तुझे पाने वाला ख़ुद का नसीब कहता है लुटने वाला ख़ुद को बद‍नसीब कहता है हैं दोनों ही तेरी राह् के भटके मुसाफिर तूँ तो दोनों को ख़ुद की औलाद कहता है …… यूई

ता-उमर लगायी दौलत कमाने मैं तूने जो कमाया अब वोही तो तेरा है बंदिया बेवफ़ाई पे मेरी क्यों तूँ इतना बिखर गया वफ़ा तूने क्मायी ही कहा, जो ढूँढे बंदिया हाँ दौलत से मिलती नही […]

मालूम हैं मुझे के में ना खरा उतरा तेरी आस्मानी उम्मीदो के पैमानों पर हाँ मैँ ही तुझे यह समझा ना पाया इंसानो को नही तौलते खुदा के पैमानों पर …… यूई

जाने क्यों कोई शिकायत नही तुमसे मालूम नही के कैसा तुझ्से रिश्ता है हाथ उठ भी नही पाते दुआ में तेरी रह्मत तेरी पहले ही बरस जाती है   ….. यूई

पृथ्वी, सूरज, तारे और ग्रह सब चलते ही तो रहते है में भी ब्रह्मांड का हिस्सा हू फिर क्यों में आराम करू                            …… यूई