बेरंग सी गोली को रंगीन बनाना है रूठे हुए अपनों को दोबारा मनाना है डेविड अकरम और गुरमीत लेकर सबको साथ सुजीत होगी पिचकारी से बौछार आज मनाएंगे त्योहार। गुजिया पापड़ और मठरी से स्वाद […]
बेरंग सी गोली को रंगीन बनाना है रूठे हुए अपनों को दोबारा मनाना है डेविड अकरम और गुरमीत लेकर सबको साथ सुजीत होगी पिचकारी से बौछार आज मनाएंगे त्योहार। गुजिया पापड़ और मठरी से स्वाद […]
मुद्दतों बाद वह घर आए हैं दिल तोड़ने के बाद पहली बार शहर आए हैं…….
एक उनके खातिर हमने मोहब्बत का आशियाना बनाया था वो आए और ढहा कर चले गए….
ऐ स्त्री तू खुश मत हो! यह सम्मान का वक्त गुजर जाएगा कल से हर रोज तुझे परखा जाएगा……….
नारी तू अवतारी है देखने में तो एक है प्रतिक्षण रखती रूप अनेक है हर सांचे में ढल जाती है पल मे मां पत्नी बहन बेटी बन जाती है। तू त्याग की है मूर्ति समर्पण […]
तू मान है अभिमान है इस जग का पृतिमान बड़ी नेमतों से पृकृति ने संवारा है एक तुझे रच विधाता ने खुद को धरती पर उतारा है।
अब तो दौर-ए -नफ़रत भी गुजर गया साहब मोहब्बत का जमाना तो हमे याद भी नहीं………..
बड़ी शिद्ददत से लगे है वो हमे हराने मे हमे भी अब अंजाम का इंतजार है……….
चल साथी हाथ बढ़ाएं ,मिलकर सबको पार लगाएं क्या हुआ जो कोई छोटा क्या हुआ जो कोई रूठा हम अपना कर्तव्य निभाएं मिलकर सबको पार लगाएं। कर्म पथ पर चलने वाले मन में बैर न […]
गहराई का आलम न पूछो दोस्त ! सहारा तिनके को है या तिनके का सहारा किसी को न मालूम………
देख लिया जमाने के तसव्वुर को होठों पर मुस्कान और दिल में खंजर लिए घूमते हैं……..
नजर को भी नजर लग जाएगी उसकी नुमाइश इतना भी ना करो…….
क्या हुआ हम बेईमानों की बस्ती में है हमने अपना ईमान कहां भेजा है अभी तक।
चलो होली मनाते हैं सड़कों से पत्थर हटा कुछ गुलाल उड़ाते हैं चलो होली मनाते हैं। महरूम है बरसों से कोई बस्ती होली में वहां जाकर गुझिया पापड़ बांट आते हैं चलो होली मनाते हैं […]
अपनी गलतियों का किस्सा ना हर बार दोहराएंगे, कह दिया अलविदा तुम्हें अब शायद ही लौट कर आएंगे ।
ऐ पुरूष सुन! स्त्री हूं पतंग नहीं कि जिसकी डोर सदैव तुम्हारे हाथ में रहेगी…….
जाकर कहदो उनसे अपनी काबिलियत के चर्चे कहीं और सुनाए जाके अभी हम थोड़े नाकाम से हैं ………
रंग भर लीजिए जिंदगी में क्योंकि रंग उड़ाने के लिए लोग हैं थोड़ा हंस लीजिए जिंदगी में क्योंकि रुलाने के लिए लोग हैं आजाद हो जाइए जिंदगी में क्योंकि कैद करने के लिए लोग हैं […]
वजह कुछ भी न थी हमारे जुदा होने की एक तो तू बेवफा थी, और मेरा इरादा भी अब वफा करने का नहीं था ।
दिलों का खेल मत खेलो न कोई इसमें जीता है। सभी बदनाम होते हैं, दर्द-ए-जाम पीते हैं मुनासिब अब यही होगा कोई दिल को लगाए ना, दिलों की दिल्लगी करके खुद को यूं सताए ना।
सुना है साथ छोड़कर जाने वाले आज अकेले हैं, कमबख्त मुझ में भी अब दोबारा धोखा खाने की हिम्मत कहां है……..
बेहिसाब दर्द देकर मेरी रूह को वो मेरे ज़ख्मों पर मरहम लगाने आया है उससे पूछो मरहम ही है नमक छिड़कने तो नही आया है।
सड़के फैली, नदियां सिमटी क्या अच्छा संदेश गया घट गई सर्दी ,बढ़ गई गर्मी और भंवर में देश गया अपने कर्तव्यों से हटकर अपना हित ही सोंचा है चंद पैसों के खातिर भविष्य देश का […]
दर्द को दवा समझ लिया जबसे पीड़ा थोड़ी बुझी बुझी सी है
मत याद कर अपनीअसफलता को चल नई इबारत लिखते हैं बहुत मिल चुकीं सांत्वना अब कुछ मुबारकबाद इकट्ठी करते हैं।
उम्मीदों की मंज़िल है समझौतों का रास्ता है नाराज़ हो रहे अपने हैं कुछ बुने कुछ टूटे सपने हैं अंधेरे का वास्ता है, उजाले का रास्ता है फिर भी, हालात बदल जायेंगे जज़्बात संभल जायेंगे […]
इससे अच्छा तो गुमनाम ही अच्छे थे नामवालों से मिलकर बदनाम हो गए…….
उनसे कहदो थोड़ी कम तारीफ़ करें हमारी हम गुमनाम शहर से अभी अभी निकलकर आए हैं……..
मिले हैं विरासत में आंसू मुझे पता न चला कि दोस्त कैसे बने उनका सैलाब है आशियां मेरा हंसी से नाता न मेरा रहा। जब पहुंचे मंज़िल से आगे कभी रहे याद दोस्ती सहारा बनी […]
अपनी मोहब्बत को अपने लिए भी बचा कर रखिए साहेब शाम- ए- जिंदगी में बड़ी काम आयेगी।
वो मयस्सर नहीं हुए जिंदगी में तो हम मौत तक उनका इंतज़ार करते रहे।।।
वो मयस्सर नहीं हुए जिंदगी में तो हम मौत तक उनका इंतज़ार करते रहे।।।
मेरे ख़्वाबों को बेचकर अच्छा किया जो तुमने अपनी दुकान सजा ली
हर रोज़ बदलता है वो अपनी फितरत को कमबख्त सारे रंग एक जैसे ही हैं उसकी फितरत के……..
जब कर्मपथ की मंज़िल को दो साथ चले दो साथ बढ़े कोई जीत गया कोई हार गया जो जीत गया उसने नाम बुलंद किया हारा उसने भी तो खूब प्रबंध किया त्याग समर्पण के बाद […]
प्यारी गौरैया! आज तुम्हें इतने दिनों बाद अपनी छत पर देख अपने बचपन के दिन याद आ गए ,तब तुम संख्या में हमसे बहुत ज्यादा थीं, आज हम हैं ज्यादा नहीं पर कुछ पेड़ हैं […]
गणों को नाज़ है कि वो तंत्र का हिस्सा हैं क्या पता उन्हें कि वो षड़यंत्र का हिस्सा हैं ये जो श्वेत वस्त्र धारी हैं कहलाते लोकतंत्र के पुजारी हैं असल में चुनावी वक्त के […]
गणों को नाज़ है कि वो तंत्र का हिस्सा हैं क्या पता उन्हें कि वो षड़यंत्र का हिस्सा हैं ये जो श्वेत वस्त्र धारी हैं कहलाते लोकतंत्र के पुजारी हैं असल में चुनावी वक्त के […]
मेरे प्यारे नए साल क्या इस बार मै पाऊंगी अपने सपनों की दुकान जहां हर ख्वाब रखा होगा सलीके से जहां होगी जगह मेरे नए ख्वाबों की जहां होगा सम्मान मेरे आधे अधूरे कम पूरे […]
क्यों झर-झर बहती आंखों में यूं आंसू बनकर आते हो, और सूखी पत्ती जैसे दूर चले भी जाते हो एहसास मेरा है नहीं तुम्हें क्या यही जताते रहते हो और चलने वाली हवा में पानी […]
सारा घर दे देना पापा कोना एक बचाए रखना। हाथों को हाथ सौंपने देना उंगली एक छिपाए रखना यादों की बगिया में घर की एक छोटा फूल नाम का मेरे पानी देना- ना देना थोड़ी […]
माना कि हूं अकेली, सहारा न चाहिए माना कि मौन हूं मै, इशारा न चाहिए। मेरी ख़ामोशी को तुम क्या समझोगे तुम तो शब्दों को जानते हो तुम्हारा नाम ‘जमाना ‘…. है तुम केवल कामयाबी […]
पत्नी के लिए मां बाप को डांटने वाले तुम होते कौन हो उन पर रौब झाड़ने वाले उनके समर्पण को माना भुला दिया इतना अभिमान कि उनको रुला दिया उनके एहसानो को नकारने वाले तुम […]
जन्मे थे दोनों साथ साथ फिर भेद आ गया क्यों मन मे। एक बेटा है एक बेटी है सुन शोक छा गया क्यों घर में। भईया की बलैया की खातिर सब आए थे बारी बारी […]
हर रोज़ उम्मीदों का बोझ लेकर बाबा खेतों तक जाते हैं। चिंता की लकीरें, सूखी कुछ- कुछ गीली आंखे लेकर लौट आते हैं। पता है छिपाते हैं कुछ, चाह कर भी ना बता पाते हैं […]
कभी न भाये गुरु जी तुम, वो मैथ की मिस्ट्री,वो बोरिंग केमिस्ट्री वो छडी की मार वो डांट वो पुकार खड़े कर देना बेंच पर नज़रे रखने को कहना अपने लेंस पर कितने ही बार […]
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