मोहब्बत को भूला देना, इतना आसान नहीं। फैसला सुना दिया, मैं कोई बेजुबान नहीं। मेरे सीने में भी दिल है, दर्द है, तड़प है, पत्थर तो नहीं, कैसे समझ लिया इंसान नहीं। अश्क सूख चुके, […]

तुम्हें भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं, तुम्हें जिंदगी में ला पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम्हें बस देख कर ही जी लेंगे, तुम्हें बगैर देखे रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। […]

इस कदर छाया है तेरे प्यार का नशा। बस तेरी यादें ही दिलो-दिमाग पर बसा। तुमसे दूर अब रहा भी न जाए। ये जुदाई अब सहा भी न जाए। कब उखड़ जाए ये चंद सांसें, […]

बगैर प्यार के कुछ भी नहीं संसार में। वो कहते हैं क्या रखा है, इस प्यार में। हंसीन लगती यह दुनिया, प्यार होते ही, जहां की खुशियां सिमटी, इस प्यार में। कैसे दिलाएं तुम्हें एतबार, […]

तुम्हारे बगैर जी तो नहीं सकता, हाँ, मर जरूर सकता हूँ । पर मर कर भी यदि चैन न मिला तो, मेरी रूह भटकेगी। तुम्हें पाने को तड़पेगी। तुम्हें परेशान करने का इरादा नहीं है […]

तुम्हारी तस्वीर से बातें करता हूं। कभी कुछ सोच कर हंसता हूं। कभी कुछ सोच कर रो देता हूं। कभी बस एकटक निहारता हूं। तो कभी चूम लेता हूं। तुम्हारी तस्वीर से बातें करता हूं। […]

तू मेरी रूह में, कुछ इस तरह समाई है। के रहमत मुझपर, रब की तू ख़ुदाई है। तू नहीं तो मैं नहीं, कुछ भी नहीं, शायद तुझे पता नहीं, मेरा वजूद तुने बनाई है। तू […]

ख़ुदा पर जो भी बंदा यकीं दिखाता है। तलातुम में फँसी वो सफीना बचाता है। कठपुतलीयों की डोर है उसके हाथों में, जाने कब, कहाँ, कैसे, किसे नचाता है। जो किरदार उम्दा निभा गया रंगमंच […]

अपनी ज़िंदगी फिर सजा ना सकूंगा। प्यार का साज फिर बजा ना सकूंगा। क्या मैं इतना मजबूर हो गया हूं, कि तुम्हें फिर बुला ना सकूंगा। क्या तुम इतनी दूर हो गई हो मुझसे, कि […]

हां कहती, नहीं ना कहती हो, छोड़ रखा बीच मझधार में। सारी जिंदगी बीता दूंगा मैं, सनम बस तेरे इंतज़ार में। नादान बन कहती, तुमसे प्यार कहां है। होंठों पर ना है, और दिल में […]

पहली ही नजर में पूरी हो आस, ख़त्म हो जैसे बरसों की तलाश। जिसके वास्ते था मैं बेकरार, शायद इसे ही कहते हैं प्यार। प्यार में नज़रों की, ज़ुबाँ होती है, ख़ामोश हाले-दिल बयां होती […]

ठिठुरती रातों में वो हवाएँ जो सर्द सहता है। किसे बताएँ मुफ़्लिसी का जो दर्द सहता है। ज़मीं बिछा आसमां ओढ़ता, पर सर्द रातों में, तलाशता फटी चादर, जिसपे कर्द रहता है। पाँव सिकोड़, बचने […]

किताबों में दबे गुलाबों की, अपनी अलग दास्तां होती है। बगैर कुछ कहे ख़ामोशी से, उनकी कहानी बयां होती है। भले ही वह सूख जाए, पर सदा जवान होती है। सम्भाल कर रखने वाले की, […]

मुझे एहसान नहीं प्यार चाहिए। मुझे रहम नहीं एतबार चाहिए। तुम ही मेरे दिल की सुकून हो, मुझे तड़प नहीं करार चाहिए। बगैर तुम्हारे अब जीना है मुहाल, मुझे तसव्वुर नहीं दीदार चाहिए। बरसों से […]

गाँव की जमीं बेच दी, पुश्तैनी मकां बेच दिया। शहर की चकाचौंध खरीदी, खुशियों का जहां बेच दिया। मिट्टी की सौंधी महक, चिड़ियों की मधुर चहक। नीम की ठंडी छाँव, मिट्टी में सने पाँव। खेतों […]

समझते थे जिन्हें हम अपने दिल के करीब। मेरे खिलाफ शाजिसो में वो निकले शरीक। हमें कोई शिकवा न होता, गर वो गैर होता, पर वो तो थे, हमारे सबसे अज़ीज़ रफ़ीक। देवेश साखरे ‘देव’ […]

तेरा ही ज़िक्र है, मेरी हर एक नज़्म में। इरादा नहीं तू रूसवा हो, भरी बज़्म में। पढ़ता हूँ कुछ, चला जाता तेरी ही रूख़, हार जाता हूँ मैं, दिलो-ज़ेहन के रज़्म में। पहलू में […]

शोलों सा जला मैं, बरसा बादलों सा कभी। हालाते-दीवानगी पर, कहकशे लगाते सभी। मजनूँ ना सही, इश्क मेरा भी कुछ कम नहीं, तुम कहो तो तुम्हारे वास्ते, मैं जाँ दे दूँ अभी। देवेश साखरे ‘देव’

तेरे हाथ सौगात, मेरे हाथ भी सौगात। मेरे मन में पाप और तेरे नेक जज़्बात। तुमने दिया हमें, जीने की नेमतें सारी, मैं खुदगर्ज तुझपे करता रहा आघात। मिटा कर वज़ूद तेरा, किसे छला मैंने, […]

फ़ैशन की चरम तो देखो। लोगों की भरम तो देखो। कांच की अलमारी में बंद, ऊँची कीमत बढ़ा रही शान। तार-तार सा हुआ चिथड़ा, टंगा बनकर एक परिधान। उस चिथड़े के करम तो देखो। फ़ैशन […]

तुम हो मेरी चाहत, यह तुमने भी तो है माना। अगर तुम न हुई मेरी तो, कुछ भी कर सकता है दीवाना। दिल के करीब फिर भी कितनी दूर हो। दुनिया से या फिर खुद […]

जो चाहता नहीं, वही गुज़र जाता है। रहा – सहा जज़्बात भी मर जाता है। जिन से थोड़ी बहुत उम्मीद होती है, वही हम से आंखें फेर जाता है। जिन्हें सर आंखों पर बिठाना चाहिए, […]

तुझसे इतनी मोहब्बत करते हैं सनम। कुर्बान तुझपे जान कर सकते हैं हम। नहीं कहता चांद तारे तोड़ कर ला दूंगा। नहीं कहता कि ज़मीं-आसमां मिला दूंगा। जिंदगी तेरे नाम करने की खाते हैं कसम, […]

धराशाई हो जब गिरा, वो धरा पर। जां न्यौछावर कर गया वसुंधरा पर। तेरी शहादत से महफूज़ मूल्क मेरा, नाज़ हमें तेरे लहू के हर कतरा पर। बात जब भी हिफाज़ते-वतन की हो, टूट पड़ता […]

चाँद की सूरत, तेरी सूरत रानाई। होश उड़ा ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। तारीफ करूँ क्या तेरे अहदे-शबाब की, जुबां बंद कर गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। सारी रात बीती करवटें बदलते – बदलते, सहरे-नींदें चुरा […]

रेत का महल, पल दो पल में ढह गया। आशियाँ अरमानों का पानी में बह गया। तिनके जोड़कर बनाया था जो घोंसला, बस वही, तूफानों से लड़ कर रह गया। वह दरिया है, जो बुझा […]

जो जैसा दिखता है, वो वैसा होता नहीं है। दूध का जला बगैर फुंके, छाछ भी पीता नहीं है।। लोग चेहरे पर चेहरा लगाए होते हैं, सूरत से सीरत का पता चलता नहीं है। मुंह […]

मेरे महबूब को देख, चाँद भी शरमाया है। मेरा माहताब जो ज़मीं पर उतर आया है। चाँद भी कहीं, देखो बादलों में छुप गया, अक्स देख तेरा, रश्क से मुँह छिपाया है। ऐ चाँद, तेरी […]

दिले-नादाँ, तू इतना परेशाँ क्यूँ है। खता क्या हुई, इतना पशेमाँ क्यूँ है। इज़हारे-इश्क, कोई गुनाह तो नहीं, तेरे चेहरे की रंगत, फिर हवा क्यूँ है। इंतज़ार तो कर, इकरारे-ज़वाब का, यकीं तो रख, ख़ुद […]

हमें तो पता ही न था, ये नशा क्या शय है। हिज्र-ए-महबूब के बाद, बस मय ही मय है। दुनिया हमारी शराफ़त की मिसाल देती थी, शरीफ़ों मे ही नहीं, रिंदों के बीच भी गये […]

यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं। इतना भी मसरूफ़ कमबख़्त नहीं। मिला करो कभी कभार, जो हमसे करते हैं प्यार। इतना भी दिल को करो सख्त नहीं। यह सब बहाने ही हैं कि […]

तेरी कातिल निगाहें देखकर, मैं गज़ल पढ़ दूँ। तेरी खुबसूरती पर क़सीदे, मैं हर पल गढ़ दूँ। तेरी खुबसूरती अल्फ़ाज़ों की मोहताज़ नहीं, गर तू कहे तो, तारीफों के चार चाँद जड़ दूँ। देवेश साखरे […]

खुली आँखों का ख्वाब जरूर मुकम्मल होता है। नींद में दिखा ख्वाब तो, याद भी ना कल होता है। ज़िद है, ख्वाब पूरे होंगे अपने एक दिन यकीनन, खुद पर यकीन रख, फिर मन क्यों […]

इश्क का दरिया जब ज़ेहन के समंदर से मिलता है। दिल के साहिल से टकरा, गज़ल बह निकलता है। हिज़्रे-महबूब का गम हो, या वस्ले-सनम की खुशी, ज़ेहन में अल्फ़ाज़ों का सैलाब उफनता, उतरता है। […]

मेरी लेखनी में अभी जंग लगा नहीं। प्रेम के सिवा दूजा कोई रंग चढ़ा नहीं। प्रेम में लिखता हूँ, प्रेम हेतु लिखता हूँ। प्रेम पर लिखता हूँ, प्रेम ही लिखता हूँ। प्रेम के सिवा मुझे […]

तुम्हीं ने कहा था, हां मुझे भी तुमसे प्यार हुआ। हुई क्या खता, तुम्हारी नजरों में गुनहगार हुआ। हमने तो डाल दी, सारी खुशियां तुम्हारे दामन में, क्या रह गई कमी, प्यार में जां तक […]

तिरंगे का रंग जब सर चढ़ता है। बेजान शख्स भी उठ पड़ता है। झुकाने की औकात नहीं किसी की, दुश्मन लाख अपनी एड़ी रगड़ता है। केसरिया रंग बांध अपने सर पर, जवान जब सरहद पर […]

ताज है मोहताज, सरताज कहाँ से लाऊँ। बना रखा है ताज, मुमताज कहाँ से लाऊँ। साथ निभाने का वादा करते थे कल तक, बीता हुआ वो कल, आज कहाँ से लाऊँ। संगदिल कहूँ या फिर […]

मेरी हर गीत, हर साज़ हो तुम । कल को भूला दूँ, वो आज हो तुम । कैसे बयान करूँ, क्या हो तुम, मुझ बेज़बां की, आवाज़ हो तुम ।। मेरी हर नज़्म, हर ग़ज़ल […]

तुम्हें देख यूँ लगा कुछ भी नहीं माहताब। सोचता हूँ तुम हकीकत हो या फिर ख्वाब । किया इजहारे-मोहब्बत, कल पे टाल दिया, सारी रात आँखों में कटी, पाने को जवाब । कहते हैं तुमसे […]

आबाद जहां करने को, उम्मीद एक ही बाकी है, अब न कोई ज़िंदगी में, सहारा तू ही साकी है । हिज्र-ए-महबूब ने मुझे, क्या से क्या बनाया, खुद को डूबोया प्याले में, शराब तू ही […]

कभी दिल के करीब आकर तो देखो। प्यार का जज़्बात जगा कर तो देखो। लगने लगेगी सारी जिंदगानी हंसीन, किसी को ज़िंदगी में लाकर तो देखो। ना बहकने देंगे हम, तुम्हारे कदम, कभी गाम-दर-गाम मिलाकर […]

शायद ख्वाब है, जो हाथों में तेरा हाथ है । एक चाँद आसमां में है, एक मेरे साथ है । तेरी सूरत चाँद की सूरत, है मरमरी मूरत, तुझसा ना हँसीन कोई, तेरी क्या बात […]

माफ़ करना मेरी आदत है, इसमें दो मत नहीं। मैं बदला नहीं, बदला लेना मेरी फ़ितरत नहीं। मैं जहाँ था वहीं हूँ, मैं वही हूँ और वही रहूँगा, लिबास की तरह बदलने की मेरी आदत […]

खुद को तलाशते गुमनामी में कहीं खो न जाऊँ। शोहरत की हसरत में गुमनाम कहीं हो न जाऊँ। चढ़ते सूरज को तो सारी दुनिया सलाम करती है, डरता है दिल की मैं अंधेरे में कहीं […]

ऐ साकिया अब होश ना रहे, तू इतना पीला । फिर ना जिंदगी से करूं, कोई शिकवे-गिला । करते रहे हम सारी उम्र, बेपनाह बवफाई, बेवफाई के सिवा हमें, और कुछ ना मिला । जिसे […]

खुद को तलाशते गुमनामी में कहीं खो न जाऊँ। शोहरत की हसरत में गुमनाम कहीं हो न जाऊँ। चढ़ते सूरज को तो सारी दुनिया सलाम करती है, डरता है दिल की मैं अंधेरे में कहीं […]

चंद हर्फ़ तुम्हारी नज़र करता हूँ । तुम पे कुर्बान दिल-ओ-जिगर करता हूँ । मेरे ख्वाबों की ज़ीनत हो तुम, इंतज़ार तुम्हारा हर पहर करता हूँ । काँटों से दामन इस कदर उलझा, सुलझाने की […]