एक शहीद सैनिक दिल्ली से क्या कहना चाहता होगा इसी विषय पर मेरी एक कल्पना देखें- सुलग उठी है फ़िर से झेलम हर कतरा अंगारा है, हिमगिरी के दामन में फ़िर से मेरे खून की […]

मेरी कलम नहीं उलझी है माशूका के बालों में, मेरे लफ्ज नहीं अटके हैं राजनीति के जालों में, मैने अपने अंदर सौ-सौ जलते सूरज पाले हैं, और सभी अंगारे अपने लफ्जों में भर डाले हैं, […]

तेरी कलम को कभी अपनी रुबाई नहीं दूंगा, मैं तुझको चश्म-ए-नम की कमाई नहीं दूंगा l तेरी आंखों में वहम के कई पर्दे टंगे हुए हैं, मैं तुझे सामने रहकर भी दिखाई नहीं दूंगा l […]

ज़रा सा गौर से सुन अब ये आईंदा नहीं होना, कि मुझको तेरा होके और शर्मिन्दा नहीं होना| जहां मतलबपरस्ती आशनाई नोच खाती है, मुझे ऐसी तेरी बस्ती का बाशिन्दा नहीं होना| बहोत ही बेरहम […]

मेरी कलम नहीं उलझी है माशूका के बालों में, मेरे लफ्ज नहीं अटके हैं राजनीति की जालों में, मैने अपने अंदर सौ-सौ जलते सूरज पाले हैं, और सभी अंगारे अपने लफ्जों में भर डाले हैं, […]

**तुम होते तो शायद और बात होती** सहर तो अब भी होती है, सूरज अब भी निकलता है फलक़ पर, मगर मैं सोचता हूं कि तुम होते तो शायद और बात होती, दिन तो अब […]

**के जब तुम लौट कर आओ::स्मृति**   हौसला टूट चुका है, अब उम्मीद कहीं जख्मी बेजान मिले शायद, जब तुम लौट कर आओ तो सब वीरान मिले शायदll     वो बरगद का पेड़ जहां […]

इस मंच से जुड़े सभी काबिल रचनाकारों के नाम- ****उड़ान भरने दो**** अपनी आगोश में ये आसमान भरने दो, ये नये परिन्दे हैं,इन्हें उड़ान भरने दो l ये जिन्दगी जीने का हुनर सीख जायेंगे, ज़रा […]

**मेरी गज़लों में तुझे ढूढ रहे हैं ज़माने वाले**   मेरी गज़लों में तुझे ढूढ रहे हैं ज़माने वाले, अब कहां तुझको छुपाऊं छोड़ के जाने वाले l     कोई तो है जो इस […]

****जकड़ी है****   कुर्बानी से उपजी थी अब तस्वीरों में जकड़ी है, ऐ हिंद! तेरी आज़ादी सौ-सौ जंजीरों में जकड़ी है l     हर मुफलिस की भूख ने इसको अपनी कैद में रख्खा है, […]

ताज़ा गज़ल-   मेरा ये हुक्म है सांसों::Er Anand Sagar Pandey   मेरा ये हुक्म है सांसों कि एहतियात रहे, वो रहे ना रहे ता-उम्र उसकी बात रहे l     वो क़मर हो के […]

एक पुरानी गज़ल-   **ख्वाबों की फसलें आज भी मैं बोया करता हूं::गज़ल**     हक़ीक़त जान ले कि रात भर मैं रोया करता हूं, बहुत हैं दाग दामन में जिन्हें मैं धोया करता हूं […]

****ख्वाहिश रखता हूं**** ना साथ की ख्वाहिश रखता हूं, ना प्यार की ख्वाहिश रखता हूं, मैं सिर्फ तुम्हारे चेहरे के दीदार की ख्वाहिश रखता हूं l हां मुझको तुम्हारी आंखों के ये खार कंटीले लगते […]

**समझदार लोग धूल फांकते हैं::आनन्द सागर**   जो अपने आगे दूसरों को कम में आंकते हैं, ऐसे ही समझदार लोग धूल फांकते हैं l     जिनसे अपने घर का हाल सम्भाला नहीं जाता, ऐसे […]

कदम हैं अब भी हरकत में कहीं ठहरा नहीं हूं मैं, यक़ीनन टूट चुका हूं मगर बिखरा नहीं हूं मैं l अभी भी आईने में खुद को अक्सर ढूढ लेता हूं, सुनो ऐ गर्दिश-ए-हालात बस […]

पुरानी डायरियों से- **मैं तुमको भूल जाऊंगा** मेरी आंखों को ढलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा, मेरी सांसें निकलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l जमीं है एक मुद्दत से ज़ेहन में बर्फ यादों की, […]

पुरानी डायरियों से- **अब बात मेरी जान पे है::गज़ल** जेहन में दर्द जो उठता है आसमान पे है, बात ये है कि अब बात मेरी जान पे है l खौफ़ लगता है कि सांसें ना […]

**तेरे दर से उठे कदमों को::गज़ल** तेरे दर से उठे कदमों को किस मंज़िल का पता दूंगा मैं, भटक जाऊंगा तेरी राह में और उम्र बिता दूंगा मैं l हां मगर अपने होठों पे तेरा […]

भारत मां के अमर पुत्र “चन्द्रशेखर आजाद” की पुण्य तिथि पर मेरी एक तुच्छ सी रचना l रचना का भाव समझने के लिये पूरी रचना पढेl” **आजाद तेरी आज़ादी की अस्मत चौराहों पर लूटी जाती […]

मेरे ख्वाबों के घर से हर एक रवानी ले जाना, बिछड़ रहे हो मुझसे तो मेरी ये निशानी ले जाना l     ले जाना सब ख्वाब- खिलौने, ले जाना तुम बचपन मेरा, और सुनो […]

कतरा-कतरा करके समन्दर निकाल दूंगा मैं, मैने तय किया है अपनी आंखें खंगाल दूंगा मैं ll मेरे सदमों का सबब तुम हो ये राज राज रहेगा, कोई गर पूछ भी लेगा तो टाल दूंगा मैं […]

****बगावत कर लेंगे::गज़ल****   छुप के बैठे हैं कई अल्फाज़ मेरे होठों की तहों में, तुम कोई बात करोगे तो ये बेबात बगावत कर लेंगे l     बड़ी मुश्किल से मेरे हालात मेरे काबू […]

**ज़िन्दगी ठहरी रही और उम्र आगे चल पड़ी::गज़ल** (मध्यम बहर पर) उस ख्वाब की ताबीर जब शम्म-ए-फुगन में जल पड़ी, तब ज़िन्दगी ठहरी रही और उम्र आगे चल पड़ी l फ़िर कैफियत का ज़िक्र भी […]

हिफाजत कर ले मेरी आजकल कहने लगा है, ना जाने क्यूं मेरा दिल खौफ़ में रहने लगा है l     उम्र भर ख्वाब चुन-चुन कर जिसे तैयार किया था मैने, मेरे ख्वाबों का वो […]

ज्वलंत “कैराना” मुद्दे पर मेरी चंद पंक्तियां-     कहीं से आ बसी हैं दहशतें, ये घर मेरे ख्वाबों का वीराना ना हो जाये, खुदाया इल्तज़ा है तू हिफाज़त कर मेरे दिल की, कहीं बाखौफ़ […]

**** तुम्हारे बिन****   कोई धड़कन ना कोई सांस तक पाऊं तुम्हारे बिन, तुम्ही कह दो कि आखिर अब कहां जाऊं तुम्हारे बिन l   खुदा से आज सजदे में यही फ़रियाद करता हूं, तुम्हारा […]

खयाल-ए-दिल, सभी जज़्बात फ़िर से आम कर रहा हूं, मैं इक ताज़ा गज़ल फ़िर से तुम्हारे नाम कर रहा हूं l     तुम्हारे ही तसोव्वुर में गुज़रता है मेरा हर दिन, तुम्हारे ही तसोव्वुर […]

मेरी आंखों से रिस-रिस कर कोई तूफ़ान कहता है, सताओ यूं ना तुम मुझको ऐ मेरी जान कहता है l     तुम्हें मैं याद करने की तलब में इस कदर खोया, कि अक्सर अब […]

पांव भर चुके हैं छालों से, है दिल जख्मी पड़ा मलालों से l     भरी आंखों में बक़रारी है, जेहन बेचैन है सवालों से l     दिल में अफसुर्दगी का आलम है, अश्क […]

ना चाहते हुए भी फ़िर से हिमाक़त हो गई, कल फ़िर उसे देखा,फ़िर से मुहब्बत हो गई l     वही वो झील सी आंखें,वही बादल से वो गेसू, बलखाती कमर उसकी फ़िर से क़यामत […]

**रहने दे::गज़ल**   यही चाहत का है दस्तूर तो दस्तूर रहने दे, मुझे बेबस ही रहने दे मुझे मजबूर रहने दे l     तुझे जब याद करता हूं तो दुनिया भूल जाता हूं, तेरी […]

वही तल्खियत लहज़े में, वही कशिश अदाओं में, आज फ़िर यही लगा कि बदला नहीं है वो l     उसको भी मयस्सर हैं मेरे हिज़्र के खसारे, मेरे उन्स से भी अबतक निकला नहीं […]