Er Anand Sagar Pandey, Author at Saavan's Posts

देशभक्ति का भाषण तब तक देशभक्ति को गाली है

एक शहीद सैनिक दिल्ली से क्या कहना चाहता होगा इसी विषय पर मेरी एक कल्पना देखें- सुलग उठी है फ़िर से झेलम हर कतरा अंगारा है, हिमगिरी के दामन में फ़िर से मेरे खून की धारा है, चीख रही है फ़िर से घाटी गोद में मेरा सिर रखकर, पूछ रही है सबसे आखिर कौन मेरा हत्यारा है, मेरे घर में कैसे दुश्मन सीमा लांघ के आया था, छोटी सी झोली में बाईस मौतें टांग के लाया था, क्या मेरा सीना उसके दुस्साहस का आभूषण था, या मेरे ही... »

मेरी कलम नहीं उलझी है माशूका के बालों में

मेरी कलम नहीं उलझी है माशूका के बालों में, मेरे लफ्ज नहीं अटके हैं राजनीति के जालों में, मैने अपने अंदर सौ-सौ जलते सूरज पाले हैं, और सभी अंगारे अपने लफ्जों में भर डाले हैं, मैने कांटे चुन डाले फूलों का रास्ता छोड़ दिया, जकड़ रहा था जो मुझको उस नागपाश को तोड़ दिया, अब मैं जख्मी भारत के अंगों को गले लगाता हूं, कवि हूं लेकिन मैं शोलों की भाषा में चिल्लाता हूं l All rights reserved. -Er Anand Sagar Pa... »

मैं तुझे अपनी वफाओं की दुहाई नहीं दूंगा

तेरी कलम को कभी अपनी रुबाई नहीं दूंगा, मैं तुझको चश्म-ए-नम की कमाई नहीं दूंगा l तेरी आंखों में वहम के कई पर्दे टंगे हुए हैं, मैं तुझे सामने रहकर भी दिखाई नहीं दूंगा l अभी गुरूर तेरे सर पे चढ के बोल रहा है, ऐसे हाल में मैं तुझको सुनाई नहीं दूंगा l तू बेफिक्र होकर अपनी फितरतों से वफ़ा कर, मैं तुझे अपनी वफाओं की दुहाई नहीं दूंगा l तेरा जो फ़ैसला है बेझिझक मुझको बताती जा, मैं बेकसूर हूं मैं कोई सफ़ाई नही... »

तेरा होके और शर्मिन्दा नहीं होना

ज़रा सा गौर से सुन अब ये आईंदा नहीं होना, कि मुझको तेरा होके और शर्मिन्दा नहीं होना| जहां मतलबपरस्ती आशनाई नोच खाती है, मुझे ऐसी तेरी बस्ती का बाशिन्दा नहीं होना| बहोत ही बेरहम होकर किया था कत्ल खुद तूने, मेरे दिल में तेरी ख्वाहिश को फ़िर ज़िंदा नहीं होना| जहां खुदगर्ज़ियों में रास्ते मंज़िल बदलते हैं, मुझे ऐसी तेरी राहों का कारिन्दा नहीं होना| All rights reserved. -अनन्य »

मेरी मौतों पर सरकारें

मेरी कलम नहीं उलझी है माशूका के बालों में, मेरे लफ्ज नहीं अटके हैं राजनीति की जालों में, मैने अपने अंदर सौ-सौ जलते सूरज पाले हैं, और सभी अंगारे अपने लफ्जों में भर डाले हैं, मैने कांटे चुन डाले फूलों का रास्ता छोड़ दिया, जकड़ रहा था जो मुझको उस नागपाश को तोड़ दिया, अब मैं जख्मी भारत के अंगों को गले लगाता हूं, कवि हूं लेकिन मैं शोलों की भाषा में चिल्लाता हूं l     एक शहीद सैनिक दिल्ली से क्या कहना च... »

तुम होते तो शायद

**तुम होते तो शायद और बात होती** सहर तो अब भी होती है, सूरज अब भी निकलता है फलक़ पर, मगर मैं सोचता हूं कि तुम होते तो शायद और बात होती, दिन तो अब भी कट जाता है रोजमर्रा की चीजें जुटाने में, मगर मैं सोचता हूं कि तुम होते तो शायद और बात होती ll शामें अब भी आती हैं मेरी दहलीज को छूने, अब भी ढलता हुआ सूरज मुझसे मिलकर जाता है, जुगनू अब भी भटकतें हैं मेरे बागीचे में, तारे अब भी रात भर यूं ही पहरे पे होते... »

स्मृति::इंजी. आनंद सागर

स्मृति::इंजी. आनंद सागर

**के जब तुम लौट कर आओ::स्मृति**   हौसला टूट चुका है, अब उम्मीद कहीं जख्मी बेजान मिले शायद, जब तुम लौट कर आओ तो सब वीरान मिले शायदll     वो बरगद का पेड़ जहां दोनों छुपकर मिला करते थे, वो बाग जहां सब फूल तेरी हंसी से खिला करते थे, वो खिड़की जहां से छुपकर तुम मुझे अक्सर देखा करती थी, वो गलियां जो हम दोनों की ऐसी शोख दिली पर मरती थीं, वो बरगद,वो गलियां, वो बाग बियाबान मिले शायद, के जब त... »

उड़ान भरने दो::आनंद सागर

उड़ान भरने दो::आनंद सागर

इस मंच से जुड़े सभी काबिल रचनाकारों के नाम- ****उड़ान भरने दो**** अपनी आगोश में ये आसमान भरने दो, ये नये परिन्दे हैं,इन्हें उड़ान भरने दो l ये जिन्दगी जीने का हुनर सीख जायेंगे, ज़रा सब्र रखो,इन्हें ख्वाबों में जान भरने दो l इनका हर हर्फ क़यामत तलक आबाद रहेगा, शर्त है कि इनके मुंह में इनकी ज़ुबान भरने दो l अभी तो चंद गज़ का फासला ही तय हुआ है, अपने कदमों में इन्हें सारा जहान भरने दो l मैं थक गया तो तेरे... »

मेरी गज़लों में तुझे

मेरी गज़लों में तुझे

**मेरी गज़लों में तुझे ढूढ रहे हैं ज़माने वाले**   मेरी गज़लों में तुझे ढूढ रहे हैं ज़माने वाले, अब कहां तुझको छुपाऊं छोड़ के जाने वाले l     कोई तो है जो इस खामोश उदासी का सबब है कहकर, सौ क़यास लगा लेते हैं लगाने वाले l     कल तुझे भूलने की कोशिश में यूं याद किया था मैने, कि रो पड़े थे तेरे खत वो पुराने वाले l     स्याह रातों में तेरी गज़लों की तड़पती आह सुनी है हमने, ... »

****जकड़ी है****

****जकड़ी है****

****जकड़ी है****   कुर्बानी से उपजी थी अब तस्वीरों में जकड़ी है, ऐ हिंद! तेरी आज़ादी सौ-सौ जंजीरों में जकड़ी है l     हर मुफलिस की भूख ने इसको अपनी कैद में रख्खा है, और यही पैसे वालों की जागीरों में जकड़ी है l     मां-बहनों पर दिन ढलते ही खौफ़ का साया रहता है, और हवस के भूखों की ये तासीरों में जकड़ी है l     भ्रष्टाचार का दानव इसको बरसों-बरस सताता है, ये संसद की उल... »

मेरा ये हुक्म है सांसों

ताज़ा गज़ल-   मेरा ये हुक्म है सांसों::Er Anand Sagar Pandey   मेरा ये हुक्म है सांसों कि एहतियात रहे, वो रहे ना रहे ता-उम्र उसकी बात रहे l     वो क़मर हो के मेरी ज़िन्दगी में रौशन हो, तो इल्तज़ा है कि मुकद्दर में मेरे रात रहे l     वो अपने क़ल्ब में गर मेरे लिये नफ़रत पाले, तो मेरे क़ल्ब में बस उसका इल्तिफ़ात रहे l     ज़ुस्तज़ू ये तो नहीं है कि मौत आये ना, आरज़ू है कि... »

ख्वाबों की फस्लें

एक पुरानी गज़ल-   **ख्वाबों की फसलें आज भी मैं बोया करता हूं::गज़ल**     हक़ीक़त जान ले कि रात भर मैं रोया करता हूं, बहुत हैं दाग दामन में जिन्हें मैं धोया करता हूं l     यक़ीनन बांझ हैं दिल की जमीं मैं मान लेता हूं, मगर ख्वाबों की फसलें आज भी मैं बोया करता हूं l     मेरा अरसा गुज़र गया तेरी यादों की चौखट पर, ना जाने क्यूं तेरी यादों में ऐसे खोया करता हूं l   &nbs... »

**ख्वाहिश रखता हूं**

****ख्वाहिश रखता हूं**** ना साथ की ख्वाहिश रखता हूं, ना प्यार की ख्वाहिश रखता हूं, मैं सिर्फ तुम्हारे चेहरे के दीदार की ख्वाहिश रखता हूं l हां मुझको तुम्हारी आंखों के ये खार कंटीले लगते हैं, मैं ताउम्र तुम्हारे होठों के गुलज़ार ख्वाहिश रखता हूं l कुछ टूटे हुए से तुम भी हो, कुछ हारा हुआ सा मैं भी हूं, मैं मान चुका हूं, तुमसे भी इकरार की ख्वाहिश रखता हूं l है दूर तलक़ चलना भी मुझको उम्र की टेढी राहों ... »

समझदार लोग धूल फांकते हैं

**समझदार लोग धूल फांकते हैं::आनन्द सागर**   जो अपने आगे दूसरों को कम में आंकते हैं, ऐसे ही समझदार लोग धूल फांकते हैं l     जिनसे अपने घर का हाल सम्भाला नहीं जाता, ऐसे ही जाहिल दूसरों के घर में झांकते हैं l     फितरत नहीं हमारी औरों में ऐब ढूंढना, तहज़ीब है हमारी हम खुद में ताकतें हैं l     सकूत समन्दर की गहराईयां कहता है, ये लोग कतरा भी नहीं और डींग हांकते हैं ll ... »

अभी भी मेरी आंखों में

कदम हैं अब भी हरकत में कहीं ठहरा नहीं हूं मैं, यक़ीनन टूट चुका हूं मगर बिखरा नहीं हूं मैं l अभी भी आईने में खुद को अक्सर ढूढ लेता हूं, सुनो ऐ गर्दिश-ए-हालात बस चेहरा नहीं हूं मैं l अभी भी मेरे दम से ही मेरी परवाज़ होती है, कभी रहम-ओ-करम पर आज तक फहरा नहीं हूं मैं l अभी भी मेरी आंखों में मुहब्बत डूब सकती है, तुझे ऐसा क्यूं लगता है कि अब गहरा नहीं हूं मैं l मेरी गर मौज निकली तो तेरा सब डूब जायेगा, मैं... »

मैं तुमको भूल जाऊंगा

पुरानी डायरियों से- **मैं तुमको भूल जाऊंगा** मेरी आंखों को ढलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा, मेरी सांसें निकलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l जमीं है एक मुद्दत से ज़ेहन में बर्फ यादों की, ज़रा इसको पिघलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l अभी भी रौशनी आती है रह-रह कर मेरे घर से, इसे पूरा तो जलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l बियाबां हो गया है दिल तुम्हारे छोड़ जाने से, कोई ख्वाहिश तो पलने दो मैं तुमको भूल जाऊंगा l लगी ... »

अब बात मेरी जान पे है

पुरानी डायरियों से- **अब बात मेरी जान पे है::गज़ल** जेहन में दर्द जो उठता है आसमान पे है, बात ये है कि अब बात मेरी जान पे है l खौफ़ लगता है कि सांसें ना अब दगा कर दें, खैर! ये बात ज़िन्दगी तेरे ईमान पे है l आस जिस्म की चौखट पे थक के बैठी है, क़रार बन के परिंदा कहीं उड़ान पे है l तमाम उम्र इक आहट का मुन्तज़िर रहा हूं मैं, चले आओ कि मेरी उम्र अब ढलान पे है l तू मेरे सिवा और किसी का नहीं हो सकता, ज़िन्दगी ... »

तेरे दर से उठे कदमों को

**तेरे दर से उठे कदमों को::गज़ल** तेरे दर से उठे कदमों को किस मंज़िल का पता दूंगा मैं, भटक जाऊंगा तेरी राह में और उम्र बिता दूंगा मैं l हां मगर अपने होठों पे तेरा ज़िक्र ना आने दूंगा, इस फसाने को अज़ल के लिये दिल में दबा दूंगा मैं l मैं वफ़ा के समन्दर का इक नायाब सा मोती हूं, तुझपे गर सज न सका तो अपनी हस्ती को मिटा दूंगा मैं l तेरे पहलू में कभी था तो ज़िन्दगी का गुमां था मुझको, अब तेरी यादों के शरारे मे... »

आजाद तेरी आजादी

भारत मां के अमर पुत्र “चन्द्रशेखर आजाद” की पुण्य तिथि पर मेरी एक तुच्छ सी रचना l रचना का भाव समझने के लिये पूरी रचना पढेl” **आजाद तेरी आज़ादी की अस्मत चौराहों पर लूटी जाती है** शत बार नमन ऐ हिंद पुत्र! शत बार तुम्हें अभिराम रहे, आज़ाद रहे ये हिंद तुम्हारा, आज़ाद तुम्हारा नाम रहे l याद बखूबी है मुझको कि तुमने क्या कुर्बान किया, आजाद थे तुम और अन्तिम क्षण तक आज़ादी का गान किया, बचपन, य... »

कहानी ले जाना

मेरे ख्वाबों के घर से हर एक रवानी ले जाना, बिछड़ रहे हो मुझसे तो मेरी ये निशानी ले जाना l     ले जाना सब ख्वाब- खिलौने, ले जाना तुम बचपन मेरा, और सुनो तुम जाते-जाते मेरी जवानी ले जाना l     कह देना कि पागल था वो जान लुटाता था मुझपर, मतलब की इस दुनिया में तुम मेरी कहानी ले जाना l     यादों की इक चादर में कुछ बातें मेरी रख लेना, सब तुमसे मुहब्बत कर लेंगे, थोड़ी नादानी ल... »

मैंने तय किया है

कतरा-कतरा करके समन्दर निकाल दूंगा मैं, मैने तय किया है अपनी आंखें खंगाल दूंगा मैं ll मेरे सदमों का सबब तुम हो ये राज राज रहेगा, कोई गर पूछ भी लेगा तो टाल दूंगा मैं ll मुहब्बत, रूसवाई, तन्हाई फ़िर नफ़रत और नाले, ना जाने इस दिल को और  कितने मलाल दूंगा मैं ll सुना है तुझमें डूबकर भी मौत आती है ऐ “सागर”! तो इस दिल को एक दिन तुझमें उछाल दूंगा मैं ll All rights reserved.          -Er Anand Sag... »

**बगावत कर लेंगे**

****बगावत कर लेंगे::गज़ल****   छुप के बैठे हैं कई अल्फाज़ मेरे होठों की तहों में, तुम कोई बात करोगे तो ये बेबात बगावत कर लेंगे l     बड़ी मुश्किल से मेरे हालात मेरे काबू में हुए हैं, तुम मेरा हाल ना पूछो वरना हालात बगावत कर लेंगे l     तुम्हें खयाल नहीं शायद कि तुम्हारे खयाल में अक्सर, ऐसा लगता है कि जैसे खयालात बगावत कर लेंगे l     मेरी आंखों का लहू पीकर जो मेरी र... »

जिन्दगी ठहरी रही

**ज़िन्दगी ठहरी रही और उम्र आगे चल पड़ी::गज़ल** (मध्यम बहर पर) उस ख्वाब की ताबीर जब शम्म-ए-फुगन में जल पड़ी, तब ज़िन्दगी ठहरी रही और उम्र आगे चल पड़ी l फ़िर कैफियत का ज़िक्र भी मुझको अजाबी हो गया, हर कैफियत की बात पर सोज-ए-निहां पिघल पड़ी l तू जब तलक पहलू में था ख्वाबों के दिल पर तख्त थे, हिज़रत हुई तुझसे तो यादें सांस-सांस ढल पड़ी l हर शय को मैंने मात दी दौर-ए-खुमारी के तहत, फ़िर उम्र ठंडी हो गयी और दास... »

रहने लगा है

हिफाजत कर ले मेरी आजकल कहने लगा है, ना जाने क्यूं मेरा दिल खौफ़ में रहने लगा है l     उम्र भर ख्वाब चुन-चुन कर जिसे तैयार किया था मैने, मेरे ख्वाबों का वो नन्हा सा घर ढहने लगा है l     ज़रा से दर्द पर भी चीखकर इज़हार करता था, मगर दिल आजकल सारे सितम सहने लगा है l     जिसको तमाम उम्र छुपा रखा था सीने में, वो दरिया अब मेरी आंखों में आ बहने लगा है ll     All rights... »

कैराना मुद्दा

ज्वलंत “कैराना” मुद्दे पर मेरी चंद पंक्तियां-     कहीं से आ बसी हैं दहशतें, ये घर मेरे ख्वाबों का वीराना ना हो जाये, खुदाया इल्तज़ा है तू हिफाज़त कर मेरे दिल की, कहीं बाखौफ़ ये नादान कैराना ना हो जाये l     सियासत कर रही हैं धड़कनें हर, सांस सहमी है, मेरा ये जिस्म कहीं साजिश का ठिकाना ना हो जाये l     मेरी अरवाह मुझको सुन अभी भी दहशतों को रोक ले, कहीं कश्मीर ... »

मैं मर जाऊं तुम्हारे बिन

**** तुम्हारे बिन****   कोई धड़कन ना कोई सांस तक पाऊं तुम्हारे बिन, तुम्ही कह दो कि आखिर अब कहां जाऊं तुम्हारे बिन l   खुदा से आज सजदे में यही फ़रियाद करता हूं, तुम्हारा आईंना हूं मैं बिखर जाऊं तुम्हारे बिन l   तुम्हारे साथ के एहसास ने थामे रखा है मुझको, अगर तुम छोड़ दोगे तो किधर जाऊं तुम्हारे बिन l   तुमसे इक कदम का फासला भी मुझसे कहता है, मैं बाकी क़्यूं रहूं, जां से गुजर जाऊं ... »

तुम्हारे नाम कर रहा हूं

खयाल-ए-दिल, सभी जज़्बात फ़िर से आम कर रहा हूं, मैं इक ताज़ा गज़ल फ़िर से तुम्हारे नाम कर रहा हूं l     तुम्हारे ही तसोव्वुर में गुज़रता है मेरा हर दिन, तुम्हारे ही तसोव्वुर में मैं हर इक शाम कर रहा हूं l     तुम्हारे नाम से आये सुबह तुम्हारे नाम से ढलती है शाम, तुम्हारे नाम पर मैं ज़िन्दगी तमाम कर रहा हूं I     तुम से शुरू तुम पर खतम आगाज़ से अंजाम तक, रफाक़त में तुम्हारी उम्र... »

मेरी आंखों से रिस-रिस कर

मेरी आंखों से रिस-रिस कर कोई तूफ़ान कहता है, सताओ यूं ना तुम मुझको ऐ मेरी जान कहता है l     तुम्हें मैं याद करने की तलब में इस कदर खोया, कि अक्सर अब मुझे चेहरा मेरा अंजान कहता है l     तुम्हारे ख्वाब में अक्सर मैं इतना डूब जाता हूं, कि बच्चों सा मेरा दिल भी मुझे नादान कहता है l     अपने उजड़े घर की ओर जब भी देखता हूं मैं, मेरा घर मुझपे हंसता है मुझे वीरान कहता है l &nb... »

पांव भर चुके हैं छालों से

पांव भर चुके हैं छालों से, है दिल जख्मी पड़ा मलालों से l     भरी आंखों में बक़रारी है, जेहन बेचैन है सवालों से l     दिल में अफसुर्दगी का आलम है, अश्क चीखते हैं नालों से l     एक बिजली सी जबसे कौंधी है, मुझको नफ़रत है इन उजालों से l     बस इतने ही हम बाकी  बचे है, जैसे घर भर गया हो जालों से l     कैसे उस भूख को मिटाएं अब, जो भूख पैदा हुई निवालों से l... »

फिर से मुहब्बत हो गयी

ना चाहते हुए भी फ़िर से हिमाक़त हो गई, कल फ़िर उसे देखा,फ़िर से मुहब्बत हो गई l     वही वो झील सी आंखें,वही बादल से वो गेसू, बलखाती कमर उसकी फ़िर से क़यामत हो गई l     कुछ इस अदा से वो मेरे आगे से गुजरी कि, मेरी सांसों को उसकी ज़रूरत हो गई l     इरादा कर लिया था कि मैं उसको भूल जाऊंगा, मगर वो सामने आई तो खुद से बगावत हो गई l     मैं क्या ज़रा सा उसकी याद में खो गया,... »

**रहने दे**

**रहने दे::गज़ल**   यही चाहत का है दस्तूर तो दस्तूर रहने दे, मुझे बेबस ही रहने दे मुझे मजबूर रहने दे l     तुझे जब याद करता हूं तो दुनिया भूल जाता हूं, तेरी नश्तर सी यादों को तू मुझसे दूर रहने दे l     तू मेरा हो नहीं पाया मुझे ये ग़म नहीं होता, मै अब भी हूं तेरा तलबी, मुझे गुरूर रहने दे l     ये जब भी साथ होते हैं तो दिल बेचैन होता है, मेरे ख्वाबों को यूं टूटा औ च... »

**बदला नहीं है वो**

वही तल्खियत लहज़े में, वही कशिश अदाओं में, आज फ़िर यही लगा कि बदला नहीं है वो l     उसको भी मयस्सर हैं मेरे हिज़्र के खसारे, मेरे उन्स से भी अबतक निकला नहीं है वो l     चश्म-ओ-चिराग बुझ गये, मेरी चश्म है अब आबसार, उसका आब-ए-तल्ख इज़्तिरार, ढला नहीं है वो l     कुर्बत है शरारों की उसे मेरी ही मानिन्द लेकिन, ये बात यूं निहां है कि पिघला नहीं है वो l     वो आग है क... »