रुकना हमने सीखा ही नही झुकना ही ह्मारी नीयती है मुश्किलें हजारों चाहे आयी हो रुकना हमारी सोचो में नही                        …… यूई

तीर चलाने से पहले सोचो ज़ुबान चलाने से पहले सोचो कमान से निल्का हुआ तीर ज़ुबान से निकला हुआ तीर दोनों वापस क्भी नही आते                  …… यूई

तू तुच्छ सा जीव ओ बंदिया किस बात पे इतना अकड़ता तू पल भर की तेरी हस्ती नही है किस बात पे इतना इतरता तू                          …… यूई

झुकना है निशानी मन निमाने की निम्न मन ही तो सबको अपना पता निम्न मन ही तो सब सच जान पता निम्न मन ही तो असल में जी पाता                          …… यूई

अकड़ तेरे मन की काली छाया इसको कर बड़ा क्या तू पाएगा ख़ुद अंधेरों से निकाल ना पाएगा किसी को क्या तू राह् दिखाएगा                          …… यूई

तेरे इशक की शराब पी मैंने बरसों पी मैंने पर बहक गया आईना मेरा रकीब लगता है मुझे यह आईना मेरा देखता है कोई भी सूरत इसमे अपनी दिखाता है उसको यह बस चेहरा तेरा […]

मयकदे की सीढ़ियाँ तो चढ़ ना पाए कैसे रख पाओगे लाज़ तुम पैमाने की बीच राह् में ही कही तुम बहक गए कदम मंज़िल से पहले ही भटक गए बातें करते थे तारों और आसमानो […]

ए ज़िन्दगी   जीतेंगे हम जीतेंगे इस मुश्किल को भी जीतेंगे जीतेंगे हम जीतेंगे हम हारी बाज़ी जीतेंगे जीतेंगे हम जीतेंगे भँवर से गुज़र कर जीतेंगे जीतेंगे हम जीतेंगे तुझे पार लगा फिर जीतेंगे                           […]