कभी मन करता है फिर से दुनिया को औरों की नज़र से देखूँ शायद मेरी नज़र में कोई भ्रान्ति दोष हो एक बार देखा जब दुनिया को दूसरी नज़र से लगा आँखों पे कोई चाबुक […]

अपनी हर सांस तो बस तेरी चाह में गुजरी तेरी सारी उम्र जमाने की परवाह में गुजरी सोचा था कहोगे उदास तुम मेरी खातिर न हो क्या कहेगा ज़माना ,फिक्र ज़िंदगी की राह में गुजरी […]

कभी बादलों से कभी बिजलिओं से बनती है सरगम कलकल बहते पानी चलती हवाओं से बनती है सरगम इठलाती घूमती बेटियां होती झंकार बनती है सरगम अपनी साँसें भी जब सुर में हो बनती है […]

कोई वज़ह यूँ भी निकल आती तेरे मिलने की तारों की सजी डोली लेके आता कहार मेरे मन के द्वार मैं मन ही मन में रूप लेता निहार काश उस डोली में कोई ख्वाब सजा […]

चल पड़ा फिर जिस्म किसी राह में मन को छोड़ अकेला क्यों नहीं चलते दोनों साथ -साथ कोई रंजिश नहीं फिर भी रंजिश फूल की बगावत किसी टहनी से भवरे की शिकायत किसी फूलों से […]

रात अपना ही कोई किस्सा बन जाता हूँ दिन के उजाले में कोई हिस्सा बन जाता हूँ निकल तो जाता हूँ बाज़ारों में कहीं शाम के होते ही न चलने वाला कोई सिक्का बन जाता […]

हर भोर उगता सूरज नई किरणों के संग नए खेल रचता नई ऊर्जा का संचार दिन भर तपस कभी ज्यादा कभी कम इस ज्यादा इस कम में दबे बैठे है कई प्रश्न राजेश’अरमान’

वज़ूद अपना ज़माने से जुदा रख अपने अरमानों को गुमशुदा रख परिंदे के वास्ते अर्श की सरहदें कहाँ अपने अंदर कोई दोस्त कोई ख़ुदा रख राजेश’अरमान’

बरपने लगा शोर कुछ अपने पाले सन्नाटों में कुछ उधर भी है खलबली उनके दिए काँटों में माना की कोई मरासिम नहीं उनके सायों से , अब भी मौजूं है मगर हर किसी की आहटों […]

मोहब्बत हो जाय तब देखेंगे , तेरा नाम भी लिखकर मिटाकर देखेंगे । तेरी यादों के साये जब घेरेंगे मुझे घर के चिराग बुझाकर जलाकर देखेंगे ।