वोह दिन के हो या रात के वोह ख़ुद के हो या मीत के ख्वाब तो आख़िर ख्वाब हैँ ख्वाबों को ख्वाब ही रह ने दो ना डालो इनमें अरमान भींच के                                 …… यूई

नए ख्वाबों का आना भी ज़रुरी है पुराने ख्वाबों का जाना भी ज़रुरी है है इनक़ी फि़तरत कुछ हमारी मानिंद नये के लिए पुराने का जाना भी ज़रुरी है                                             …… यूई

ख्वाब भी है कुछ हमारे ही जैसे चाहे दिखते हैँ बाहर से इक जैसे उम्र यहां किसी की पूरी किसी की अधूरी उम्र ख्वाबों की भी कभी पूरी कभी अधूरी                                             …… यूई

तेरी आरजू में मुझे जुदाई ही मिली है! जुदा हालात में मुझे तन्हाई ही मिली है! अब नाकाम हो चुकी हैं मेरी मंजिलें सभी, वफा की राह पर मुझे रूसवाई ही मिली है! Composed By […]

गर समझ न सके मेरे मौन को शब्दों को क्या समझ पाओगे पास आकर भी तुम मन के हाशिये से दूर ही रह जाओगे सब जायज है जुबान से निकले हुए तल्ख़ चिंगारी वास्ते तेरे […]

तुम कहाँ रहते हो? मैं अपनी आत्मा की परछाई में रहता हूँ तुम क्या करतेहो ? मैं चुपचाप सब कुछ सहता हूँ तुम क्या देखते हो ? हर तरफ आंसूं जो आँखों से बहते रहता […]

कभी तो मेरे माजी का क़त्ल कर दिया जाएँ जख्म जैसा भी हो कुछ पल भर दिया जाएँ माना की शब की जीस्त दुआओं से है भरी हो असर ऐसा ख़्वाबों को सहर कर दिया […]

कोई आहट नहीं कोई आवाज़ नहीं टूटा पत्ता हूँ कोई शाख नहीं अपने हाथों से किया क़ैद खुद को पंख तो हूँ मगर परवाज़ नहीं कैसे खुद को बना दिया क़ाफ़िर ज़िंदगी तुझसे मगर नाराज़ […]

एक जरूरी दस्तावेज ही तो है जीवन न कागज़ अपना न स्याही अपनी फिर भी भ्रम अपना कहने का अपनी सासें अपनी धड़कन से विवाद करती कभी तालमेल नहीं मन से मन का फिर भी […]

ज़िंदगी क्या है एक अदाकारी है न तुम्हारी है न हमारी है ख्वाब आये भी तो रात के पिछले पहर क्या कहे कैसे बाकी रात गुजारी है मुझसे मत पूछ वफ़ा क्या होती है ये […]

हाथ की रेखाएं न बदनाम कर डालो कुछ नज़र अपने करम पर भी डालो तेरा वज़ूद खड़ा एक गुनहगार सा क्या हर्ज़ खुद को कातिल समझ डालो तीर तरकश से निकल कब लौटे है अब […]

हर सांस है मुजरिम न जाने किस गुनाह में हर ख्वाईश है क़ैद न जाने किस गुनाह में न कुछ बस में तेरे न कोई डोर हाथ में जाएँ तो ज़िंदगी किन क़दमों की पनाह […]

हर चेहरे अपने पर कोई आश्ना न मिला गिला खुद से मगर कोई आईना न मिला अपनी तक़दीर-बुलंदी का क्या कहना बर्क़ को जब कोई आशियाँ न मिला फ़िज़ां मिली तो मगर खुशगवार न थी […]

कहाँ से फिर निकला आरजुओं का सैलाब चंद कागज़ लपेट ,जिंदगी बन गई है किताब / कभी लगता पहन ल़ू ,लगता कभी ओढ़े बैठा हूँ नज़र क्यों आती है ,हर चेहरे पे नकाब/ तेरे सवालों […]

बेज़ुबान दर्द सो गया ,करवट न ले सकी नींद हमारी लम्हे रुके रुके से रहे , थक के सो गयी किस्मत हमारी क्या रखा था सिरहाने मेरे अपने कापते हाथों से कमबख्त हरसूँ छोड़ गयी […]

एक आहट सी सुनी है तेरे जाने के बाद कोई समझाए क्या बारहा समझाने के बाद डूबा बैठा हूँ न जाने किस सोच के समुन्दर में हर लहर लौट आ जाती एक लहर जाने के […]

सिर्फ एहसास है वफ़ा फिर छूने को जी करता है यह कौन देता है सदा सुनने को जी करता है हर शख्स का वज़ूद जुदा फितरत भी जुदा फिर भी उम्मीद वो खुद के वज़ूद […]

कतरा कतरा लहूँ का जिस्म में सहम गया चलो इसी बहाने रगों में बहने का वहम गया वो कोई हिस्सा था मेरे ही जिस्म का जुदा हुआ वो तोड़ कोई कसम गया मेरे मिटने की […]

आंधियो मेहमां बन जब जी चाहे तुम आया करो अर्ज़ बस इतनी तुम दरख्तो को न गिराया करो तूफा तो हर तरफ हर जगह आते रहते है अर्ज़ बस इतनी तुम कश्तियों को न डुबाया […]

आंसुओं का क्या है निकलते है फिर कुछ बह जाते ,कुछ सूख जाते है लफ्जों के जहर ही तकलीफ दे जाते है लहूँ में घुल नसों में मुझसे तेज दौड़ जाते है काश लम्हों की […]

जीवन सिर्फ जीवकोपार्जन के लिए किया प्रयास नहीं है जी सभी रहे है लेकिन जीने का एहसास नहीं है सदियाँ बीती हवाओं की भी इस ज़माने की हवा लग गई है दीपक हौसलों के बस […]

इक बार मेरी सिसकती कलम ने कोरे कागज़ पर लकीरें खीच दी मैं सारी उम्र उसे जीवन रेखा ही समझता रह गया इक बार मेरा हाथ उन लकीरों में पड़ गया लगा सारी हाथ की […]

फासलों का मंजर देख कुछ याद आया किसी अजनबी शहर सा बस ख्याल आया कोई शोर नहीं किया आईने ने उस वक़्त जब देख चेहरा अपने कोई सवाल आया परदे ही परदे में रह गए […]

गर वाबस्ता हो जाता रूहे-अहसास से जमाना न कोई शायरी होती न कोई ग़ज़ल होती गर वफ़ा करने की आदत होती जहाँ में न कोई शायरी होती न कोई ग़ज़ल होती गर न तेरे शिकवे […]