Jalte hue abr ko zehar se bacha lo Fiza ye meharban, kal rahe na rahe Aab ko tezab ke kahar se bacha lo Dariya ki fariyad, kal rahe na rahe… Azadi ka saaz bulandi se […]
Jalte hue abr ko zehar se bacha lo Fiza ye meharban, kal rahe na rahe Aab ko tezab ke kahar se bacha lo Dariya ki fariyad, kal rahe na rahe… Azadi ka saaz bulandi se […]
…..………………….Just A Few Lines……………….. उसकी खुशबू से महकी हैं सारी फ़िज़ाये गुलों के रंग भी यूँ फीके पड़ जाए न मय न मय-खाना ये जादू कर पाए उसका नशा यूँ, कोई क्या ही कर पाए…. […]
बेशक़ सहमा ज़रूर, पर कभी टूटा नही, तेरे लाख डराने पे, कभी रूठा नही, तेरा इतरांना भी अंदाज़-ए-हसीन ज़िंदगी, पर मेरे हौंसलो का साथ अभी छूटा नही। – पीयूष निर्वाण
हरिरूपम उठ जाग अलौकिक ये प्रभात, अम्बर में किरणों का प्रकाश, जो भेद सके कोई इनकी जात, तोह करे समुच्चय मानव की बात । विष-व्यंग टीस के सहा चला, मलमार्ग में देह को […]
Note : इक प्रेमिका इश्क़ मैं धोका खाये जज़्बातों को व्यक्त करती हुई । बदरंगा इश्क़ रंगना था तेरे रंग में, बदरंगा करके छोड़ गए, सदियो के उस वादे को, पल भर में खट्ट से तोड़ गए , जब आये थे अपना बनाने, तब लफ़्ज़ों का पिटारा रहा, उन चिकनी-चुपड़ी बातों ने, मुझको अपना सितारा कहा , वोह डेढ़ चाल शतरंज की थी, इतना तोह मैंने समझ लिया, पर न जाने कब इस रानी को, इक प्यादे ने यूं झपट लिया , वो कहती मेरी सखी-सहेली, न पड फुसलाती चालों में, वो तन्हाई को गोद चलेगा, नोंच के तेरे गालों पे, बेपरवाही ज़ेहन में भर के, सलाहों से मुख मोड़ लिया, रंगना था तेरे रंग में, बदरंगा करके छोड़ दिया , वो रात फ़ोन पे बतलाना, वो बाल मेरे यूं सहलाना, वो नमी भरी इन आँखों को, […]
कहानी जो रक्त न दे सको, तो यह जवानी दे दो… और वह भी तुमको प्यारी हो, तो ज़ुबान ही दे दो… दलदल मैं फसा यह देश, है सहारे की ज़रुरत, ज़रा हाथ लगा कर नवयुग को, प्रेरित करती कहानी दे दो…। – पीयूष निर्वाण
Note: एक छोटी सी कविता यह दर्शाते हुए की किस तरह एक भीड़ दंगो का रूप ले लेती है और कौन उसे इतना भड़काता है बर्बरता वोह बोले हमसे वार करो, न चुप बैठो प्रहार करो, जो औरत, बूड़े, बच्चे आये, टूकड़े तुम हज़ार करो । आतंकी रथ सवार करो, और मृत्यु का प्रचार करो, यमलोक भी थर-थर कांप उठे, ऐसा भीषण नरसंहार करो । असुरो को त्यार करो, और मानवता की हार करो, धरती का धड़ चीर-फाड़ के, नर्क का तुम आविष्कार करो । विवेक का भहिष्कार करो बर्बरता का विस्तार करो सत्ता पर हम जड़े जमा लें, सपना तुम साकार करो । -पियूष निर्वाण
Aaj kehta woh naujawan, Anek hai sapne khone ko, Yeh desh kabhi na badlega, Humko toh bus tum sone do ! Jo soye hum toh sapne bunenge, Chaadar taane, bistar bhigone do, Jis rakt […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.