तेरा सजदा – 53           कोई दूसरों को बछाने हेतू काँटों का ताज पहनता कोई दूसरों को गिराने हेतू काँटों की राह् बनाता                                                          ….. यूई

तेरा सजदा – 52           कोई अपने धन के लिए तुझे धियाता कोई दूसरो के दर्दों के लिए तुझे धियाता                                                          ….. यूई

मेरी जिन्दगी तुम्हारी आहट खोज लेती है! कोई कली जिसतरह मुस्कुराहट खोज लेती है! हरतरफ होती हैं दीवारें सन्नाटों की मगर, मयकदों को जाम की सुगबुगाहट खोज लेती है! Composed By #महादेव

रात के ख्वाबों में भी उसका सहारा चाहिये, दिन के हर लम्हात में उसका इशारा चाहिये, हुजूर वो भी इन्सान है शैतान नहीं ,उसकी पलकों को भी तो दरिया का किनारा चाहिये,

वो समुन्दर भी बहुत रोता है समझ गया एक दिन समुन्दर,तू भी कितना रोता है, खारा है तू खुद में कितना , शायद इंसान से ज्यादा तू दिल ही दिल रोता है, पाया क्या तूने जो खोया होगा, की तू […]

बेवफा दिल बेवफा ज़िन्दगी में किसी अजनबी से प्यार हो गया , मोहबत हुई उनसे इस कदर की ऐतबार हो गया , सुना था दुनिया में अक्सर की ये प्यार क्या है , किया जब […]

कदम रुकने से मंज़िल कुछ और दूर हो जाती है मुसाफिर की थकन से राह मजबूर हो जाती है हौसलों की हवा से उड़े है जहाँ के गुब्बारे, उड़ते गुब्बारों की दुनिया में हस्ती मशहूर […]

खुद की भागम -भाग उसपे रस्ते आग ही आग कुछ शीतल भी है अम्बर के नीचे कुछ शांति भी है अम्बर के नीचे अपने ही हाथों से हमने खुद मानव से बदल कर बना दिया […]

कुछ तो दायरे हो , जिसमे रहना जरूरी है जिस के अंदर खुद को भी रखना जरूरी है प्रगति के हम एक कारीगर है मगर वक़्त के साथ कारीगर बदलते रहना भी जरूरी है कुछ […]