Category: हिन्दी-उर्दू कविता
. ღღ__ना कोई उम्मीद, ना तड़प, ना ही इंतज़ार किसी का; . कितना अच्छा होगा वो जहाँ, जहाँ मोहब्बत नहीं होगी !!….अक्स .
मिलती है आशीष झुकने से इंसा फिर अकड़ता क्यों है राजेश’अरमान’
कोई तीर निकला कमान से बेवज़ह न जाने किसकी बारी आई बेवज़ह राजेश’अरमान’
सुना है बहुत दूर की सोचते है वो हमें वो सोचे इसके वास्ते शायद दूर जाना पड़ेगा राजेश’अरमान’
कितने मुश्किल सफर तय किये है मुड़ के तो देख अब रूक क्यों गया है फिर चल के तो देख राजेश’अरमान’
लुप्त होते रहे गर अच्छे इन्सां इसी तरह , इक दिन ये कहीं डाइनासोर न हो जाए राजेश’अरमान’
कल छोड़ के आया था जिसे अँधेरे में वो तन्हाई आज , फिर मुझे रोशन कर रहीं है राजेश’अरमान’
न तख्तो पे न ताज़ों पे नज़र रखता हूँ न कोई जलवा न रिवाज़ों पे नज़र रखता हूँ जो देखने का मुझे बंद आँखों से जुनूँ रखते है बंद आँखों से , उन बंद आँखों […]
फ्रेंडशिप डे पर फेस बुक के सभी दोस्तों के लिए रस्म कुछ फेस बुक में हम इस तरह निभाते है बिन मिले कभी हम दोस्ती का फ़र्ज़ निभाते है हर वक़्त आँखें गड़ी रहती दोस्तों […]
फिर तुम्हे याद किया याद न आने की फ़रियाद किया राजेश’अरमान’
कदम रुकने से मंज़िल कुछ और दूर हो जाती है मुसाफिर की थकन से राह मजबूर हो जाती है हौसलों की हवा से उड़े है जहाँ के गुब्बारे, उड़ते गुब्बारों की दुनिया में हस्ती मशहूर […]
काश दिलासो की कश्तियों में कोई छेद न होता राजेश’अरमान’
अक्सर हादसे सहते रहे काश ख्वाब भी कोई हादसा होता राजेश’अरमान’
ख्वाब तो आफताब है शाम होते ही ढल जाते है राजेश’अरमान’
हिचकोलों से भरी ज़िंदगी ढूंढ़ती किनारा चुपचाप सा राजेश’अरमान’
वो ज़ज़्बा कहा खो गया जब इंसा सिर्फ इंसा था राजेश’अरमान’
वास्ता नहीं खुद से लेकिन दुनिया की फ़िक्र रखते है राजेश’अरमान’
सच से दूर हो रहा इंसा कोई चढ़ा दे पारा चेहरे पर राजेश’अरमान’
जब वो बेवज़ह मुस्कराते है गम लेता है अंगड़ाई चुपके से राजेश’अरमान”
आईने को कोई झूठ सीखा दे आईने को कोई आईना दिखा दे राजेश’अरमान’
काफिलों के साथ साथ चलते रहे दुनिया के रंग में बस ढलते रहे राजेश’अरमान’
अपने ही लोग फिर शहर में दहशत क्यूँ अपनी ही आँखों में जहर सी वहशत क्यूँ कहीं तो सुनी जाएगी आख़िर फ़रियाद किसी सजदे को ,किसी दुआ की हसरत क्यूँ राजेश’अरमान’
कुछ अकेले से एहसास फिरते है दरम्या मेरे कुछ कशिश है उदास फासलों के घने अँधेरे दबे कदम चलती साँसें सहमे कदम आते सबेरे हलकी बारिश का मौसम आँखों में धुँआ के फेरे सोती रात […]
खुद को बदलने से जरूरी है खुद का किरदार बदलना आदमी दुनिया में पहचाना जाता है किरदारों से राजेश’अरमान”
ना खुद को बदल सका ना तेरी निगाहों को सिलसिला बस चलता रहा खत्म होने के लिए राजेश’अरमान’
मेरी उठती सांसों की तरह वो दबे- दबे से एहसास कैसे उठते चले गए वज़ूद को भेदने लगी तेरी लफ़्ज़ों की सौगाते कैसे सुनते चले गए तेरे हँसने से झर रहे फूल चाहा था चुनना […]
तूफां ने लहरों को कब ज़िंदगी दी है हवाओं ने चरागों को कब रौशनी दी है चाँद को तकता है थोड़ी सी रौशनी के लिए , सूरज ने कब जुगनुओं को रौशनी दी है राजेश’अरमान […]
तुमने मेरे बाग़ के फूलों को पत्थर कर दिया, मैं तेरी गली के पत्थरों को फूल करके आया हूँ जाना मुझे तेरी गली ,आना तुझे मेरे बाग़ों में इस आने जाने को कितना माकूल करके […]
वादियों में गूंजती आवाज़ लौट सकती है घटाओं में छुपी बिजलियाँ कौंध सकती है ना ले मेरी खामोशियों का इम्तेहान इस कदर, मेरी ख़ामोशी तेरे लफ़्ज़ों को रौंद सकती है राजेश’अरमान’
तुम आसमाँ मैं ज़मीं ही सही तुम हो आंसूं मैं नमीं ही सही यूँ पलट के देखना तेरा बार बार कुछ नहीं मेरी कमीं ही सही राजेश’अरमान ‘
शोर नहीं जो दबा दिया जाऊँ हर्फ़ नहीं जो मिटा दिया जाऊँ कोई दीवार पे टंगी तस्वीर नहीं जब चाहे जिसे हटा दिया जाऊँ राजेश’अरमान’
जो बिकता सरे आम वो ईमान होता है जो जहाँ को समझे वो नादान होता है बदलते रंग में ढल गयी सारी दुनिया जो अधूरा रहे सदा वो ‘अरमान’ होता है राजेश’अरमान’
आ ज़िंदगी तुझे रिश्वत दूँ एक नई तुझे तबियत दूँ गुफ्तगू ये तेरे मेरे बीच की , आ नई तुझे शख्शियत दूँ राजेश’अरमान’
मैं रास्ते खुद अपने बना लूँगा वक़्त जैसे चलना है अपनी चाल चल राजेश’अरमान’
अब गुनाह में नीयत नहीं देखी जाती अब प्यार में सीरत नहीं देखी जाती सब के अपने फलसफे ,सबके अपने तजुर्बे अब उम्र के लिहाज़ की इज्जत नहीं देखी जाती धन दौलत का चारों तरफ […]
जुदा हो जाते पिंजरे से पखेरू लिख जाते कोई दास्तां अधूरी राजेश’अरमान’
कोई शजर शाख से बैर नहीं रखती कोई शाख पत्तों को गैर नहीं रखती अपने हौसलों से ही जहाँ मिलता है कोई दरवाज़े पे किस्मत पैर नहीं रखती राजेश’अरमान’
इतना न पशेमाँ हो की मैं पिघल जाऊं कुछ तो रहने दो पत्थर मेरे अंदर राजेश’अरमान’
दे के वो गिनते रहे ज़ख्म मेरे मैं उनकी सादगी पे फ़िदा हो गया राजेश’अरमान’
या रब्ब दुश्मनों को सलामत रखे सदा न जाने कब आरज़ू क़त्ल की मचल जाये राजेश’अरमान’
अंधेरों में वो नज़र आते है उजालों में जो ठहर जाते है चाक रखते है दामन अपना पर महफ़िलों में संवर जाते है राजेश’अरमान’
अक्स आईने में दिखता तो जरूर है हम ही तोहमत लगा जाते है आईने पे राजेश’अरमान’
मसला सिर्फ इतना है वो समझते नहीं मुझे गर समझते तो इक नया मसला खड़ा होता ठीक से नहीं समझते इस ठीक से समझने की कोई परिभाषा नहीं है अंदर से तालमेल की कोई अभिलाषा […]
बारिश की बूंदो की हल्की हल्की आवाज़ कानो में रस घोलते जेहन में उतर जाती है कौंधती बिजलियाँ कुछ ठक ठक सी दस्तक देती है मन के कोने में जिस कोने को बंद दरवाज़ा बना […]
गुथियाँ सुलझाने में उलझ जाता जीवन पकड़ के कान खींचता है जीवन कभी इस तरफ कभी उस तरफ सीधी रेखाएं खींचता हूँ जीवन की, पर जा के मिल जाती है ये हाथ की टेढी रेखाओं […]
एक जानी पहचानी सड़क पर चला जा था मैं बेखबर तभी कुछ पहचानी सी आवाज़ें सुनाई दी पुलिस की गाडी की आवाज़ सुनाई दी देखा सड़क पर पड़ी हुई थी एक लाश जिसके कातिल को […]
खुद से जुदा भी नहीं मुखातिब भी नहीं खुद को बयां करूँ ऐसा कातिब भी नहीं गुमगश्ता फिरती है नाशाद रूह जिसकी फ़िदाई बन भी सकूँ ऐसा जाज़िब भी नहीं राजेश’अरमान’ फ़िदाई= प्रेमी कातिब= लेखक […]
तेरी याद आज बैठी है गुमसुम शायद थक गई यादों की भी उम्र होती है एक उम्र बाद यादें धुँधली पड़ जाती है लेकिन तुम्हारी यादों की ताप बढ़ गई है उम्र के साथ राजेश’अरमान’
कुछ खट्टी मीठी छोटी छोटी बातों का एक छोटा सा संसार है जिसे न जाने कितनी सरहदों कितने धर्मों में बाँट रखा है बस आती जाती सोच का तमाशा है जरूरी है तय होना कौन […]