मैखाने की बातें मैखाने तक रहने दो
आंसुओं के सैलाब ही समुंदर होते है
Author: rajesh arman
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मैखाने की बातें मैखाने
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कोरे कागज़ पे लिखी
कोरे कागज़ पे लिखी
कोई दास्तां नहीं
वज़ूद अपना बुलंद
ज़माने से वास्ता नहीं -
उन्हें ज़िद थी न हारने की
उन्हें ज़िद थी न हारने की
कारण बन गई हार का -
घर के अंदर घर नहीं मिलता
घर के अंदर घर नहीं मिलता
कोई सुखनवर नहीं मिलता -
बिक गया वो शक्स भी
बिक गया वो शक्स भी
जिसे हम सौदागर समझते रहे -
न सूरत में न सीरत में
न सूरत में न सीरत में
सब कुछ मन की जीनत में -
कहाँ गई वो हवाएं
कहाँ गई वो हवाएं
कहाँ गई वो फ़िज़ाएं
बिखर गई अब वफ़ाएं -
गुमशुदा इंसा
गुमशुदा इंसा
इस्तहार कहाँ दे -
हर किताब की कहानी
हर किताब की कहानी
पन्नो की मेहरबानी -
सब कुछ वैसा ही
सब कुछ वैसा ही
सब कुछ पैसा ही -
वीराना अपना
वीराना अपना
वीराना बेगाना
वीराने को कौन जाना -
चलो फिर बांट ले
चलो फिर बांट ले
गम को फेक डाले
खुशिओं को छांट ले -
मन आतुर नयी सुबह को
मन आतुर नयी सुबह को
सुबह आदत से मज़बूर -
वफ़ा क्यों ढूँढ़ते हो
वफ़ा क्यों ढूँढ़ते हो
गुमी हुई है गुमी रहेगी -
दर्द के पंजों में
दर्द के पंजों में
दर्द है -
क्या लिखता है
क्या लिखता है
सब दिखता है
इंसा बिकता है -
उनकी तकलीफ देखी न गई
उनकी तकलीफ देखी न गई
जब तकलीफ देखी न गई
वजह भी पूछी न गई
कुछ निशान खामोश है -
वो जलते क्यों है
वो जलते क्यों है
क्या शमा से रिश्ता है -
कोई अजनबी
कोई अजनबी
छोड़ जाता
आवाज़ दबी -
किसकी कितनी उम्र वो जाने
किसकी कितनी उम्र वो जाने
हम तो ज़िंदगी का हिसाब नहीं करते -
जो उसकी तमन्ना
जो उसकी तमन्ना
बाकि फिर क्या करना -
कोई रहबर नहीं
कोई रहबर नहीं
कोई सहर नहीं
अपनी भी खबर नहीं -
नीले सपनो में
नीले सपनो में
काले से
है शुमार अपनों में -
उसने की थी शुरू लड़ाई
उसने की थी शुरू लड़ाई
मात मैंने भी कभी न खाई -
मैंने जीतने की खवाइश की
मैंने जीतने की खवाइश की
हार खुदबखुद शर्मा गई -
वक़्त पकड़ता लम्हा
वक़्त पकड़ता लम्हा
इस दुनिया में
हर इंसा तनहा -
जंग इंसानियत की
जंग इंसानियत की
इंसान हो रहे लुप्त -
उसके क़दमों की चाप
उसके क़दमों की चाप
सनाटों को रौंद गई चुपचाप -
नफरतें बेहिसाब
नफरतें बेहिसाब
पहने नक़ाब
निकलते जनाब -
काश कोई पिंजरा ऐसा होता
काश कोई पिंजरा ऐसा होता
जो आसमा में टंगा होता -
कौन आया
कौन आया
कौन गया
यही दुनिया -
दिखते तो अब जो कभी
दिखते तो अब जो कभी
दिखाई देते पर दिखने जैसे नहीं -
कुछ तो था खास
कुछ तो था खास
कैसे कोई भूले
था वो ख़ास -
कुछ गहने
कुछ गहने
मैंने देखे
सपनों ने पहने -
अपनी हर लिबास रखना संभाल
अपनी हर लिबास रखना संभाल
कब कैसी जरूरत आ जाएँ -
अंदर जिस्म में बैठा
अंदर जिस्म में बैठा
मुझ जैसा मेरा दुश्मन -
कितना गहरा
कितना गहरा
रिश्तों से
समुंदर में सहरा -
न तुम बदले न
न तुम बदले न मैं बदला
वक़्त बदलते दोनों ने देखा
सिलसिले बस युँ ही चलते रहे
फासलों को बदलते हमने देखा
राजेश’अरमान’ -
न हो गर हमनवां
न हो गर हमनवां कोई बात नहीं
गर हो तो कोई बात जरूर हो -
हर राह पर कारवां तो मिला
हर राह पर कारवां तो मिला
मंज़िलों का ठिकाना न मिला -
तेरी आँखों में जब भी देखा
तेरी आँखों में जब भी देखा
कोई ख्वाब सा दबा देखा -
जुस्तजू इलज़ाम बन गई
जुस्तजू इलज़ाम बन गई
जुस्तजू जो खुद को खोने की थी -
कोई किनारा
कोई किनारा
निकला किनारे से
लहरें मचलना भूल गई -
ढेर पे राख के
ढेर पे राख के
जुस्तजू जीस्त की
मौत मिली जीस्त में -
सूनी डगर
सूनी डगर
पंछी उड़ते
सूना सा सफर -
कोई ख्वाब
कोई ख्वाब
कही से
डूबता आफताब -
रेत का घरोंदा
रेत का घरोंदा
वक़्त ने बनाया
वक़्त ने रौंदा -
बिलखते मन
बिलखते मन
तपते तन
सुलगते जीवन -
एक प्रश्नचिन्ह जीवन
एक प्रश्नचिन्ह जीवन
मौत प्रश्नचिन्ह
चिंतन किस का ? -
रहबर वो मेरे थे मगर
रहबर वो मेरे थे मगर
मंज़िल से मगर अंजान थे