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Saavan

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Author: rajesh arman

हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '
Posted on March 29, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कुछ गहने

कुछ गहने मैंने देखे सपनों ने पहने

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Posted on March 29, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

अपनी हर लिबास रखना संभाल

अपनी हर लिबास रखना संभाल कब कैसी जरूरत आ जाएँ  

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Posted on March 29, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

अंदर जिस्म में बैठा

अंदर जिस्म  में बैठा मुझ जैसा मेरा दुश्मन

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Posted on March 29, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कितना गहरा

कितना गहरा रिश्तों से समुंदर में सहरा

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Posted on March 29, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

न तुम बदले न

न तुम बदले न मैं बदला वक़्त बदलते दोनों ने देखा सिलसिले बस युँ ही चलते रहे फासलों को बदलते हमने देखा         राजेश’अरमान’

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Posted on March 29, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

न हो गर हमनवां

न हो गर हमनवां कोई बात नहीं गर हो तो कोई बात जरूर हो

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Posted on March 29, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

हर राह पर कारवां तो मिला

हर  राह पर कारवां तो मिला मंज़िलों का ठिकाना न मिला

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Posted on March 29, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

तेरी आँखों में जब भी देखा

तेरी आँखों में जब भी देखा कोई ख्वाब सा दबा देखा

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Posted on March 29, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

जुस्तजू इलज़ाम बन गई

जुस्तजू इलज़ाम बन गई जुस्तजू जो खुद को खोने की थी

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Posted on March 29, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कोई किनारा

कोई किनारा निकला किनारे से लहरें मचलना भूल गई

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Posted on March 29, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

ढेर पे राख के

ढेर पे राख के जुस्तजू जीस्त की मौत मिली जीस्त में

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

सूनी डगर

सूनी डगर पंछी उड़ते सूना सा सफर

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कोई ख्वाब

कोई ख्वाब कही से डूबता आफताब

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

रेत का घरोंदा

रेत का घरोंदा वक़्त ने बनाया वक़्त ने रौंदा

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

बिलखते मन

बिलखते मन तपते तन सुलगते जीवन

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

एक प्रश्नचिन्ह जीवन

एक प्रश्नचिन्ह जीवन मौत प्रश्नचिन्ह चिंतन किस का ?

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

रहबर वो मेरे थे मगर

रहबर वो मेरे थे मगर मंज़िल से मगर अंजान थे

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

लो फिर तस्सलिओं का मौसम है

लो फिर तस्सलिओं का मौसम है अपने लिबास को बदल डालो

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कोई साया भी न लिपटा ऐसे

कोई साया भी न लिपटा ऐसे जैसे लिपटी तेरी तन्हाई

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

तेरे गम की क्या उम्र रही

तेरे गम की क्या उम्र रही दुआओं ने उम्र बख्शी हो जैसे

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

जुर्म करने की आदत कुछ ऐसी थी

जुर्म करने की आदत कुछ ऐसी थी खुद की सजा पर किताब लिख रख दी

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कारवां से हुआ जब इश्क़

कारवां से हुआ जब इश्क़ मंज़िलें नापाक लगी

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

तेरे सज़दे किये कुछ ऐसे

तेरे सज़दे किये कुछ ऐसे हर ज़ुल्म का इक़बाल किया

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

लम्हे टूटे बिखरे से

लम्हे टूटे बिखरे से जोड़ती मगर ज़िंदगी को

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कोई ऐसा चारागर होता

कोई ऐसा चारागर होता जो कहने को सहर होता

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

चुप सी बंधी ख़ामोशी

चुप सी बंधी ख़ामोशी राज़ छुपाएँ चीखों के

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

एक दस्तक पहचानी सी

एक दस्तक पहचानी सी गूँज गई सन्नाटे में

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

खामोश पन्नो में लिखी दास्तां

खामोश पन्नो में लिखी दास्तां बिखरी चीख के साथ

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कहीं से आती है सदा

कहीं से आती है सदा जहाँ आवाज़ ने दम तोडा

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

गर्म पैरहन में लिपटे

गर्म पैरहन  में लिपटे चांदनी से ख्वाब

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

ज़िंदगी एक तमाशा

ज़िंदगी एक तमाशा वक़्त एक मदारी

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

उसकी हसरतें टूटे खिलौनों सी

उसकी हसरतें टूटे खिलौनों सी ताउम्र उजरी कुछ बचपन सी

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

चलो उस बीज की तलाश में

चलो उस बीज की तलाश में पौध जिससे कोई नया उगे

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

वक़्त लिखता रहा कागज़ पे

वक़्त लिखता रहा कागज़ पे हम उसे मोड़ के बैठे रहे

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

पिघले ख्वाब पिघले ही रहे

पिघले ख्वाब पिघले ही रहे वक़्त कुछ गर्म रहा ऐसा       

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

मैं जानता था सच

मैं जानता था सच तेरी खातिर अजनबी रहा

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कभी तो मौसमों सा न बदलों

कभी तो मौसमों सा न बदलों हर मौसम में फिर लिबास बदलना पड़ता है

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कल भी तन्हाई कुछ ऐसी थी

कल भी तन्हाई कुछ ऐसी थी लफ्जों में कोई फासला न था     

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कल फिर आएगा कल

कल  फिर आएगा कल कल फिर निकल जायेगा कल     राजेश’अरमान’

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

खुद भी कभी दिखाई न दिए

खुद भी कभी दिखाई न  दिए   आईने का खौफ ही कुछ ऐसा था  राजेश’अरमान’

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

थक के सो गए तारे भी

थक के सो गए तारे भी मेरी नींद को इंतज़ार ही कुछ ऐसा था  राजेश’अरमान’

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

न वक़्त बेवफा

न वक़्त बेवफा न ज़माना बस फासलों ने वफ़ा न की  राजेश’अरमान’

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Posted on March 28, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

तेरी उल्फत से

तेरी उल्फत से वाकिफ था मगर लुत्फ़ बेवफाई का उठाने निकला राजेश’अरमान’

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Posted on March 21, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

उसने ख़ामोशी को भी चीखते

उसने  ख़ामोशी को  भी चीखते देखा   रंजिश हुई जब क़ल्ब के शोर से                  राजेश’अरमान’

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Posted on March 21, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

मेरी कलम में तो कोई बात न थी

मेरी   कलम में  तो कोई बात न थी तेरे तजुर्बों ने मुझे कलमकार बना दिया                      राजेश’अरमान’

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Posted on March 21, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

वफायें कब हुई किसी को हासिल

वफायें कब हुई किसी को हासिल महज एक लफ्ज  है उम्मीदों के आसपास                     राजेश’अरमान’

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Posted on March 21, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

समुन्दर में भी प्यासा ही रहा

समुन्दर में भी प्यासा ही रहा ज्यों ख्वाब सेहरा में देखा समुन्दर का                   राजेश’अरमान’

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Posted on March 21, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

किसी रंजिश से क्या हासिल

किसी रंजिश से क्या हासिल ज़माने को   जानते सब फिर भी मसखरी  करते है                            राजेश’अरमान’

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Posted on March 21, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

कोई तो फर्क नज़र आता है

कोई तो फर्क नज़र आता है जब अंधेरों में जुगनू  जगमगाता है                राजेश’अरमान’

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Posted on March 21, 2016November 26, 2018 by rajesh arman

चमन से हासिल वही होता है

चमन से हासिल वही होता है जो माली के लिए सही होता है             राजेश’अरमान’

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