मर गई आत्मा ,शरीर कहने को ज़िंदा है पंछी मन का उड़ गया ,आँखों में परिंदा है राजेश’अरमान’
मर गई आत्मा ,शरीर कहने को ज़िंदा है पंछी मन का उड़ गया ,आँखों में परिंदा है राजेश’अरमान’
कभी बादलों से कभी बिजलिओं से बनती है सरगम कलकल बहते पानी चलती हवाओं से बनती है सरगम इठलाती घूमती बेटियां होती झंकार बनती है सरगम अपनी साँसें भी जब सुर में हो बनती है […]
गम की फसलें सींचता आँखों की बारिश से हर ख्वाब ने दम तोडा अपनी ही गुजारिश से राजेश’अरमान’
अब मंज़िल मेरे साथ-साथ चलती है जब से बनाया मंज़िल अपने साये को राजेश’अरमान’
कोई वज़ह यूँ भी निकल आती तेरे मिलने की तारों की सजी डोली लेके आता कहार मेरे मन के द्वार मैं मन ही मन में रूप लेता निहार काश उस डोली में कोई ख्वाब सजा […]
चल पड़ा फिर जिस्म किसी राह में मन को छोड़ अकेला क्यों नहीं चलते दोनों साथ -साथ कोई रंजिश नहीं फिर भी रंजिश फूल की बगावत किसी टहनी से भवरे की शिकायत किसी फूलों से […]
रात अपना ही कोई किस्सा बन जाता हूँ दिन के उजाले में कोई हिस्सा बन जाता हूँ निकल तो जाता हूँ बाज़ारों में कहीं शाम के होते ही न चलने वाला कोई सिक्का बन जाता […]
उसकी नज़रों की तलाशी में मेरे किरदार बदले से मिले मैं ढूंढ़ता रहा उसकी आँखों में चंद कतरे पर जमे से मिलें राजेश’अरमान’
जरूरत के हिसाब से , खुद से पहचान हुई कई हिस्से अब भी अजनबी है मेरे अंदर राजेश’अरमान’
हर भोर उगता सूरज नई किरणों के संग नए खेल रचता नई ऊर्जा का संचार दिन भर तपस कभी ज्यादा कभी कम इस ज्यादा इस कम में दबे बैठे है कई प्रश्न राजेश’अरमान’
वज़ूद अपना ज़माने से जुदा रख अपने अरमानों को गुमशुदा रख परिंदे के वास्ते अर्श की सरहदें कहाँ अपने अंदर कोई दोस्त कोई ख़ुदा रख राजेश’अरमान’
पिंजरे तो खोल दिए लेकिन पंछी उड़ गया पिंजरे लेकर राजेश’अरमान’
बरपने लगा शोर कुछ अपने पाले सन्नाटों में कुछ उधर भी है खलबली उनके दिए काँटों में माना की कोई मरासिम नहीं उनके सायों से , अब भी मौजूं है मगर हर किसी की आहटों […]
Hum wafaa ki chah mei,wafaa karte gye Intezaar ke ghoont thahar-thahar kr pite gye Wo boli na kuchh bhi- yu muskurati rahi Bss muskan ki gahraaii mei Hum uterte gye Tmannaye machalne lgi,kashishe jgne lgi […]
मोहब्बत हो जाय तब देखेंगे , तेरा नाम भी लिखकर मिटाकर देखेंगे । तेरी यादों के साये जब घेरेंगे मुझे घर के चिराग बुझाकर जलाकर देखेंगे ।
तेरा सजदा – 26 कोई तुझे सूख में ही जपता कोई तुझे बस दुःख में जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 25 कोई तुझे प्यार से जपता कोई तुझे निहार के जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 24 कोई तेरे जन्म को जपता कोई तेरे मरन को जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 23 कोई तुझे भोग लगा कर जपता कोई ख़ुद को खिवा कर जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 22 कोई तुझे भूखा रह कर जपता कोई भर पेट खा कर ना जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 21 कोई तुझे शांत बैठ कर जपता कोई तुझे नाच नाच कर जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 20 कोई सब पाने को जपता कोए सब खोने को जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 19 कोई तुझे इक रंग में जपता कोई तुझे हर रंग में रमता ….. यूई
तेरा सजदा – 18 कोई तुझे बस ख़ुद में जपता कोई तुझे हर शय में जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 17 कोई तुझे इक नाम में जपता कोई तुझे कितने नामों से जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 16 कोई हवाओ में बैठ कर जपता कोई गुफाओं में छिप कर जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 15 कोई तेरा नाम ओड़ के जपता कोए तेरा नाम लिख के जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 14 कोई झंडे पे लिख कुछ जपता कोई झंडे के रंगों में जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 13 कोई पानी में डूब तुझे जपता कोई आग पे चल तुझे जपता ….. यूई
तेरा सजदा – 12 कोई दिन में इक बार ना जपता कोई दिन भर तुझे जपता रहता ….. यूई
तेरा सजदा – 11 कोई दिए की लौ में रमता कोई बाती की लौ में रमता ….. यूई
तेरा सजदा – 10 कोई पथरो में देख् तुझे भजता कोई बिन देखे ही तुझको भजता ….. यूई
तेरा सजदा – 9 कोई ध्यान में जा करता सजदा कोई शोर मचा कर करता सजदा ….. यूई
तेरा सजदा – 8 कोई धूप जला कर करता सजदा कोई धुनी रमा कर करता सजदा ….. यूई
तेरा सजदा – 7 कोई मनके गिन गिन करता सज़दा कोई मनके चुन चुन करता सजदा ….. यूई
तेरा सजदा – 6 कोई माला घूमा कर करता सज़दा कोई माला नचा कर करता सज़दा ….. यूई
तेरा सजदा – 5 कोई आग लगा कर करता सज़दा कोई आग बुझा कर करता सज़दा ….. यूई
तेरा सजदा – 4 कोई बाहे जोड़ कर करता सज़दा कोई बाहे खोल कर करता सज़दा ….. यूई
तेरा सजदा – 3 कोई सर उठा कर करता सज़दा कोई सर झुका कर करता सज़दा ….. यूई
काश मैंने तुमको पहचाना होता! मेरे नसीब में मेरा मुस्कुराना होता! कभी बेवसी न होती हालात की मुझको, ज़िन्दगी जीने का मुझको बहाना होता! Composed By #महादेव
दरके आइनों को नाज़ुकी की जरूरत है गर आ जाएँ इल्ज़ाम यही तो उल्फत है फासले वस्ल के यू सायें से बढ़े जाते है ये कोई मिलना या तुम्हारी रुखसत है हरसूँ बिखर गए तेरे […]
वक़्त की चाल के अंदाज़ निराले तो न थे ख्वाब ही सो गए लेके कोई करवट शायद कहाँ तो आरजुएं थी तेरे मिलने की यां तो खुद ही हिस्सों में बट गए शायद जुबान पे […]
धुंधले आईने में कोई अक्स नज़र नहीं आता वक़्त की सुईया पकड़ने से वक़्त ठेहर नहीं जाता वो चिरागों सा रोशन कभी एक नूर सा था क्या हुआ शख्स अब वो नज़र नहीं आता कहता […]
रिश्तों की बानगियाँ अब तेजी से बदलने लगी है वास्ता लाश से कम कफ़न से ज्यादा हो गया है राजेश’अरमान’
ऊंची दीवारें भी पल में मिट जाती है बस नज़रें दीवार के पार जानी चाहिए राजेश’अरमान’
हर सांस है मुजरिम न जाने किस गुनाह में हर ख्वाईश है क़ैद न जाने किस गुनाह में न कुछ बस में तेरे न कोई डोर हाथ में जाएँ तो ज़िंदगी किन क़दमों की पनाह […]
ज़िंदगी कभी गूंथे हुए आटे की तरह लगती कभी फायदे की कभी घाटे की तरह लगती आस के फूल हर शाख पे खिलने दो टूटी आस चुभते हुए काटें की तरह लगती वक़्त की मार […]
कोई दिल का मेरे चारागर होता यूँ न तन्हा मेरा सफ़र होता आज फिर दिल ने आरजू की है घर के अंदर मेरा घर होता / वो जो रहते थे हमसाये की तरह मेरी परछाई […]
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