तज़ुर्बे जलने के बटोरे उम्र भर जानता हूँ बेकार नहीं जायेगा राजेश’अरमान’
तज़ुर्बे जलने के बटोरे उम्र भर जानता हूँ बेकार नहीं जायेगा राजेश’अरमान’
वो झूठ भी बोलते है इस सफाई से सच भी उनके सामने झूठ बन जाता है राजेश’अरमान’
कुछ गुजरने जैसी ही गुजर जाती है किसी तमगे की मोहताज नहीं होती ज़िंदगी राजेश’अरमान’
उनके फेके पत्थर अब तक उठा रहा हूँ न जाने फिर कब उनके काम आ जाएँ राजेश’अरमान’
मेरी तस्वीर से लेकर तक़दीर सब गर तय है मेरे हिस्सें में पाप -पुण्य का खाता क्यूँ ? राजेश’अरमान’
हाथ की लकीरें ही गर सुख-दुःख है जीवन फिर खेल कहाँ ,बस इक तमाशा है राजेश’अरमान’
गर मैं तुम्हे फिर पाने के लिए यहाँ हूँ ऐ खुदा फिर जुदा होने की ये सजा कैसी राजेश’अरमान’
गर खुदा होना ही मंज़िल है हाथों में गलत नक़्शा क्यों ? राजेश’अरमान’
अपने कण कण को बस तराश रहा हूँ तेरे जर्रें -जर्रें को बस तलाश रहा हूँ राजेश’अरमान’
हर आती साँस जाती साँस का अक्स है, और हर जाती साँस आती साँस का आईना राजेश’अरमान’
सब डोर है तेरे हाथों में अपने हाथों में चंद लकीरें राजेश’अरमान’
गर बंद आँखों से ही तेरा दीदार हो ख़ुदा ऑंखें खुलने की सजा न दे राजेश’अरमान’
हर रास्तों पे हमसफ़र जरूरी नहीं मंज़िलें जुदा हो तो मंज़िल नहीं मिलती राजेश’अरमान’
लकीरें जुदा कर सकती है हसरतें मिटा नहीं सकती राजेश’अरमान’
अपने कल्ब की आवाज़ भी न सुन सका शोर ज़माने का बाहर इस कदर था राजेश’अरमान’
टूटी शाख के पत्ते ,शाख के गुनाह होते है सजा बेगुनाहों को भी मिलती है इस तरह राजेश’अरमान’
मेरे क़त्ल के बाद इक क़त्ल और होगा आज की तारीख वफां पे फ़ना होगी राजेश’अरमान’
दम तो हर ख्वाइश में था आखिर निकला तो, दम निकला राजेश’अरमान’
आदरणीय ‘कार्टूनिस्ट ‘ प्राण जी को श्रद्धांजलि याद तो बहुत आओगे और भूलना बेहद मुश्किल तुम मेरे यादों में बसे तुम मेरे बचपन के साथी तुम मेरे भीगी आँखों की मुस्कान तुम मेरे सपनो को […]
अब तो दिन बौने आदमकद रातें हो गई है बर्क आसमां पे आँखों से बरसातें हो गई है किस वफ़ा की तलाश में सिर खपाते हो वफ़ा की बातें डायनासोर की बातें हो गई है […]
तेरे इशक की शराब पी मैंने बरसों पी मैंने पर बहक गया आईना मेरा रकीब लगता है मुझे यह आईना मेरा देखता है कोई भी सूरत इसमे अपनी दिखाता है उसको यह बस चेहरा तेरा […]
मयकदे की सीढ़ियाँ तो चढ़ ना पाए कैसे रख पाओगे लाज़ तुम पैमाने की बीच राह् में ही कही तुम बहक गए कदम मंज़िल से पहले ही भटक गए बातें करते थे तारों और आसमानो […]
!!!! SAGAR KE DIL SE !!!! khamosh hai ye pal ye waqt khamosh hai ajeeb sa hai shor par awaaj khamosh hai shabdo ka laga hua hai mela par matlab khamosh hai kholun bhi tau […]
ए ज़िन्दगी जीतेंगे हम जीतेंगे इस मुश्किल को भी जीतेंगे जीतेंगे हम जीतेंगे हम हारी बाज़ी जीतेंगे जीतेंगे हम जीतेंगे भँवर से गुज़र कर जीतेंगे जीतेंगे हम जीतेंगे तुझे पार लगा फिर जीतेंगे […]
ए ज़िन्दगी इस बाधा को पार करने में क्या हमें कठिनाई है …… यूई
ए ज़िन्दगी सभी बाधाओं को तोड़, चाहतें तेरी हमने कमाई हैं …… यूई
ए ज़िन्दगी यह छोटी सी रुकावटे तुम्हें हमसे ना ज़ुदा कर पायेंगी …… यूई
ए ज़िन्दगी हौसलों की परवाज़ो से हर मुश्किल छोटी कर पाई है …… यूई
ए ज़िन्दगी लाखों अवरोधों से लड़ हमने तेरी नैया पार लगायी है …… यूई
ए ज़िन्दगी मुश्किल राहों को सर करने की अपनी पुरानी रवाई है …… यूई
ए ज़िन्दगी कितने व्यवधानों में डाल तूने हमारी वफ़ा आज़्मायी है …… यूई
ए ज़िन्दगी सब भँवरो और तूफानों से, तुझे बचाने की इच्छाई है …… यूई
ए ज़िन्दगी तू इक दिन तो जानेगी, हम तेरे कितने शौदायी हैं …… यूई
ए ज़िन्दगी आसान ना थी कभी तेरी राहें पर हमने वफ़ा निभायी है […]
तेरे दिल का गरूर
चाहे दिन और रात के ख्वाबों का इक दूजे से कोई रिश्ता नाता नही दिन के ख्वाबों ने अकसर दे धोखा यूई को रातों में खूब तड़पाया है …… यूई
कुछ ख्वाब होते हैँ जलती चिंगारी उनका मिट कर बुझना है ज़रुरी कुछ ख्वाब होते हैँ मौत से भारी उनको जन्मा कर मिटाना भी ज़रुरी …… यूई
ख्वाब ना हैँ किसी की जागीर ख़ुद ही अपनी मर्ज़ी के है पीर आते किसी भी वक्त यहां पे जाते हैँ किसी भी वक्त यहा से …… यूई
ख्वाब तो फिर ख्वाब है एक उमर उनकी है तयशुदा टूटते कितने है हर रोज़ यहां जमते भी हैँ कितने रोज़ यहां …… यूई
ख्वाब चुनते है अकसर हर तस्वीर अधूरी हो हर तस्वीर पूरी यह कतय नही ज़रूरी ख्वाहिश-ए-दिल तेरे की क्या मर्ज़ीया यहा पढ़ सकता है तो पढ़ टूटी सी तस्वीर अधूरी …… यूई
वोह दिन के हो या रात के वोह ख़ुद के हो या मीत के ख्वाब तो आख़िर ख्वाब हैँ ख्वाबों को ख्वाब ही रह ने दो ना डालो इनमें अरमान भींच के …… यूई
नए ख्वाबों का आना भी ज़रुरी है पुराने ख्वाबों का जाना भी ज़रुरी है है इनक़ी फि़तरत कुछ हमारी मानिंद नये के लिए पुराने का जाना भी ज़रुरी है …… यूई
ख्वाब भी है कुछ हमारे ही जैसे चाहे दिखते हैँ बाहर से इक जैसे उम्र यहां किसी की पूरी किसी की अधूरी उम्र ख्वाबों की भी कभी पूरी कभी अधूरी …… यूई
रातों के ख्वाब गर लुट जाएँ तो उनका कुछ भी गम नहीं दिन के ख्वाब गर लुट जाएँ ज़िन्दगी में फिर गम कम नहीं …… यूई
ख्वाब वही आँखें वही सोच वही सोचने वाला वही रात के ख्वाबों की तस्वीर नही दिन के ख्वाबों की तक़दीर नही …… यूई
ख्वाब मेरे दुश्मन तो नही पर तब वोह मुझको चुभते हैँ जब रूह तड़प कर उठती है वोह जलता है कुछ अन्दर से …… यूई
तेरी आरजू में मुझे जुदाई ही मिली है! जुदा हालात में मुझे तन्हाई ही मिली है! अब नाकाम हो चुकी हैं मेरी मंजिलें सभी, वफा की राह पर मुझे रूसवाई ही मिली है! Composed By […]
पाप पुण्य कुछ भी नही, ऐसा हुआ जहान! पैसा ही भगवान है पैसा ही ईमान !!
कुछ ख्वाब कभी रुक जाते हैँ ता-उमर बना घर पलकों तले हां बाहर से वोह दिखते नही अन्दर से पल पल तड़पाते है …… यूई
दिन के ख्वाब रातों में रातों के ख्वाब दिन में गर ना दिलाएँ याद अपनी तो ज़िन्दगी हो जाए अपनी …… यूई
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