rajesh arman, Author at Saavan - Page 2 of 11's Posts

वक़्त का तमाचा

वक़्त का तमाचा हाथ क्या पूछे »

वज़ूद तेरा बूँद सा

वज़ूद तेरा बूँद सा शामिल है मगर समुंदर में »

गिर के संभले तो मगर

गिर के संभले तो मगर संभले मगर गिर गिर के »

बगैर दुनिया के हम नहीं है

बगैर दुनिया के हम नहीं है दुनिया कौन सा अकेले चलती है »

फिर वहीँ फ़रियाद

फिर वहीँ फ़रियाद कौन रखेगा याद सिरहाने बैठी रही सिसकियाँ अपनी आबाद »

बिन तेरे कमीं तो थी

बिन तेरे कमीं तो थी आँख में कुछ नमी तो थी युँ तो सांसें चलती रही मगर सांस कुछ देर को धमी तो थी »

किसकी हसरत कैसी हसरत

किसकी हसरत कैसी हसरत अपने तो दुखों को मिली बरकत उसे गुनाहगार कैसे कह दो सब थी अपनी ही वैसी हरकत »

जिल्द बिन किताब का

जिल्द बिन किताब का फूल बिन हिज़ाब का रातों का नहीं ख्वाब हूँ आफताब का »

न सही गम सही

न सही गम सही खुद बन मरहम सही »

सीने में दबे अरमान

सीने में दबे अरमान आँखों में झलक जाते है आँखों में छुपे अरमान ख्वाब बनके ढलक जाते है »

घर से निकलोगे तो जानोगे

घर से निकलोगे  तो जानोगे चांदनी का वज़ूद क्या है »

कहीं पर लब मचल गए

कहीं पर  लब मचल गए कही मतलब मचल गए इंसा की हसरतों का क्या जब देखो तब मचल गए     राजेश ‘अरमान’ »

कोई पीर न था

कोई पीर न था कोई राहगीर न था बहता हुआ नीर न था  ज़िंदगी का फ़क़ीर न था बस कुछ ढूंढती  है आँखें   ज़माने की कोई तस्वीर न था »

माना वो सिकन्दर था

माना वो सिकन्दर था उसका भी मुक़द्दर था हमने अपने हाथों से उजाड़ा कुछ अपने भी तो अंदर था »

मत रोको आंसुओं को

मत रोको आंसुओं को कहीं बहता पानी रोक जाता है »

ज़ख्म को गिनते क्यों हो

ज़ख्म को गिनते क्यों हो गोया अब इन्तहा हो गई हो »

कौन पी सका समुंदर को

कौन पी सका समुंदर को लहरे ही दर्द सहती है »

मैखाने की बातें मैखाने

मैखाने की बातें मैखाने तक रहने दो आंसुओं के सैलाब ही समुंदर होते है »

कोरे कागज़ पे लिखी

कोरे कागज़ पे लिखी कोई दास्तां नहीं वज़ूद अपना बुलंद ज़माने से वास्ता नहीं »

उन्हें ज़िद थी न हारने की

उन्हें ज़िद थी न हारने की कारण बन गई हार का »

घर के अंदर घर नहीं मिलता

घर के अंदर घर नहीं मिलता कोई सुखनवर नहीं मिलता »

बिक गया वो शक्स भी

बिक गया वो शक्स भी जिसे हम सौदागर समझते रहे »

न सूरत में न सीरत में

न सूरत में न सीरत में सब कुछ मन की जीनत में »

कहाँ गई वो हवाएं

कहाँ गई वो हवाएं कहाँ गई वो फ़िज़ाएं बिखर गई अब वफ़ाएं »

गुमशुदा इंसा

गुमशुदा इंसा इस्तहार कहाँ दे »

हर किताब की कहानी

हर किताब की कहानी पन्नो की मेहरबानी »

सब कुछ वैसा ही

सब कुछ वैसा ही सब कुछ पैसा ही »

वीराना अपना

वीराना अपना वीराना बेगाना वीराने को कौन जाना »

चलो फिर बांट ले

चलो फिर बांट ले गम को फेक डाले खुशिओं को छांट ले »

मन आतुर नयी सुबह को

मन आतुर नयी सुबह को सुबह आदत से मज़बूर »

वफ़ा क्यों ढूँढ़ते हो

वफ़ा क्यों ढूँढ़ते हो गुमी हुई है गुमी रहेगी »

दर्द के पंजों में

दर्द के पंजों में दर्द है »

क्या लिखता है

क्या लिखता है सब दिखता है इंसा बिकता है »

उनकी तकलीफ देखी न गई

उनकी तकलीफ देखी न गई जब तकलीफ देखी न गई वजह भी पूछी न गई कुछ निशान खामोश है »

वो जलते क्यों है

वो जलते क्यों है क्या शमा से रिश्ता है »

कोई अजनबी

कोई अजनबी छोड़ जाता आवाज़ दबी »

किसकी कितनी उम्र वो जाने

किसकी कितनी उम्र वो जाने हम तो ज़िंदगी का हिसाब नहीं करते »

जो उसकी तमन्ना

जो उसकी तमन्ना बाकि फिर क्या करना »

कोई रहबर नहीं

कोई रहबर नहीं कोई सहर नहीं अपनी भी खबर नहीं »

नीले सपनो में

नीले  सपनो में काले से है शुमार अपनों में »

उसने की थी शुरू लड़ाई

उसने की थी शुरू लड़ाई मात मैंने भी कभी न खाई »

मैंने जीतने की खवाइश की

मैंने जीतने की खवाइश की हार खुदबखुद शर्मा गई »

वक़्त पकड़ता लम्हा

वक़्त पकड़ता लम्हा इस दुनिया में हर इंसा तनहा »

जंग इंसानियत की

जंग इंसानियत की इंसान हो रहे लुप्त »

उसके क़दमों की चाप

उसके क़दमों की चाप सनाटों को रौंद गई चुपचाप »

नफरतें बेहिसाब

नफरतें बेहिसाब पहने नक़ाब निकलते जनाब »

काश कोई पिंजरा ऐसा होता

काश कोई पिंजरा ऐसा होता जो आसमा में टंगा होता »

कौन आया

कौन आया कौन गया यही दुनिया »

दिखते तो अब जो कभी

दिखते तो अब जो कभी दिखाई देते पर  दिखने जैसे नहीं »

कुछ तो था खास

कुछ तो था खास कैसे कोई भूले था वो ख़ास »

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