह बदलने की मेरी आदत नहीं। मैं कभी सूख जाऊँ या फिर कभी सैलाब लाऊँ, गहरा समंदर हूँ, मुझमें दरिया सी हरकत नहीं। शजर की झुकी डाल हूँ, पत्थर मारो या तोड़ लो, फल ही दूँगा, बदले में कुछ पाने की हसरत नहीं। आज कल मिलते हैं लोग, यहाँ बस मतलब से, बगैर मतलब मिलने की, ... »

तलाश

खुद को तलाशते गुमनामी में कहीं खो न जाऊँ। शोहरत की हसरत में गुमनाम कहीं हो न जाऊँ। चढ़ते सूरज को तो सारी दुनिया सलाम करती है, डरता है दिल की मैं अंधेरे में कहीं सो न जाऊँ। सितारे की मानिंद रौशनी आती रहे, धुंधली सही, भीड़ में मगर, नज़रों से ओझल कहीं हो न जाऊँ। सुना है, हाथों की लकीरों में नसीब छिपा होता है, अश्कों से मैं हाथों की लकीरें कहीं धो न जाऊँ। यूँ तो हमेशा प्यार के ही फूल खिले, पर डरता हूँ... »

अब होश ना रहे

ऐ साकिया अब होश ना रहे, तू इतना पीला । फिर ना जिंदगी से करूं, कोई शिकवे-गिला । करते रहे हम सारी उम्र, बेपनाह बवफाई, बेवफाई के सिवा हमें, और कुछ ना मिला । जिसे ज़िंदगी समझा, उसने ही लूट ली जिंदगी, मेरी मुहब्बत का तूने, दिया है अच्छा सिला । बागबां ने ही उजाड़ कर रख दिया, खुद बाग, फिर ना कभी बहार आई, ना कोई गुल खिला । अब ना रही जिंदगी से कोई, जुस्तजू ना आरज़ू, खुद ‘देव’ माँगे ख़ुदारा बस मु... »

तलाश

खुद को तलाशते गुमनामी में कहीं खो न जाऊँ। शोहरत की हसरत में गुमनाम कहीं हो न जाऊँ। चढ़ते सूरज को तो सारी दुनिया सलाम करती है, डरता है दिल की मैं अंधेरे में कहीं सो न जाऊँ। सितारे की मानिंद रौशनी आती रहे, धुंधली सही, भीड़ में मगर, नज़रों से ओझल कहीं हो न जाऊँ। सुना है, हाथों की लकीरों में नसीब छिपा होता है, अश्कों से मैं हाथों की लकीरें कहीं धो न जाऊँ। यूँ तो हमेशा प्यार के ही फूल खिले, पर डरता हूँ... »

इंतज़ार तुम्हारा

चंद हर्फ़ तुम्हारी नज़र करता हूँ । तुम पे कुर्बान दिल-ओ-जिगर करता हूँ । मेरे ख्वाबों की ज़ीनत हो तुम, इंतज़ार तुम्हारा हर पहर करता हूँ । काँटों से दामन इस कदर उलझा, सुलझाने की कोशिश हर कसर करता हूँ । कभी न कभी तो मिलोगी किसी मोड़ पर, इसी उम्मीद में जिंदगी बसर करता हूँ । गर आये कभी मौका जां-ए-आजमाइश का, तुम्हें अमृत खुद को ज़हर करता हूँ । जहाँ भी हो खुशियों के बीच रहो, दुआ मैं ‘देव’ शब-ओ... »

कस्तूरी मृग

कस्तूरी अपनी नाभि में रख मृग, सुगंध के पीछे भागती सारे वन में। काम, मोह, माया के पीछे भाग, व्यर्थ समय ना गंवाओ जीवन में। धैर्य, शील, शांति पाना कठिन नहीं, खोज सकते हैं स्वयं अंतर्मन में। देवेश साखरे ‘देव’ »

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